Showing posts with label Kavyanaad. Show all posts
Showing posts with label Kavyanaad. Show all posts

Sunday, March 14, 2010

काव्यनाद की AIR FM Rainbow पर घंटे भर हुई चर्चा

होली के अवसर पर एआईआर एफ रेन्बो पर पूरा 1 घंटा काव्यनाद की चर्चा हुई। सजीव सारथी की लाइव बातचीत और इन्हीं के पसंद के गाने, साथ में काव्यनाद का एक गीत भी बजाया गया जिसे DTH और FM रेडियो के माध्यम से पूरे हिन्दुस्तान ने सुना।

यह काव्यनाद की सफलता ही कही जायेगी कि इसे दुनिया भर में एक विशेष तरह का प्रयास माना जा रहा है। AIR FM Rainbow के कलाकार कैसे-कैसे कार्यक्रम में सजीव से इसी विषय पर बातचीत की गई। इससे पहले भी AIR FM Rainbow पर निखिल आनंद गिरि और सजीव सारथी का इंटरव्यू प्रसारित हो चुका है। 'पहला सुर' के विमोचन के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कम्यूनिटी रेडियो DU-FM पर सजीव सारथी से प्रदीप शर्मा की लम्बी बातचीत प्रसारित हुई थी। लेकिन बहुत कम मौकों पर हम इस तरह के प्रसारणों को रिकॉर्ड कर पाते हैं, लेकिन इस बार विनीत भाई ने इसे रिकॉर्ड कर दिया हम आपको सुनवा पा रहे हैं।

ग़ौरतलब है कि 'काव्यनाद' में प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी, दिनकर और गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं को संगीतबद्ध करके संकलित किया गया है, जिसका विमोचन 1 फरवरी 2010 को ‍19वें विश्व पुस्तक मेला में अशोक बाजपेयी, विभूतिनारायण राय और डॉ॰ मुकेश गर्ग ने किया था। मेले के दौरान यह एल्बम सबसे अधिक बिकने वाले उत्पादों में से एक में रहा था।

सुनिए रेडियो कार्यक्रम 'कलाकार कैसे-कैसे'---



यदि प्लेयर से सुनने में परेशानी आ रही हो तो मूल इंटरव्यू को यहाँ से डाउनलोड कर लें।

Thursday, February 25, 2010

'काव्यनाद' और 'सुनो कहानी' की बम्पर सफलता



हिन्द-युग्म ने 19वें विश्व पुस्तक मेले (जो 30 जनवरी से 7 फरवरी 2010 के दरम्यान प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित हुआ) में बहुत-सी गतिविधियों के अलावा दो नायाब उत्पादों का भी प्रदर्शन और विक्रय किया। वे थे प्रेमचंद की 15 कहानियों का ऑडियो एल्बम ‘सुनो कहानी’ और जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध स्वरूप का एल्बम ‘काव्यनाद’। ये दोनों एल्बम विश्व पुस्तक मेला में सर्वाधिक बिकने वाले उत्पादों में से थे। दोनों एल्बमों की 500 से भी अधिक प्रतियों को साहित्य प्रेमियों ने खरीदा। इस एल्बम के ज़ारी किये जाने से पहले हिन्द-युग्म के संचालकों को भी इसकी इस लोकप्रियता और सफलता का अंदाज़ा नहीं था। 1 फरवरी 2010 को प्रगति मैदान के सभागार में इन दोनों एल्बमों के विमोचन का भव्य समारोह भी आयोजित किया गया जिसमें वरिष्ठ कवि अशोक बाजपेयी, प्रसिद्ध कथाकार विभूति नारायण राय और संगीत-विशेषज्ञ डॉ॰ मुकेश गर्ग ने भाग लिया। ‘काव्यनाद’ और ‘सुनो कहानी’ कहानी की इस सफलता के बाद ऑल इंडिया रेडियो के समाचार-प्रभाग के रितेश पाठक ने जब हिन्द-युग्म के प्रमुख संचालक शैलेश भारतवासी से प्रतिक्रिया माँगी तो शैलेश ने कहा-
लोग साहित्य के साथ हुए इन नये प्रयोगों को सराह रहे हैं। हमारे स्टॉल पर कई सारे ऐसे आगंतुक भी पधार रहे हैं जिन्होंने इन एल्बमों के बारे में अखबारों या वेबसाइटों पर पढ़ा और बिना ज्यादा पड़ताल के ही अपने और अपने मित्रों-सम्बंधियों के लिए ये एल्बम खरीद कर ले जा रहे हैं। हमारी पूरी टीम मेले के रेस्पॉन्स से बहुत खुश है।

इसके बाद हिन्द-युग्म से बहुत से स्कूलों-कॉलेजों ने ईमेल के द्वारा इन एल्बमों के सम्बंध में जानकारी माँगी है। कई विद्यालयों के प्राचार्यों ने यहाँ तक कहा कि ये अभिनव प्रयोग विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए बहुत उपयोगी हैं और इन्हें हर विद्यार्थी और अभिभावक तक पहुँचाया जाना चाहिए। हिन्द-युग्म का मानना है कि साहित्य का तकनीक के साथ सकारात्मक ताल-मेल भी हो सकता है, बस हमारी दृष्टि साफ हो कि हमें साहित्य और भाषा को किस ओर लेकर जाना है।

कई ऐसे साहित्यप्रेमी भी मेले में हिन्द-युग्म के स्टॉल पर आये जिन्होंने पहले खरीदकर इन्हें सुना और फोन द्वारा या स्टॉल पर दुबारा आकर इनकी भूरी-भूरी प्रसंशा की। बहुत से लोगों ने नागार्जुन, धूमिल, मुक्तिबोध इत्यादि कवियों की कविताओं को संगीतबद्ध करने की सलाह दी। कइयों ने कहाँ कि ‘काव्यनाद’ जैसा प्रयोग ही किसी एक कवि की 10 या 10 से अधिक कविताओं को लेकर किये जाने की ज़रूरत है। वरिष्ठ कथाकार हिमांशु जोशी स्टॉल पर पधारे और कहा कि ऐसे कथाकारों की कहानियों को कथाकारों की ही आवाज़ में संरक्षित करने की ज़रूरत है जो बहुत वरिष्ठ हैं और जिनकी कहानियाँ महत्वपूर्ण हैं। हिन्द-युग्म ने पाठकों, श्रोताओं और साहित्यकारों को इस दिशा में नित नये प्रयोग करते रहने का विश्वास दिलाया।

हिन्द-युग्म ने अपनी कार्ययोजना में यह भी जोड़ा है कि इन एल्बमों को दुनिया भर के उन स्कूलों में ज़रूर से ज़रूर पहुँचाना है जहाँ हिन्दी प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक या प्राच्य भाषा के तौर पर पढ़ाई जाती है। दक्षिण भारत से आये एक हिन्दी के अध्यापक ने प्रेमचंद की कहानियों के एल्बम को गैरहिन्दी भाषियों के लिए हिन्दी भाषा सीखने और समझने का एक उपकरण भी माना।

हिन्द-युग्म के ये एल्बम होली के बाद भारत के सभी हिन्दी प्रदेशों के प्रमुख म्यूजिक स्टोर पर उपलब्ध कराये जाने की योजना बनाई है। हिन्द-युग्म ने इन एल्बमों को ऑनलाइन बेचने का भी प्रबंध किया है और मूल्य केवल लागत मूल्य के बराबर रखा है।

हिन्द-युग्म की आवाज़-टीम अपनी इस सफलता से बहुत उत्साहित है और नये और पुराने कवियों की कविताओं के साथ एक साथ प्रयोग करना चाहती है। हिन्द-युग्म वर्ष 2010 में कविता पर लघु फिल्म बनाने की भी योजना बना रहा है। हिन्द-युग्म कुछ महान कविताओं पर फिल्म निर्माण के बाद उसे दुनिया के सभी लघु फिल्म समारोहों में प्रदर्शित करना चाहती है। ‘काव्यनाद’ की कुछ संगीतबद्ध कविताओं को लेकर भी हिन्दी भाषा पर एक डाक्यूमेंटरी फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

‘काव्यनाद’ के बनने की कहानी भी अपने आप में अभूतपूर्व है। शैलेश बताते हैं- ‘मई 2010 में डैलास, अमेरिका से साहित्यप्रेमी आदित्य प्रकाश का फोन आया, बातों-बातों में उन्होंने कहा कि शैलेश आपकी आवाज़ टीम वाले इतने सारे गीतों को कम्पोज करते हैं, कभी उनसे कविता को संगीतबद्ध करने को कहिए। और उसी समय मैंने उनके साथ मिलकर गीतकास्ट प्रतियोगिता को आयोजित करने की योजना बनाई। आदित्य प्रकाश ने अपनी ओर से विजेताओं को नगद इनाम भी देने का वचन दिया। जब इस प्रतियोगिता के पहले अंक के लिए (यानी जयशंकर प्रसाद की कविता ‘अरूण यह मधुमय देश हमारा’ के लिए) प्रविष्टियाँ आईं तो मेरे साथ-साथ आदित्य प्रकाश भी बहुत खुश हुए। उन्होंने इन प्रविष्टियों को रेडियो सलाम नमस्ते के ‘कवितांजलि’ कार्यक्रम में बजाया और पूरी दुनिया के साहित्य प्रेमियों ने इस प्रयोग को सर-आँखों पर बिठा लिया। उसी समय आदित्य प्रकाश के साथ मिलकर हमने यह तय किया के छायावादी युगीन चारों स्तम्भ कवियों की 1-1 कविताओं के साथ यह प्रयोग किया जाय। इसके लिए शेर बहादुर सिंह, डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह और अशोक कुमार से सहयोग मिला और इन्होंने पहले आयोजन से दोगुनी राशि को इनाम में देने का हमारा आवेदन स्वीकार कर लिया और श्रोताओं ने खुद सुना कि गीकास्ट प्रतियोगिता के हर नये अंक की प्रविष्टियाँ अपने पिछले अंक से बेहतर थीं।“

शैलेश ने आगे बताया कि जब हमने छायावादी युगीन कवियों तक इस प्रयोग को सफल बना लिया तो आदित्य प्रकाश के साथ यह तय किया कि आने वाले विश्व पुस्तक मेला में क्यों न इन कविताओं को एक एल्बम निकाला जाय। हमें लगा कि एल्बम निकाले जाने के लिए 4 कविताएँ कम हैं इसलिए कमल किशोर सिंह, दीपक चौरसिया 'मशाल', डॉ॰ शिरीष यकुन्डी, डॉ॰ प्रशांत कोले, डॉ॰ रघुराज प्रताप सिंह ठाकुर और शैलेश त्रिपाठी की मदद से रामधारी सिंह दिनकर और मैथिली शरण गुप्त की एक-एक कविता को संगीतबद्ध किये जाने की प्रतियोगिता रखी गई। लेकिन इतने मात्र से तो एल्बम की समाग्री ही बनी, एल्बम को बज़ार तक लाने के लिए भी धन की आवाश्यकता थी। लेकिन मैं आदित्य प्रकाश, ज्ञान प्रकाश सिंह और बिस्वजीत का धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने इस काम के लिए भी हमारी हर सम्भव मदद की।

आवाज़ के संचालक सजीव सारथी कहते हैं कि हमें उम्मीद है कि हमारे इन सभी साहित्यानुरागियों का सहयोग पहले की तरह यथावत बना रहेगा और और हम जल्द ही कुछ और अभिनव और पहले से कई गुना बेहतर गुणवत्ता के प्रयोग करेंगे। हमने काव्यनाद की समीक्षा की भी शुरूआत की है। काव्यनाद की समीक्षा अभी कुछ दिनों पहले ही मैंने सुजॉय के साथ मिलकर 'ताज़ा सुर ताल' में की है। भविष्य में अन्य संगीत विशेषज्ञों से भी हम इसकी समीक्षा करवायेंगे।

Friday, January 29, 2010

19वाँ विश्व पुस्तक मेला में होगा आवाज़ महोत्सव, ज़रूर पधारें

हिन्द-युग्म साहित्य को कला की हर विधा से जोड़ने का पक्षधर है। इसलिए हम अपने आवाज़ मंच पर तमाम गतिविधियों के साथ-साथ साहित्य को आवाज़ की विभिन्न परम्पराओं से भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

इसी क्रम में हमने प्रेमचंद की कहानियों को 'सुनो कहानी' स्तम्भ के माध्यम से पॉडकास्ट करना शुरू किया ताकि उन्हें इस माध्यम से भी संग्रहित किया जा सके। 19वाँ विश्व पुस्तक मेला जो प्रगति मैदान, नई दिल्ली में 30 जनवरी से 7 फरवरी 2010 के मध्य आयोजित हो रहा है, में हिन्द-युग्म प्रेमचंद की 15 कहानियों के एल्बम 'सुनो कहानी' को जारी करेगा।

इसी कार्यक्रम में जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध एल्बम ‘काव्यनाद’ का लोकार्पण भी होगा। उल्लेखनीय है कि 18वें विश्व पुस्तक मेला में भी हिन्द-युग्म ने इंटरनेट की हिन्दी दुनिया का प्रतिनिधित्व किया था और अपने पहला उत्पाद के तौर पर कविताओं और संगीतबद्ध गीतों के एल्बम 'पहला सुर' को जारी किया था।

सन् 2008 में इंटरनेट पर हिन्दी का जितना बड़ा संसार था, आज उससे कई गुना विस्तार उसे मिल चुका है। इसलिए हिन्द-युग्म ने भी अपनी सक्रियता, अपनी प्रचार रणनीति में विस्तार किये हैं। यह इंटरनेट जगत के लिए अपने आप में बड़ी बात है कि इंटरनेट पर काम करने वाला एक समूह विश्व पुस्तक मेला में 3X3 मीटर2 का क्षेत्रफल घेर रहा है, जहाँ की हर बात इंटरनेट से जुड़ी है।

हिन्द-युग्म हिन्दी के 6 स्तम्भ कवियों की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध एल्बम ‘काव्यनाद’ और प्रेमचंद की 15 मशहूर कहानियों के एल्बम ‘सुनो कहानी’ के विमोचन कार्यक्रम में आपको आमंत्रित करता है। पूरा विवरण निम्नवत् है-

स्थान व समय- प्रगति मैदान सभागार, नई दिल्ली, 1 फरवरी 2010, दोपहर 2-4 (19वाँ विश्व पुस्तक मेला 2010, नई दिल्ली)

मंचासीन अतिथि-

अशोक बाजपेयी, वरिष्ठ कवि, निदेशक, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली ('काव्यनाद' का विमोचन करेंगे)

राजेन्द्र यादव, वरिष्ठ कथाकार और हंस के प्रधान सम्पादक ('सुनो कहानी' का विमोचन करेंगे)

डॉ॰ मुकेश गर्ग, संगीत विशेषज्ञ, संगीत-संकल्प पत्रिका के सम्पादक (दोनों एल्बमों की समीक्षा करेंगे)

आदित्य प्रकाश, काव्यनाद (गीतकास्ट प्रतियोगिता) के सूत्रधार और फन एशिया के रेडियो कार्यक्रम हिन्दी यात्रा के उद्‍घोषक, डैलस, अमेरिका

ज्ञान प्रकाश सिंह, गीतकास्ट प्रोजेक्ट के सहयोगी, लंदन, यूके

संचालक- प्रमोद कुमार तिवारी

मुख्य आकर्षण

  • जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध एल्बम ‘काव्यनाद’ का विमोचन
  • प्रेमचंद की 20 कहानियों के ऑडियो एल्बम ‘सुनो कहानी’ का विमोचन
  • केरल के युवा गायक-संगीतकार निखिल-चार्ल्स और मिथिला द्वारा संगीतमयी प्रस्तुति।
  • पुणे के गायक-संगीतकार रफ़ीक़ शेख द्वारा कविता-गायन
  • 2008-09 के संगीत-सत्र के पुरस्कारों का वितरण

अपनी उपस्थिति सुनिश्चत करें।

निवेदक-
सजीव सारथी
संपादक, आवाज़
हिन्द-युग्म
9871123997
sajeevsarathie@gmail.com

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ