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Sunday, March 22, 2009

क्या नील नितिन मुकेश में भी हैं गायिकी के गुण ?

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (14)
आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम - नील की चुनौती
गायिकी के सरताज रहे मुकेश के सुपुत्र नितिन मुकेश ने भी गायिकी में ठीक ठाक मुकाम हासिल किया, पर बहुत अधिक कामियाब नहीं रह पाए तो उनके बेटे और सदाबहार मुकेश के पोते नील ने अभिनय का रास्ता चुना, "जोंनी गद्दार" में अपने शानदार अभिनय से नील ने एक लम्बी पारी की उम्मीद जगाई है. अब उनकी आने वाली नयी त्रिल्लर फिल्म "आ देखें ज़रा" में नील मात्र अभिनय नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने खानदान की परंपरा निभाते हुए उन्होंने इस फिल्म का शीर्षक गीत भी खुद ही गाया है, जो कि वास्तव में एक पुराने गीत "आ देखें ज़रा किस में कितना है दम" का नया वर्ज़न है. नील इस गीत के माध्यम से आर डी बर्मन और किशोर दा को अपनी श्रद्धांजली देना चाहते हैं. नील के दामन में इस वक़्त आदित्य चोपडा की "न्यू यार्क", मधुर भंडारकर की "जेल" और सुधीर मिश्रा की "तेरा क्या होगा जोंनी" जैसी फिल्में हैं. देखना ये होगा कि क्या इनमें से किसी फिल्म में भी श्रोताओं को उनकी गायिकी का नमूना देखने को मिलेगा.



भारतीय संगीत में भारतीयता होनी ही चाहिए - हरिहरन


फिल्मों में गायन हो या शास्त्रीय, या फिर किसी पॉप धुन पर ताल मिलाना हो, हरिहरन हमेशा अपनी मधुर आवाज़ और श्रेष्ठतम गायिकी को बेहद सधे हुए अंदाज़ में पेश करते रहे हैं. पर जब उनसे पुछा गया कि उन्हें सबसे अधिक क्या गाना पसंद है तो जवाब था कि ग़ज़ल गायन से अधिक संतुष्ठी किसी अन्य गायन में नहीं मिलती. उनका कहना है कि उन्होंने भाषा को सीखने में बहुत मेहनत की है, ग़ज़ल में शायरी, ख्याल, ठुमरी, सरगम, तान और रिदम का जबरदस्त संगम होता है, और चुनौती सबसे बड़ी ये होती है इन सब के बीच आपको शब्दों की गरिमा बनाये रखनी होती है, क्योंकि ग़ज़ल मुख्यता शब्द प्रधान होते हैं. हरिहरन मानते हैं कि माडर्न होना अपनी संस्कृति को भूलना नहीं है. भारतीय संगीत की आत्मा में भारतीयता होनी ही चाहिए. वो अपनी एल्बम "कोलोनिअल कसिन" की कमियाबी का श्रेय भी इसी भारतीयता में बसी अपनी जड़ों को मानते हैं.


अभिजीत सावंत अब नायक भी

फिल्म के चाहने वालों के लिए इस हफ्ते एक नहीं दो नहीं बल्कि ५ नयी फिल्में प्रदर्शन के लिए उतरी है. और मज़े की बात है कि इन पांचों फिल्मों के माध्यम से ५ नए निर्देशकों ने अपनी कला को दुनिया के सामने रखा है. इनमें अभिनेत्री नंदिता दास (फिराक) भी शामिल हैं. पहले इंडियन आइडल रहे अभिजीत सावंत अभिनीत "लौटरी" का निर्देशन किया है हेमंत प्रभु ने, अन्य नवोदित निर्देशकों में हैं रजा मेनोन (बारह आना), रूबी ग्रेवाल (आलू चाट), और पार्वती बलागोपालन (स्ट्रेट). एक और अच्छी खबर ये है कि अब भारतीय फिल्म संगीत की तरह हिंदी फिल्मों की कहानियां भी हॉलीवुड के निर्देशकों को भा रही है, हालिया प्रर्दशित माधवन अभिनीत "१३ बी" अब विदेशी कलाकारों को लेकर अंग्रेजी में भी बनेगी. तो दोस्तों इस सप्ताह की ५ नयी फिल्मों के अलावा आपके पास "13 बी" और "गुलाल" जैसी फिल्में भी हैं, देखने के लिए. अब तक नहीं देखी तो अब देखिये.

दिल गिरा कहीं दफतन

किसी भी गीत की कामियाबी में उसके फिल्मांकन का भी बहुत बड़ा हाथ होता है. आज के "साप्ताहिक गीत" शृंखला में हम न सिर्फ आपको एक गीत सुनवायेंगें बल्कि उसका विडियो भी दिखाएंगें. दिल्ली ६ के यूँ तो सभी गीत मशहूर हुए हैं पर इस गीत को बहुत अधिक लोकप्रियता नहीं मिल पायी, पर शायद इसीलिए निर्देशक राकेश ने इस गीत को चुना अपनी कल्पनाशीलता की ऊंचाईयां दिखाने का जरिए. गीत बहुत धीमा है पर जब आप इसे परदे पर देखते हैं तो शब्द और संगीत कहीं पीछे छूट जाते हैं और दृश्य आप पर जादू सा कर देते हैं. न्यू यार्क शहर में दिल्ली ६ को स्थापित करता ये गीत दो संस्कृतियों को जैसे एक कर देता है, और प्रेम की सुखद अनुभूतियों के बीच धीमे धीमे स्पंधित होता है पार्श्व में - प्रसून के बोल और ए आर आर का संगीत.
निश्चित ही बहतरीन फिल्मांकित गीतों में सूची में ये गीत एक नया शाहकार है - देखिये और सुनिए



(विडियो क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं है )

Sunday, March 1, 2009

कैटरीना कैफ को हिंदी सिखायेंगे क्या ?

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (12)
चमकते सितारों ने मनाया हिंदी फिल्मों का सबसे बड़ा उत्सव
ऑस्कर के चर्चे पुराने हुए, अब बारी है हमारी अपनी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े पुरस्कार समारोह की. YRF स्टूडियो अँधेरी (मुंबई) में संपन्न हुए ५४ वें फिल्म फेयर समारोह में कल सितारे जमीं पर उतरे. "कहने को जश्ने बहारां है.." लिखने वाले जावेद अख्तर साहब ने सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए तो संगीतकार ए आर रहमान ने "जाने तू या जाने न" के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का खिताब जीता. श्रेया घोषाल "तेरी ओर..." (सिंग इस किंग) गाने से सर्वश्रेष्ठ गायिका चुनी गयी, ओर वहीँ "हौले हौले..." से दिलों पर राज़ करने वाले सुखविंदर ने सर्वश्रेष्ठ गायक के लिए फिल्म फेयर ट्रोफी जिसे "ब्लैक लेडी" भी कहा जाता है, हासिल किया. फिल्म "जोधा अकबर" के लिए ए आर आर ने सर्वश्रेष्ठ पार्श्व संगीत का सम्मान जीता ओर सर्वश्रेष्ठ ध्वनि रिकॉर्डिंग के लिए बेयलोन फोन्सेका और विनोद सुब्रमनियन ने फिल्म "रॉक ऑन" के लिए इसे प्राप्त किया. उभरते हुए संगीत कर्मी को दिए जाने वाला आर डी बर्मन सम्मान मिला "जाने तू..", "गजिनी" और "युवराज" के सफल गानों को गाने वाले प्रतिभाशाली गायक बेन्नी दयाल को. "पप्पू कांट डांस" गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ नृत्य संयोजन का पुरस्कार जीता लोनिगिनस फर्नांडीस ने. ऋतिक रोशन सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और प्रियंका चोपडा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुनी गयी. आशुतोष गोवारिकर को उनकी फिल्म "जोधा अकबर" के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक घोषित किया गया और उनकी फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म. इस पूरे समारोह की विस्तृत रिपोर्ट हम अगले रविवार के एपिसोड में लेकर आयेंगे. फिलहाल सभी विजेताओं को जम कर बधाई.



ऑस्कर और भारतीय

ऑस्कर के लेकर विवादों का सिलसिला जारी है. ऑस्कर में भारतीयों के अब तक के प्रदर्शन पर एक नज़र -
ए आर आर से पहले भानु अथैया (परिधान सज्जा) पहले भारतीय थे जिन्हें फिल्म "गाँधी" के लिए ऑस्कर मिला. गौरतलब है कि ये फिल्म भी "स्लम डोग" की ही तरह भारतीय परिवेश पर बनी विदेशी फिल्म थी.
फिल्म गाँधी के लिए ही पंडित रवि शंकर को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार श्रेणी में नामांकन मिला था.
सत्यजित राय ने अपनी उत्कृष्ट फिल्मों के योगदान के विशेष पुरस्कार जीता १९९२ में.
१९५८ में सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म श्रेणी में नामांकित हुई "मदर इंडिया", १९८९ में मीरा नायर की "सलाम बॉम्बे" और २००२ में आमिर खान की आशुतोष गोवरिकर निर्देशित "लगान" ने भी इस तरफ कदम बढाए, पर अंतिम सफलता हाथ नहीं लगी.
और अंत में हम तो इतना ही कहेंगे कि "जय हो" गीत के लिए रहमान- गुलज़ार को मिला सम्मान, सम्मान है हिंदी फिल्म संगीत का जिसे आज दुनिया भर में सुना जा रहा है. क्या ये काफी नहीं जश्न के लिए.


कुछ और सुर्खियाँ

कैटरीना कैफ नज़र आयेंगीं बेहद कम मेक अप के साथ फिल्म "राजनीति" में, और वो इस फिल्म के लिए हिंदी भी सीखना चाहती हैं. पर क्या आपको नहीं लगता कि हिंदी फिल्मों में काम चाहने वाले हर कलाकार के लिए हिंदी सीखना अनिवार्य होना चाहिए ? खैर कैटरीना इस शुभ काम के लिए हमारे किसी भी हिंदी ब्लोग्गर बधुओं से संपर्क कर सकती हैं :)

कैलाश खेर आखिरकार विवाह बंधन में बंध ही गए. उनकी धरमपत्नी का नाम शीतल है. जब पत्रकारों ने शीतल से पूछा कि कहीं ये प्रेम विवाह तो नहीं तो वो बोली कि क्या आपको लगता है कि कैलाश प्रेम विवाह जैसा कोई कदम उठाने वाले इंसान हैं. सीधे सरल और पारंपरिक चाल चलन वाले कैलाश और शीतल को वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं.

करण जोहर ने शाहरुख़ अभिनीत अपनी आने वाली फिल्म "माई नेम इस खान" के लिए जावेद साहब को शीर्षक गीत लिखने के लिए तैयार कर लिया है पहले जावेद साहब ये कहकर मुकर गए थे कि वो किसी अन्य गीतकार के साथ क्रेडिट शेयर नहीं करेंगे. इस फिल्म के लिए अन्य गीत एक नए गीतकार के होंगे.


मरम्मत मुक्कदर की कर दो मौला

इस सप्ताह का गीत है फिल्म "दिल्ली ६" से. दिल्ली ६ की मसकली से तो आपको पहले ही मिलवा चुके हैं, और गायिका रेखा भारद्वाज के बहाने हमने "गैन्दाफूल" का भी जिक्र किया था. तो आज पेश है इसी फिल्म का और मधुर गीत- "अर्जियाँ". फिल्म प्रर्दशित हो चुकी है और मिली जुली प्रतिक्रियां आई हैं जनता की. पर जहाँ तक फिल्म के संगीत की बात है, सब एकमत हैं कि फिल्म का संगीत फिल्म की जान है. प्रस्तुत गीत में आवाजें हैं कैलाश खेर और रहमान के प्रिय गायक जावेद अली की. प्रसून के लिखे और ए आर रहमान के संगीतबद्ध इस गीत की लम्बाई आम गीतों से कुछ ज्यादा है. ८-९ मिनट लम्बे इस सूफियाना गीत को फिल्म में अलग अलग सन्दर्भों में स्थान मिला है, और यही वो गीत है जो फिल्म के मूल सन्देश को हम तक पहुंचाता है. तो इस रविवार की सुबह को रोशन कीजिये इस गुजारिश से -
जो भी तेरे दर आया, झुकने जो सर आया,
मस्तियाँ पिये सबको झूमता नज़र आया,
प्यास लेके आया था. दरिया वो भर लाया,
नूर की बारिश में भीगता सा तर आया....
दरारें दारारें हैं माथे पे मौला...मरम्मत मुक्कदर की कर दो मौला...
मेरे मौला....

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