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Monday, September 14, 2009

रामधारी सिंह दिनकर की कविता गाइए और संगीतबद्ध कीजिए और जीतिए रु 7000 के नग़द इनाम

गीतकास्ट प्रतियोगिता की 'राष्ट्रकवि-शृंखला'

सर्वप्रथम सभी पाठकों/श्रोताओं को हिन्दी-दिवस की बधाइयाँ।

आज इस विशेष मौके पर हम गीतकास्ट प्रतियोगिता में एक नई शृंखला की शरूआत कर रहे हैं। हिन्द-युग्म ने पिछले चार महीनों में छायावादी युगीन 4 कवियों की एक-एक कविताओं को संगीतबद्ध करवाया। कल ही हमने महादेवी वर्मा की कविता 'तुम जो आ जाते एक बार' का संगीतबद्ध रूप ज़ारी किया था। दूसरी शृंखला में हमने राष्ट्रकवियों की एक-एक कविता को संगीतबद्ध/स्वरबद्ध करवाने का निश्चय किया है।

सितम्बर महीने में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती मानई जाती है, तो हमने सोचा कि क्यों न उन्हीं से शुरूआत की जाय।

हमारे एक प्रतिभागी रफ़ीक़ शेख़ की शिकायत थी कि हम इनाम स्वरूप बहुत कम धनराशि देते हैं। इसलिए इस बार से हम उसे भी बढ़ा रहे हैं। आज हिन्दी दिवस पर यह बताते हुए हमें बहुत खुशी हो रही है कि इनाम की राशि इस माह से रु 7000 होगी, पहले यह राशि रु 4000 हुआ करती थी।

इस कड़ी के प्रायोजक हैं कमल किशोर सिंह जो कि रिवरहेड, न्यूयार्क में रहते हैं। पेशे से डॉक्टर हैं। हिन्दी तथा भोजपुरी में कविताएँ लिखते हैं। आवाज़ की गीतकास्ट प्रतियोगिता में हर बार ज़रूर भाग लेते हैं। हम इन्हीं की पसंद की कविता को ही स्वरबद्ध करने की प्रतियोगिता रख रहे हैं।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 30 सितम्बर 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को कमल किशोर सिंह की ओर से क्रमशः रु 4000, रु 1500 और रु 1500 के नग़द पुरस्कार दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रमों में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश रेडियो के किसी कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'कलम, आज उनकी जय बोल'

जला अस्थियाँ बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलकर बुझ गए किसी दिन
माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

पीकर जिनकी लाल शिखाएँ
उगल रही सौ लपट दिशाएँ,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

Wednesday, June 10, 2009

छायावादी कविता-गायन में इस बार गायें पंत की कविता 'प्रथम रश्मि'

गीतकास्ट प्रतियोगिता की शुरूआत बहुत ही धमाकेदार रही। आवाज़ को उम्मीद से अधिक प्रतिभागी मिले और आदित्य प्रकाश को उनकी पसंद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को उम्मीद से बेहतर गायकी और संगीत-संयोजन। हम जब गीतकास्ट प्रतियोगिता की शुरूआत करने जा रहे थे तभी तय कर लिया था कि हिन्दी के सभी महत्वपूर्ण कवियों की कम से कम एक कविता को स्वरबद्ध/सुरबद्ध ज़रूर करवायेंगे। और यह कहना अनुचित नहीं होगा कि स्वप्न मंजूषा 'शैल' और कृष्ण राज कुमार के प्रयास ने हमें हौसला दिया और प्रायोजकों को विश्वास की इस तरह का प्रयास भी सराहा जा सकता है।

पिछले रविवार डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते पर जब स्वप्न मंजूषा और कृष्ण राज कुमार की आवाज़ उभरी तो उसे दुनिया ने सुना और सर-आँखों पर बिठा लिया।

जैसाकि हमने अपनी पहली प्रतियोगिता के परिणाम को प्रकाशित करते समय इस बात का ज़िक्र किया था कि हम शुरूआत में छायावाद के चारों प्रमुख कवियों की कविताओं के साथ यह अभिनव प्रयोग करेंगे, आज इस कड़ी में हम सुमित्रानंदन पंत की प्रसिद्ध कविता 'प्रथम रश्मि' को आपके समक्ष रख रहे हैं। इस बार आपको इसी कविता को संगीतबद्ध/सुरबद्ध करके हमें भेजना है।

आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस बार से इनाम की राशि भी बढ़ाई जा रही है। अब से प्रथम और द्वितीय दो पुरस्कार दिये जायेंगे । प्रथम विजेता को रु 2000 का नग़द इनाम और द्वितीय स्थान के विजेता को रु 1000 का नग़द इनाम दिया जायेगा। इस बार के इन इनामों के प्रायोजक हैं शेर बहादुर सिंह जोकि अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के वरिष्ठ सदस्य तथा इसके न्यू यार्क चैप्टर के अध्यक्ष हैं।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 30 जून 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ दो प्रविष्टियों को शेर बहादुर सिंह की ओर से क्रमशः रु 2000 और रु 1000 के नग़द इनाम दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम 'कवितांजलि' में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश (कार्यक्रम के संचालक) कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) अन्य 2 प्रविष्टियों को भी कवितांजलि में बजाया जायेगा।
7) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

सुमित्रा नंदन पंत की 'प्रथम रश्मि' कविता से कुछ पंक्तियों को हटाया गया है ताकि संगीतबद्ध करना आसान हो और ज्यादा लम्बी रिकॉर्डिंग न हो।

पंत की कविता 'प्रथम रश्मि'

प्रथम रश्मि का आना रंगिणि!
तूने कैसे पहचाना?
कहां, कहां हे बाल-विहंगिनि!
पाया तूने यह गाना?

सोयी थी तू स्वप्न नीड़ में,
पंखों के सुख में छिपकर,
ऊंघ रहे थे, घूम द्वार पर,
प्रहरी-से जुगनू नाना।

शशि-किरणों से उतर-उतरकर,
भू पर कामरूप नभ-चर,
चूम नवल कलियों का मृदु-मुख,
सिखा रहे थे मुसकाना।

स्नेह-हीन तारों के दीपक,
श्वास-शून्य थे तरु के पात,
विचर रहे थे स्वप्न अवनि में
तम ने था मंडप ताना।

कूक उठी सहसा तरु-वासिनि!
गा तू स्वागत का गाना,
किसने तुझको अंतर्यामिनि!
बतलाया उसका आना!

छिपा रही थी मुख शशिबाला,
निशि के श्रम से हो श्री-हीन
कमल क्रोड़ में बंदी था अलि
कोक शोक में दीवाना।

प्रथम रश्मि का आना रंगिणि
तूने कैसे पहचाना?
कहाँ-कहाँ हे बाल विहंगिनी
पाया यह स्वर्गिक गाना ............

हम समय-समय पर इस तरह का आयोजन करते रहेंगे। आप भी अपनी ओर से हिन्दी के स्तम्भ कवियों की कविताओं को सुरबद्ध करने के काम को प्रोत्साहित करना चाहते हों, अपनी ओर से इनाम देना चाहते हों, तो संपर्क करें।

रिकॉर्डिंग संबंधी सहायता यहाँ उपलब्ध है।

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