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Tuesday, April 21, 2015

शाहिद अजनबी की लघुकथा माँ तो सबकी एक-जैसी होती है

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा के स्वर में गिरिजेश राव की लघुकथा "मुक्ति" का वाचन सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं शाहिद मंसूर "अजनबी" की लघुकथा माँ तो सबकी एक-जैसी होती है, जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

इस कहानी का गद्य सुख़नफ़हम ब्लॉग पर पढ़ा जा सकता है। इस कहानी का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 15 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

लफ़्ज़ों को तोड़ता हूँ, रदीफ़-काफिया जोड़ता हूँ
यूँ समझो दिल की उलझन को, काग़ज़ पे उतारता हूँ

 ~ शाहिद मंसूर "अजनबी"

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"माँ का खत पढ़ने से पूर्व मैं सहम गया। जरूर पैसे भेजने को लिखा होगा।”
 (शाहिद मंसूर "अजनबी" की लघुकथा "माँ तो सबकी एक-जैसी होती है" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.


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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
माँ तो सबकी एक-जैसी होती है MP3

#Seventh Story, Maa;  Shahid Ajnabi; Hindi Audio Book/2015/07. Voice: Anurag Sharma

Tuesday, February 25, 2014

शंकर पुणतांबेकर का व्यंग्य आम आदमी

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको हिन्दी में मौलिक और अनूदित, नई और पुरानी, प्रसिद्ध कहानियाँ और छिपी हुई रोचक खोजें सुनवाते रहे हैं। पिछली बार आपने माधवी चारुदत्ता के स्वर में मुंशी प्रेमचंद की कथा "स्त्री और पुरुष" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. शंकर पुणतांबेकर की व्यंग्यात्मक लघुकथा आम आदमी जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी "आम आदमी" का गद्य हिन्दी समय ब्लॉग पर उपलब्ध है। इस कथा का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 40 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।



हिन्दी और मराठी के साहित्यकार डॉ. शंकर पुणतांबेकर का जन्म 1923 में हुआ था। वे अपने मारक व्यंग्य रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं और 'व्यंग्यश्री', 'चकल्लस' व 'मुक्तिबोध पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।
 

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी


"हम मर मिटेंगे, लेकिन अपनी नैया नहीं डूबने देंगे... नहीं डूबने देंगे... नहीं डूबने देंगे।"
 (डॉ. शंकर पुणतांबेकर रचित "आम आदमी" से एक अंश)


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 यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
आम आदमी MP3

#3rd Story, Aam Adami: Shankar Puntambekar/Hindi Audio Book/2014/3. Voice: Anurag Sharma

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