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Tuesday, March 16, 2010

कुछ नया नहीं है "सदियाँ" के संगीत में, अदनान सामी और समीर ने किया निराश

ताज़ा सुर ताल ११/२०१०

सजीव - सुजॊय, तुम्हे याद होगा, २००५ में एक फ़िल्म आई थी 'लकी', जिसमें सलमान ख़ान थे। याद है ना उस फ़िल्म का संगीत?

सुजॊय - बिल्कुल याद है, उसमें अदनान सामी का संगीत था और उसके गानें ख़ूब चले थे। लेकिन आज अचानक उस फ़िल्म का ज़िक्र क्यों?

सजीव - क्योंकि आज हम 'ताज़ा सुर ताल' में जिस फ़िल्म के गीतों की चर्चा करने जा रहे हैं, उस फ़िल्म का संगीत ही ना केवल अदनान सामी ने तैयार किया है, बल्कि गीतों के रीदम और धुनें भी काफ़ी हद तक 'लकी' के गीतों से मिलती जुलती है। आज 'ताज़ा सुर ताल' में ज़िक्र आने वाली फ़िल्म 'सदियाँ' के संगीत की।

सुजॊय - यह बात तो सही है कि अदनान सामी का रीदम उनके गीतों की पहचान है। जैसे हम गीत सुन कर बता सकते हैं कि गीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का है या कल्याणजी आनंदजी का या फिर राहुल देव बर्मन का, ठीक वैसे ही अदनान साहब का जो बेसिक रीदम है, वह झट से पहचाना जा सकता है। हम किस रीदम की तरफ़ इशारा कर रहे हैं, हमारे श्रोता इस फ़िल्म के गीतों को सुनते हुए ज़रूर महसूस कर लेंगे।

सजीव - इससे पहले कि गीतों का सिलसिला शुरु करें, मैं यह बता दूँ कि 'सदियाँ' राज कनवर की फ़िल्म है और उन्होने ही इसे निर्देशित भी किया है। फ़िल्म में मुख्य भूमिकाएँ अदा की हैं लव सिन्हा, फ़रेना वज़ीर, रेखा, ऋषी कपूर, शबाना आज़मी और हेमा मालिनी ने।

सुजॊय - तो चलिए शुरु करते हैं इस फ़िल्म का पहला गीत। शान और श्रेया घोषाल की आवाज़ों में "जादू नशा अहसास क्या"। समीर की गीत रचना है और धुन वही, अदनान सामी स्टाइल वाली। और रीदम भी वही जाना पहचाना सा। गीत ठीक ठाक बना है, कोई ख़ास बात वैसे नज़र नहीं आती। सुनते हैं। गीत सुन कर बताइएगा कि क्या आपको "सुन ज़रा सोनिये सुन ज़रा" गीत की याद आई कि नहीं।

गीत - "जादू नशा अहसास क्या"


सजीव - दूसरा गाना है मिका की आवाज़ में, "मनमौजी मतवाला"। इस गीत में भी कोई नवीनता नहीं है। वही पंजाबी पॊप भंगड़ा वाली रीदम। गीत की शुरुआत "दिल बोले हड़िप्पा" गीत की तरह लगती है।

सुजॊय - इस गीत को सुन कर फ़िल्मी गीत कम और पंजाबी पॊप ऐल्बम ज़्यादा लगता है। बेहद साधारण गीत है, और इसे भी समीर साहब ने ही लिखा है। वैसे इस गीत को थोड़ा सा और जुनूनी और स्पिरिचुयल अंदाज़ में अगर बनाया जाता और कैलाश खेर शैली में गवाया जाता, तो शायद कुछ और ही रंग निखर कर आता। सुनते हैं।

गीत - "मनमौजी मतवाला"


सजीव - तीसरा गीत बिल्कुल पहले गीत की ही तरह है, और इसे श्रेया घोषाल ने राजा हसन के साथ मिल कर गाया है, "सरग़ोशियों के क्या सिलसिले हैं"। अच्छा सुजॊय, बता सकते हो ये राजा हसन कौन है?

सुजॊय - हाँ, अगर मैं ग़लत नहीं तो वही राजा हसन जिन्होने ज़ी सा रे गा मा पा में एक जाने माने प्रतिभागी थे और उसके बाद भी कई रीयल्टी शोज़ में नज़र आए थे।

सजीव - ठीक पहचाना। इस गीत का रीदम भी वही अदनान रीदम है। समीर ने इस गीत में अच्छे बोल दिए हैं। शुरुआती बोल कुछ ऐसे हैं कि "अहसास ख़्वाहिशों का सांसों में मर ना जाए, सदियाँ गुज़र गई हैं लम्हा गुज़र ना जाए"। इस ग़ज़लनुमा गीत को सुनते हुए अच्छा लगता है।

सुजॊय - मैंने यह गीत सुना है और मेरा रवैय्या भी इस गीत के लिए सकारात्मक ही है। आइए सुनते हैं।

गीत - "सरग़ोशियों के क्या सिलसिले हैं"


सुजॊय - चौथे गीत में अदनान सामी की ही आवाज़ है और उनके साथ हैं सुनिधि चौहान। इस बार गीतकार समीर नहीं बल्कि अमजद इस्लाम अमजद हैं। "तारों भरी है ये रात सजन"।

सजीव - यह गीत भी अदनान सामी के एक पहले के गीत से इन्स्पायर्ड है।

सुजॊय - कौन सा?

सजीव - इस गीत को पहले सुनो और फिर तुम ही बताओ कि किस गीत से इसकी धुन मिलती जुलती लगती है। अदनान सामी का ऒर्केस्ट्रेशन ९० के दशक की तरह है। स्ट्रिंग्स और तमाम देशी और विदेशी साज़ों की ध्वनियों का प्रयोग सुनने को मिलता है, भले ही उन्हे सीन्थेसाइज़र पर बनाया गया हो। सुनिधि ने इस गीत को पतली और नर्म आवाज़ में गाया है। सुनिधि एक बेहद वर्सेटाइल गायिका हैं और किसी भी तरह का गीत बख़ूबी निभा लेती हैं। इस गीत में भी उसी प्रतिभा का परिचय उन्होने दिया है।

गीत - "तारों भरी है ये रात सजन"


सजीव - पता चला कुछ?

सुजॊय - हाँ, "तारों भरी है ये रात सजन" वाला हिस्सा सुन कर फ़िल्म 'सलाम-ए-इश्क़' का "दिल क्या करे" गीत के मुखड़े की याद आती है।

सजीव - बस, मैं यही सुनना चाहता था। 'सदियाँ' में कुल ८ गानें हैं, जिनमें से ५ गानें हम यहाँ पर सुन रहे हैं आज। आज का अंतिम गाना इस फ़िल्म का शीर्षक गीत है और इस गीत को सुनवाए बिना इस फ़िल्म के गीतों की चर्चा पूरी नहीं हो सकती। इसे गाया है रेखा भारद्वाज ने। "वक़्त ने जो बीज बोया"। धुन और बोल, दोनों के लिहाज़ से यह गीत इस फ़िल्म का सब से अच्छा गीत है। रेखा जी इन दिनों एक के बाद एक गीत गा रही हैं, और हर एक गीत को लोग हाथों हाथ ले रहे हैं।

सुजॊय - निस्संदेह इस गीत की वजह से इस ऐल्बम का स्तर काफ़ी उपर आ गया है। कुल मिलाकर 'सदियाँ' का संगीत सुरीला है और उम्मीद है जनता इसे स्वीकार करेगी। तो चलिए सुनते हैं यह अंतिम गीत।

गीत - "वक़्त ने जो बीज बोया"


"सदियाँ" के संगीत को आवाज़ रेटिंग **
यहाँ सब कुछ चिरपरिचित है. बड़े बड़े गायक गायिकाओं के नाम हैं गीत में दर्ज पर उस स्तर के नहीं हैं गीत सरंचना. शब्द भी समीर के कुछ नया नहीं देते. नदीम श्रवण और आनंद मिलिंद दौर की याद ताज़ा हो आती है. राज कन्वर संगीत में अपने टेस्ट के मामले में आज के दौर की ताल शायद नहीं भांप पाए हैं. फिल्म का संगीत "लेट डाउन" है.

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ३१- अदनान सामी का गाया वह कौन सा गीत है जिसका भाव फ़िल्म 'जाँबाज़' के "हर किसी को नहीं मिलता यहाँ प्यार ज़िंदगी में" गीत से मिलता जुलता है?

TST ट्रिविया # ३२ "फिर वह फ़िल्म आई जिसका मैं कहूँ कि गाना मैंने बहुत बार सुना, तब जाके लगा कि सही मयने में पिताजी एक गीतकार हैं और उन्होने एक अच्छी फ़िल्म लिखी है। और वह गाना था 'बिना बदरा के बिजुरिया कैसे चमकी'।" बताइए ये शब्द किसने कहे थे।

TST ट्रिविया # ३३ शान और श्रेया घोषाल ने साथ में सन् २००२ की एक फ़िल्म में एक युगलगीत गाया था "दिल है दीवाना"। बताइए फ़िल्म का नाम।


TST ट्रिविया में अब तक -
सीमा जी बहुत आगे बढ़ चुकी हैं, इस साल भी उनकी जीत अब तक तो सुनिचित ही लग रही है, बधाई

Monday, January 4, 2010

दूल्हा मिल गया...शाहरुख़ के कधों पर ललित पंडित के गीतों की डोली...

ताज़ा सुर ताल ०१/ २०१०

सजीव - गुड्‍ मॊर्निंग् सुजॊय! और बताओ न्यू ईयर कैसा रहा? ख़ूब जम के मस्ती की होगी तुमने?

सुजॊय - गुड्‍ मॊर्निंग् सजीव! न्यू ईयर तो अच्छा रहा और इन दिनों कड़ाके की ठंड जो पड़ रही है उत्तर भारत में, तो मैं भी उसी की चपेट में हूँ, इसलिए घर में ही रहा और रेडियो व टेलीविज़न के तमाम कार्यक्रमों, जिनमें २००९ के फ़िल्मों और उनके संगीत की समीक्षात्मक तरीके से प्रस्तुतिकरण हुआ, उन्ही का मज़ा ले रहा था।

सजीव - ठीक कहा, पिछले कुछ दिनों में हमने २००९ की काफ़ी आलोचना, समालोचना कर ली, अब आओ कमर कस लें २०१० के फ़िल्म संगीत को सुनने और उनके बारे में चर्चा करने के लिए।

सुजॊय - मैं समझ रहा हूँ सजीव कि आपका इशारा किस तरफ़ है। 'ताज़ा सुर ताल', यानी कि TST की आज इस साल की पहली कड़ी है, और इस साल के शुरु से ही हम इस सीरीज़ में इस साल रिलीज़ होने वाले संगीत को रप्त करते जाएँगे।

सजीव - हाँ, और हमारी अपने पाठकों और श्रोताओं से यह ख़ास ग़ुज़ारिश है कि अब की बार आप इसमें सक्रीय भूमिका निभाएँ। केवल यह कहकर नए संगीत से मुंह ना मोड़ लें कि आपको नया संगीत पसंद नहीं। बल्कि एक विश्लेषणात्मक रवैया अपनाएँ और इस मंच पर हमें बताएँ कि कौन सा गीत आपको अच्छा लगा और कौन सा नहीं लगा, और क्यों। ठीक कहा ना मैंने सुजॊय?

सुजॊय - १०० फ़ीसदी सही कहा आपने! और भई सीमा जी को टक्कर देने वाले भी तो चाहिए, वरना वो बिना गोलकीपर के गोल पोस्ट पर एक के बाद एक गोल करती चली जाएँगी, हा हा हा!

सजीव - आज तुम्हारा मूड कुछ हल्का फुल्का सा लग रहा है सुजॊय!

सुजॊय - जी बिल्कुल! नए साल में अभी तक ज़िंदगी ने रफ़्तार नहीं पकड़ी है न, इसलिए बिल्कुल फ़्रेश हूँ। और हमारे फ़िल्म जगत में भी साल का पहला महीना कुछ हद तक ढीला ढाला सा ही रहता है।

सजीव - ठीक कहा। तो चलो तुम्हारे इसी मूड को बरक़रार रखते हुए आज हम सुनते हैं और चर्चा करते हैं फ़िल्म 'दुल्हा मिल गया' के संगीत का। वैसे भी साल की शुरुआत 'लाइटर नोट' पे ही होनी चाहिए। बातें बहुत सारी हो गई, चलो जल्दी से इस फ़िल्म का शीर्षक गीत पहले सुन लेते हैं, फिर उसके बाद इस फ़िल्म की चर्चा शुरु करेंगे।

गीत: दुल्हा मिल गया...dulha mil gaya (title)


सुजॊय - यह तो दलेर मेहन्दी की आवाज़ थी ना?

सजीव - हाँ, कई दिनों के बाद किसी फ़िल्म में उनका गाया हुआ गाना आया है, और वो भी शाहरुख़ ख़ान पर फ़िल्माया गया है। शाहरुख़ ने इस फ़िल्म में अतिथि कलाकार के रूप में इस गीत में नज़र आएँगे। वैसे शाहरुख़ ने कई फ़िल्मों में इस तरह से एक गीत में नज़र आए हैं। कोई ऐसा गीत याद आता है तुम्हे?

सुजॊय - क्यों नहीं, फ़िल्म 'काल' के शीर्षक गीत "काल धमाल" में नज़र आए थे। अच्छा 'दुल्हा मिल गया' के इस गीत के अगर बात करें तो मेरा ख़याल है कि यह एक पेप्पी और कैची नंबर है जो शुरु से लेकर अंत तक अपने जोश और उत्साह को बनाए रखती है। पंजाबी रंग का गाना और उस पर दलेर साहब की गायकी, इसका असर तो होना ही था। और शाहरुख़ जो भी काम करते हैं उसमें पूरी जान लगा देते हैं।

सजीव - फ़िल्म 'दुल्हा मिल गया' में कुल १२ गानें हैं।

सुजॊय - १२ गानें? 'व्हाट्स योर राशी' में १३ गानें थे, क्या कोई होड़ सी चल पड़ी है? मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि ९० के दशक के उस टी-सीरीज़ का दौर वापस आने वाला है। याद है ना आपको कि जब हर फ़िल्म में ८-१० गानें होते थे, जिनमें गायिका होती थीं अनुराधा पौडवाल और अलग अलग गीतों में अलग अलग गायकों की आवाज़ें होती थीं?

सजीव - बिल्कुल याद है। लेकिन इस ऐल्बम की अच्छी बात यह है कि भले ही १२ गानें हैं लेकिन हर गाना अलग अलग क़िस्म का है। अब जो गाना हम सुनेंगे उसे गाया है अदनान सामी और अनुश्का मनचंदा ने। यह है "अकेला दिल", आजकल जो ट्रेंड चली है अंग्रेज़ी के बोलों को सुपरिम्पोज़ करने की, इस गीत में यह काम सौंपा गया है अनुश्का को। यह भी एक थिरकता गाना है, पहले गाने के मुक़ाबले थोड़ा स्लो। गाना ठीक ठाक है, बहुत कोई ख़ास बात भी नहीं है, चलो आगे इस गीत के बारे में राय श्रोताओं पर ही छोड़ते हैं।

सुजॊय - यह गाना कुछ कुछ वेस्ट इंडीज़ के कैरिबीयन के कैलीप्सो संगीत से प्रभावित लगता है, जिस तरह से अदनान सामी का ही एक मशहूर गाना था फ़िल्म 'ऐतराज़' में, "गेला गेला गेला दिल गेला गेला"। सुनिए यह गीत और दोनों गीतों के बीच समानता को महसूस कीजिए।

गीत: अकेला दिल..akela dil (dulha mil gaya)


सुजॊय - अब इस फ़िल्म से जुड़े लोगों की ज़रा बातें हो जाए? 'दुल्हा मिल गया' के प्रोड्युसर हैं विवेक वास्वानी। फ़िल्म का निर्देशन किया है मुदस्सर अज़ीज़ ने और ख़ास बात, उन्होने ही फ़िल्म के गानें भी लिखे हैं। यह उनकी पहली निर्देशित फ़िल्म है। वैसे वो चर्चा में रहे हैं सुश्मिता सेन के बॊय फ़्रेंड होने की वजह से।

सजीव - मुदस्सर अज़ीज़ के ज़िक्र से मुझे फ़िल्मकार किदार शर्मा की याद आ गई। वो भी फ़िल्म निर्माण व निर्देशन के साथ साथ गीतकारी भी करते थे न?

सुजॊय - बिल्कुल ठीक। गुलज़ार साहब और कमाल अमरोही साहब भी इसी संदर्भ में याद किए जा सकते हैं। अच्छा, तो मैं 'दुल्हा मिल गया' के कास्ट से परिचय करवा रहा था। फ़िल्म में मुख्य भूमिकाएँ निभाए हैं फ़रदीन ख़ान और सुश्मिता सेन ने, तथा शाहरुख़ ख़ान का ज़िक्र तो हम कर ही चुके हैं। फ़िल्म में संगीत है ललित पंडित का। वही ललित पंडित जो कभी जतीन-ललित की जोड़ी के रूप में एक से एक सुपरहिट गानें दिया करते थे। 'फ़ना' इस जोड़ी की अंतिम फ़िल्म थी।

सजीव - और एक बात सुजॊय कि जतीन-ललित ने शाहरुख़ ख़ान के कितने सारे फ़िल्मों में सुपर डुपर हिट गानें दिए, जैसे कि 'येस बॊस', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे', 'कुछ कुछ होता है', 'मोहब्बतें', और 'कभी ख़ुशी कभी ग़म'। और जब से ये दोनों एक दूसरे से अलग हुए हैं, किसी भी फ़िल्म में इन्हे सफलता अभी तक नहीं मिली है। ख़ैर, वापस आते हैं 'दुल्हा मिल गया' पर और तीसरा गाना जो हम अब बजाएँगे वह है "आजा आजा मेरे रांझना वे आजा आजा"।

सुजॊय - बोल सुन कर तो लग रहा है कि फ़िल्म में किसी शादी के सिचुयशन के लिए बना होगा यह गाना। गाने में मुख्य स्वर है नई आवाज़ सुनंदा का, और बाद में अनुश्का उनका साथ देती हैं। अनुश्का मनचंदा इन दिनों तेज़ी से कामयाबी के पायदान चढ़ रही हैं। सुनिधि और श्रेया के बाद अब तक कोई गायिका उस मुक़ाम तक नहीं पहुँच पायी हैं। हो सकता है वह मुक़ाम अनुश्का के इंतज़ार में है।

सजीव - इस गीत में वैसे कोई नई बात नहीं है, बल्कि 'कभी ख़ुशी कभी ग़म' के "बोले चूड़ियाँ बोले कंगना" का ही एक एक्स्टेन्शन जैसा लगता है। सिर्फ़ मुखड़ा ही नहीं, अंतरे में भी जब "साथिया हाथ दे, अब मेरा साथ दे" गाया जाता है, उसमें भी "बोले चूड़ियाँ" का अंतरा याद आ ही जाता है।

गीत: आजा आजा रांझना वे...aaja aaja ranjhna ve (dulha mil gaya)


सुजॊय - अब एक बेहद नर्मोनाज़ुक गीत हो जाए इस फ़िल्म से। सजीव, इस दौर की जो सब से अग्रणी गायिकाएँ है, यानी कि श्रेय घोषाल और सुनिधि चौहान, मैंने एक पत्रिका में एक बार पढ़ा था कि श्रेया को लता घराने का माना जाता है और सुनिधि को आशा घराने का। है न मज़ेदार ऒब्ज़र्वेशन?

सजीव - हाँ, कुछ हद तक सही भी है। श्रेया ज़्यादातर नर्मोनाज़ुक गानें गाती हैं और सुनिधि किसी भी तरह के गीत गानें से नहीं कतरातीं।

सुजॊय - तो चलिए अब एक ख़ास श्रेया वाले अंदाज़ का गाना हो जाए, यह गीत है "रंग दिया दिल"। लोक रंग में रंगा हुआ गाना है, जो उपर के तीन गीतों से बिल्कुल अलग हट के है।

सजीव - कैरीबीयन से हम सीधे अपनी धरती हिंदुस्तान में उतर आते हैं और इस गीत को सुनते हुए जैसे हम पंजाब के किसी गाँव में पहुँच जाते हैं जहाँ पीली सरसों के खेत में नायिका अपने प्यार के इंतज़ार में यह गीत गा रही होती है।

गीत: रंग दिया दिल...rang diya dil (dulha mil gaya)


सुजॊय - और अब पाँचवे और अंतिम गीत की बारी। और शायद यह फ़िल्म का सब से लोकप्रिय गीत साबित होने वाला है। अजी गीत क्या, यह तो एक क़व्वाली है, "दिलरुबाओं के जलवे तौबा"।

सजीव - पहला गाना शाहरुख़ ख़ान पर फ़िल्माया हुआ था और यह क़व्वाली भी उन्ही पर और उनके साथ सुश्मिता सेन पर फ़िल्माया गया है। पिक्चराइज़ेशन भी ज़बरदस्त हुई है इस क़व्वाली का। इस क़व्वाली की तैयारी में हर किसी ने जी जान लगाई होगी, क्योंकि शाहरुख़ ख़ान इससे पहले फ़िल्म 'मैं हूँ ना' में एक मशहूर क़व्वाली "तुम से मिल के दिल का है जो हाल क्या कहें" कर चुके हैं जिसे अपार सफलता मिली थी। तो ज़ाहिर है कि लोगों की उम्मीदें बढ़ जाती हैं।

सुजॊय - और शायद पहली बार गायक अमित कुमार शाहरुख़ ख़ान का प्लेबैक कर रहे हैं इस क़व्वाली में। 'अपना सपना मनी मनी' में "दिल में बजी गीटार" के बाद अमित कुमार की आवाज़ फिर से गूँज उठी है इस क़व्वाली में। वैसे सजीव, क्या आपको अमित कुमार की आवाज़ मे कोई और क़व्वाली याद आती है?

सजीव - नहीं भई मुझे तो कोई ऐसी क़व्वाली याद नहीं आ रही है।

सुजॊय - कोई बात नहीं, यह सवाल आज हम अपने ट्रिविया में पूछ लेंगे। "दिलरुबाओं के जलवे" में अमित कुमार के साथ आवाज़ मिलाई है मोनाली ठाकुर ने जिन्होने फ़िल्म 'रेस' का वह हिट गीत गाया था "ज़रा ज़रा टच मी टच मी"। रीयलिटी शोज़ के वजह से कई गायक गायिकाएँ सामने आ रहे हैं। लेकिन उससे भी बड़ी बात है कि इन्हे फ़िल्मों में चांस देने में संगीतकारों और फ़िल्मकारों की भूमिका। अनुश्का और मोनाली ऐसी ही रीयलिटी शोज़ से उभरी हैं। इस फ़िल्म में एक और गीत है जिसमें तुलसी की आवाज़ है, वो भी यही से आईं हैं। और फिर श्रेया सुनिधि भी तो रीयलिटी शो की ही उपज हैं!

सजीव - और एक मज़ेदार बात नोटिस की है तुमने इस क़व्वाली में?

सुजॊय - कौन सी?

सजीव - यही कि क़व्वाली के अंत के जो बोल हैं उनमें शाहरुख़ ख़ान और सुश्मिता सेन के कई फ़िल्मों और गीतों का ज़िक्र आता है जैसे कि शाहरुख़ की फ़िल्में बादशाह, कुछ कुछ होता है, दीवाना, कुछ कुछ होता है, बाज़ीगर, डर, अंजाम, देवदास, दिल तो पागल है, मैं हूँ ना। सुश्मिता की दस्तक, सिर्फ़ तुम और बेवफ़ा जैसी फ़िल्मों और "दिलबर" तथा "मस्त माहौल" जैसे गीतों का उल्लेख भी आता है क़व्वाली के अंतिम चरण में। मुदस्सर अज़ीज़ ने बतौर गीतकार भी अच्छा काम दिखाया है इस फ़िल्म में। अब उनकी क़िस्मत के सितारे कितने बुलंद हैं, वह तो फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद ही पता लगेगी!

सुजॊय - तो चलिए, हम सब मिलकर इस क़व्वाली का लुत्फ़ उठाते हैं। हमने १२ में से कुल ५ गानें यहाँ पे शामिल किए जो अलग अलग रंग-ओ-अंदाज़ के हैं। उम्मीद है आप सभी को पसंद आएँगे। नीचे पूछे गए सवालों के जवाब देने की कोशिश कीजिएगा लेकिन इन गीतों के बारे में अपनी राय टिप्पणी में लिखना हर श्रोता व पाठक के लिए अनिवार्य है। :-)

गीत: दिलरुबाओं के जलवे तौबा...dilrubaaon ke jalve (dulha mil gaya)


एल्बम "दूल्हा मिल गया" को आवाज़ रेटिंग **१/२
फिल्म में हालाँकि शाहरुख़ खान अतिथि भूमिका में हैं पर प्रचार प्रसार में उन्हीं का सहारा लिया जा रहा है. जैसा कि हमने उपर जिक्र किया, लगभग सभी गीत औसत ही हैं, "अकेला दिल" अदनान सामी के गायन अंदाज़ और अच्छे बोलों के कारण चर्चित हो सकता है. कुछ नयी आवाजों में संभावना नज़र आती है पर इन्हें और बेहतर गीत भी मिलने चाहिए, नए पन के अभाव में इस अल्बम को ढाई तारे की रेटिंग ही दी जा सकती है
.

और अब बारी है ताज़ा सुर ताल (TST) ट्रिविया की, जनवरी के पहले सोमवार से लेकर दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक हर सप्ताह हम आपसे पूछेंगें ३ सवाल. हर सही जवाब के होंगें ३ अंक. इसके अलावा जो श्रोता प्रस्तुत गीतों को सुनकर अपनी रेटिंग देगा (५ में से ) वो भी १ अंक पाने का हक रखेगा, तो खेलिए हमारे संग, नए गीतों पर आपनी राय रखिये और सवालों का जवाब तलाश कर अपना संगीत ज्ञान भी बढ़ायिये...

प्रस्तुत है आज के ३ सवाल

सवाल # १. अमित कुमार ने गायिका हेमलता के साथ १९८८ की एक फ़िल्म में एक क़व्वाली गाया था। आनंद बक्शी की रचना, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत, फ़िल्म के मुख्य किरदार थे गोविन्दा और सोनम। बताइए इस क़व्वाले के बोल और फ़िल्म का नाम।

सवाल # २. क्योंकि आज ज़िक्र है संगीतकार ललित पंडित का, तो बताइए कि जतीन-ललित की जोड़ी ने अपना पहला फ़िल्मी ऐल्बम 'यारा दिलदारा' से पहले जिस ग़ैर फ़िल्मी ऐल्बम की रचना की थी, उस ऐल्बम का क्या शीर्षक था?

सवाल # ३. मुदस्सर अज़ीज़ ने 'दुल्हा मिल गया' में पहली बार अपने निर्देशन के जल्वे दिखाए हैं। गानें भी उन्होने ही लिखे हैं लेकिन बतौर गीतकार यह उनकी पहली फ़िल्म नहीं है। तो आप ही बता दीजिए कि इससे पहले उन्होने किस फ़िल्म में गीत लिख चुके हैं?



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Monday, December 7, 2009

तू सलामत रहे...अपनी नयी एल्बम के गीत के माध्यम से ज़ाती जिंदगी के कुछ राज़ खोल रहे हैं शायद अदनान सामी

ताजा सुर ताल TST (38)

दोस्तो, ताजा सुर ताल यानी TST पर आपके लिए है एक ख़ास मौका और एक नयी चुनौती भी. TST के हर एपिसोड में आपके लिए होंगें तीन नए गीत. और हर गीत के बाद हम आपको देंगें एक ट्रिविया यानी हर एपिसोड में होंगें ३ ट्रिविया, हर ट्रिविया के सही जवाब देने वाले हर पहले श्रोता की मिलेंगें २ अंक. ये प्रतियोगिता दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक चलेगी, यानी 5 अक्टूबर से १४ दिसम्बर तक, यानी TST के ४० वें एपिसोड तक. जिसके समापन पर जिस श्रोता के होंगें सबसे अधिक अंक, वो चुनेगा आवाज़ की वार्षिक गीतमाला के 60 गीतों में से पहली 10 पायदानों पर बजने वाले गीत. इसके अलावा आवाज़ पर उस विजेता का एक ख़ास इंटरव्यू भी होगा जिसमें उनके संगीत और उनकी पसंद आदि पर विस्तार से चर्चा होगी. तो दोस्तों कमर कस लीजिये खेलने के लिए ये नया खेल- "कौन बनेगा TST ट्रिविया का सिकंदर"

TST ट्रिविया प्रतियोगिता में अब तक-

पिछले एपिसोड में,सीमा जी दो सही जवाब आपने दिया और अंतिम सवाल का सही जवाब आपके एक मात्र प्रतिद्वंदी तनहा जी ने दिया. खैर आज हमारी अंतिम ट्रिविया है, आज तो अगर आप जवाब नहीं भी देंगीं तब भी आप ही विजेता हैं इस साल की, अपनी पसंद के १० गीत चुन कर रखिये वर्ष २००९ में प्रदर्शित फिल्मों में से, ३१ तारीख़ की शाम होगी आपके चुने हुए गीतों के नाम....बधाई


सुजॉय - सजीव, एक और नए सप्ताह की शुरुआत हो रही है, बताइए कि इसमें ख़ास क्या है?

सजीव - ख़ास.... ख़ास.... ख़ास क्या है, चलो तुम ही बताओ, मुझे तो याद नहीं आ रहा।

सुजॉय - अरे भई, आज है इस दशक के आख़िरी साल के अख़िरी महीने का पहला सोमवार! तो हुआ ना यह ख़ास? सॉरी, बैड जोक!

सजीव - वैसे इस बात में सच्चाई तो है, देखते ही देखते हम दिसंबर में पहुँच गए और बहुत जल्द यह साल भी समाप्त हो जाएगा। ख़ैर, छोड़ो इन बातों को, अब ज़िक्र किया जाए कि तरोताज़ा क्या हम अपने श्रोताओं को सुनवा रहे हैं?

सुजॉय - बिल्कुल! आज भी हम पिछले हफ़्ते की तरह एक ग़ैर फ़िल्मी ऐल्बम की चर्चा भी करेंगे और उससे चुन कर कुछ गानें भी सुनेंगे। यह है अदनान सामी का नया ऐल्बम 'एक लड़की दीवानी सी'।

सजीव - इस ऐल्बम के गानें पाश्चात्य रंग के हैं। हल्के फुल्के गानें हैं, जो फ़िल्मों के लिए भी आसानी से चलए जा सकते थे। चलो सब से पहले सुना जाए इस ऐल्बम का शीर्षक गीत।

एक लड़की जो दीवानी सी है...ek ladki deewani si (adnaan saami)



सुजॉय - गीत हमने सुना, आपको नहीं लगता कि यह एक टिपिकल अदनान सामी नंबर है?

सजीव - बिल्कुल! कुछ ख़ास नयापन नज़र नहीं आया इस गीत में। अगला गीत सुनवाने से पहले क्यों ना अदनान के करीयर पर एक नज़र दौड़ाई जाए?

सुजॉय - ज़रूर! मुझे जितना पता है उनका पहला ऐल्बम आया था सन् १९९१ में, जिसका नाम था 'राग टाइम'।

सजीव - उसके बाद १९९५ में आशा भोसले के साथ मिल कर उन्होने बनाई 'सरगम' ऐल्बम। और इसके ठीक दो साल बाद, १९९७ में आया वह मशहूर ऐल्बम 'बदलते मौसम' जिसके गीत "कभी तो नज़र मिलाओ" ने अदनान को कामयाबी के शिखर पर पहुँचा दिया। और "लिफ़्ट करा दे" भी इसी ऐल्बम का हिस्सा था।

सुजॉय - सही कहा, और इस कामयाबी के बाद उनकी तरफ़ फ़िल्मी संगीतकारों ने भी ध्यान देना शुरु कर दिया और मुंबई में उनके क़दम जमने लगे।

सजीव - अरे मुंबई से याद आया कि इस नए ऐल्बम में एक मुंबई पर भी गाना है। पिछले साल के आतंकी हमले और उसके बाद इस शहर ने जिस तरह के स्पिरिट का परिचय दिया है, वही है इस गीत का आधार।

सुजॉय - एक और ख़ास बात यह कि इस गीत में माइकल जैक्सन के भाई जर्मेइन जैक्सन की आवाज़ भी शामिल है अदनान के साथ। चलिए सुनते हैं।

लेट्स गो टू मुंबई सिटी...lets go to mumbai city (adnan sami)



सजीव - हाँ, तो हम बात कर रहे थे अदनान सामी के ऐल्बमों की। सन् २००२ में उनका एक और हिट ऐल्बम रिलीज़ हुआ 'तेरा चेहरा'। और २००३ में "कभी तो नज़र मिलाओ" शीर्षक से ही एक ऐल्बम निकाला गया और उस गीत को एक बार फिर से इसमें शामिल किया गया।

सुजॉय - एक और हिट गीत "भीगी भीगी रातों में तुम आओ ना" भी इसी ऐल्बम में शामिल हुआ। अदनान की खासियत यही है कि जहाँ एक तरफ़ पाश्चात्य रीदम वाले थिरकते गीतों को वो भली भाँति खींच ले जाते हैं, वहीं दूसरी ओर नर्म-ओ-नाज़ुक रोमांटिक गीतों को भी बहुत बढ़िया अंजाम देते हैं।

सजीव - मेरा ख़याल है कि तुम इस नए ऐल्बम का "तू सलामत रहे" गीत की तरफ़ इशारा कर रहे हो।

सुजॉय - बिल्कुल ठीक समझा आपने।

सजीव - हाल ही में अदनान का अपनी दूसरी पत्नी से भी तलाख हो गया। उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी से जुड़ी कई ख़बरें पिछले दिनों अख़बारों में छाई रही। इस गीत के ज़रिए शायद अदनान ने सारे गिले शिकवे भुला कर अपनी भूतपूर्व पत्नी के लिए दुआएँ माँगी होगी।

तू सलामत रहे...tu salamat rahe (adnaan sami)



सुजॉय - इस संजीदा गीत से दिल थोड़ा सा भारी हो गया है। आइए अब ज़रा दिल को हल्का किया जाए अगले गीत के ज़रिए। इस गीत के बारे में बहुत ज़्यादा कुछ कहने के लिए नहीं है, बस सुनिए और झूमिए, अपने कुर्सी पर बैठे बैठे ही सही।

सजीव - हाँ, इसे हम एक रिफ़्रेशिंग् गीत की तरह अपना सकते हैं, जिसमें है डांस के बीट्स और दिल को झूमा देने वाली ध्वनियाँ।

लैला ओ मेरी लैला...lailla o meri lailla (adnan sami)



सजीव - और अब हम आ पहुँचे हैं आज के अंतिम गीत पर। और शायद यह गीत इस ऐल्बम का सब से ख़ूबसूरत गीत होना चाहिए। "चलो चलो चलो, ऐसा अपना जहाँ बनाएँ चलो"।

सुजॉय - गीत के बोल भी सुंदर है। वैसे इस गीत को सुनते हुए मुझे वह गीत याद आ गया - "कुछ ऐसा जहाँ हम बनाएँ जहाँ पहला हो हर वो नज़ारा"।

सजीव - इस भाव पर और भी बहुत से गानें हैं। अदनान की जो बात मुझे सब से ज़्यादा पसंद आती है, वह है उनका प्रयोगधर्मी स्वभाव। बजाए एक व्यावसायिक कलाकार बन कर फार्मूला म्युज़िक देने के उन्होने दूसरी राह चुनी जिसमें वो ख़ुद संगीत में अलग अलग एक्स्पेरीमेंट्स करते रहते हैं।

सुजॉय - हाँ, और इतना ही नहीं, जिन जिन फ़िल्मों में उन्होने संगीत दिया है या जिन फ़िल्मों में उन्होने गाए हैं, वो सब कामयाब रहे हैं और मास और क्लास दोनों को ही पसंद आए हैं।

सजीव - तो अब अदनान साहब को भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए यह चर्चा यहीं समाप्त करते हैं और सुनते हैं आज का अंतिम गीत।

चलो चलो चलो...chalo chalo chalo (adnaan sami)



और अब बारी है ट्रिविया की

TST ट्रिविया # ३७-अदनान सामी को एक विशेष UNICEF Award और United Nations Peace Medal से सम्मानित किया गया था उनके एक ख़ास गीत के लिए। बताइए कि यह गीत उन्होने किस महाद्वीप को समर्पित किया था?

TST ट्रिविया # ३८- अमरीका के किस पत्रिका ने अदनान सामी को "Keyboard Discovery of The 90s" कह कर संबोधित किया था?

TST ट्रिविया # ३९- यह प्यार है या क्या है नहीं हमें इसका कोई आभास, स्नेहा के होठों पर सज रही है लता की मिठास। बताइए कि इशारा किस गीत की तरफ़ है?


"एक लड़की दीवानी सी" एल्बम को आवाज़ रेटिंग ***

हालाँकि एल्बम में अदनान ने विविधता लाने की पूरी कोशिश की है पर कोई भी गीत उस तरह अपील नहीं करता जैसा कि "तेरा चेहरा", "कभी तो नज़र मिलाओ" या फिर "भीगी भीगी रातों में" ने किया था, फिर भी अदनान के चाहने वालों को उनके ये पेशकश पसंद आएगी...

आवाज़ की टीम ने इस अल्बम को दी है अपनी रेटिंग. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसे लगे? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत अल्बम को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

शुभकामनाएँ....


अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Sunday, January 11, 2009

संगीत के रियल्टी शो में अब नही नज़र आयेंगें शान

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (8)

संगीत मददगार है केलास्ट्रोल कम करने में भी

अगर कोई बीमार व्यक्ति ३० मिनट प्रतिदिन अपनी पसंद का संगीत सुनने में लगाता है तो ये सिर्फ़ उसे मानसिक रूप से आराम नही देता, बल्कि शारीरिक रूप से भी बेहद फायदेमंद साबित होता है, ऐसा अमेरिका में हुए ताज़ा रिसर्च से प्राप्त परिणाम बताते हैं. संगीत आपके रुधिर धमनियों को साफ़ करने में भी मददगार साबित होता है. इन नतीजों के मुताबिक आपके मन का संगीत रुधिर धमनियों में नैट्रिक ऑक्साइड का संचार करता है जो रक्त ग्रथियाँ बनने से रोकने और हानिकारक केलास्ट्रोल को बनने से रोकने में सहायक साबित होते हैं. महँगी और नुकसानदायक दवाईयों से परेशान लोगों के लिए ये निश्चित ही अच्छी ख़बर है..वैसे अच्छा संगीत आपको आवाज़ पर भी सुनने को मिलता है.....तो चिंताओं को तज कर हमारे साथ संगीत का आनंद लें और स्वस्थ रहें.


खुश है अदनान

"मैं अपने सगीत में इस कदर व्यस्त रहा, कभी एक पियानिस्ट के तौर पर तो कभी बतौर गायक और संगीतकार, कभी अपनी एल्बम पर काम करने तो कभी उनकी मार्केटिंग आदि कामों ने मुझे कभी एक्टिंग के बारे में सोचने का मौका ही नही दिया. पर अब मैं अपने इस नए काम से बहुत संतुष्ट हूँ..." कहते हैं अदनान सामी, जिन्होंने अपने रोल के लिए अपना वज़न कई किलो घटा दिया. वैसे अदनान के लिए ये भी खुशी की बात है कि लंबे अन्तराल के बाद वो अभी हाल ही में अपने बेटे से मिले, दरअसल पत्नी जेबा बख्तियार (हिना फेम) से तलाक़ के बाद लगभग १० साल तक लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्हें अपने बेटे से मिलने की इजाज़त मिली है. अदनान इस मिलन का एक एक पल भरपूर जीना चाहते हैं...वैसे हमें भी आपकी फ़िल्म का इंतज़ार है अदनान...


कैलाश बंधेगें प्रणय सूत्र में...

अदनान की ही तरह हिंदुस्तान में सूफी गीतों के बेताज बादशाह कैलाश खेर भी आजकल बहुत खुश हैं. उनकी खुशी के दो कारण हैं, एक तो वो ग्लोबलफेस्ट २००९ के हिस्सा चुने गए हैं, दूसरा उनको अपना जीवन साथी आखिरकार मिल ही गया है, जी हाँ कैलाश फरवरी के अन्तिम सप्ताह में विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं, इस बाबत पूछे जाने पर कैलाश ने कहा कि वो इसे एक प्राइवेट अफेयर ही रखना चाहते हैं और इस सिलसिले में बहुत ज्यादा खुलासा नही करना चाहते. कोई बात नही कैलाश मुबारकबाद तो स्वीकार कर ही सकते हैं....


अलविदा रियलटी शोस को

७ सालों से संगीत रियलिटी शो का हिस्सा रहे शान अब छोटे परदे पर होस्टिंग करते नही नज़र आयेंगे. शान अपने गायन कैरियर को नई ऊँचाईयाँ देने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों को अलविदा कहने का मन बना लिया है. उनका कहना है कि इन कार्यक्रमों में बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर बोलना पड़ता है जिससे आपका गला चोक हो जाता है और आपके गायन पर इसका असर साफ़ देखा जा सकता है. मेरा रियाज़ बिल्कुल छूट सा गया है....जो कि ग़लत है. मेरे लिए गायन अधिक महत्वपूर्ण है. मैंने पहले भी इसे छोड़ने का सोचा था, पर कुछ मजबूरियां ऐसी आ गई कि नही कर पाया...पर अब ये फैसला पक्का है....भाई हम तो यही कहेंगें कि शान आपका ये फैसला हमें तो बिल्कुल सही प्रतीत होता है...शायद हमारे श्रोता भी सहमत होंगें...


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