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Friday, March 16, 2012

बोलती कहानियाँ: घीसा (महादेवी वर्मा) - अर्चना चावजी

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अमर साहित्यकार बाबा नागार्जुन की मार्मिक कहानी "असमर्थ दाता का पॉडकास्ट प्राख्यात ब्लॉगर अर्चना चावजी की आवाज़ में सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं छायावाद की अमर कवयित्री महादेवी वर्मा द्वारा लिखी हृदयस्पर्शी कहानी "घीसा, जिसको स्वर दिया है अर्चना चावजी ने।

 कहानी का कुल प्रसारण समय 10 मिनट 17 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

अश्रु यह पानी नहीं है, यह व्यथा चंदन नहीं है!
महादेवी वर्मा (26 मार्च 1906 – 11 सितम्बर, 198)

हर शुक्रवार को यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

जला हुआ काला वर्ण, टेढ़े मेढ़े पैर, दरकी हुई त्वचा, शुष्क बेतरतीब रस्सीनुमा केश। चीकट मैले कुरते की एक बांह पूरी, एक बांह आधी। मानो खेत में कौए को डराने के लिए कोई पुतला खड़ा हो। लेकिन आंखें एकदम चमकीली।
(महादेवी वर्मा की "घीसा" से एक अंश)

नीचे के प्लेयर से सुनें.
 

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3

 #Tenth Story, Gheesa: Mahadevi Verma/Hindi Audio Book/2012/10. Voice: Archana Chaoji

Tuesday, November 16, 2010

हौले हौले रस घोले....महान महदेवी वर्मा के शब्द और जयदेव का मधुर संगीत

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 528/2010/228

हिंदी साहित्य छायावादी विचारधारा के लिए जाना जाता है। छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में एक स्तंभ का नाम है महादेवी वर्मा। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों, नमस्कार, और स्वागत है हिंदी साहित्यकारों की फ़िल्मी रचनाओं पर आधारित लघु शृंखला 'दिल की कलम से' की आठवीं कड़ी में। महादेवी वर्मा ना केवल हिंदी की एक असाधारण कवयित्री थीं, बल्कि वो एक स्वाधीनता संग्रामी, नारीमुक्ति कार्यकर्ता और एक उत्कृष्ट शिक्षाविद भी थीं। महादेवी वर्मा का जन्म २६ मार्च १९०७ को फ़र्रुख़ाबाद में हुआ था। उनकी शिक्षा मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उनके पिता गिविंदप्रसाद और माता हेमरानी की वो वरिष्ठ संतान थीं। उनके दो भाई और एक बहन थीं श्यामा। महादेवी जी का विवाह उनके ९ वर्ष की आयु में इंदौर के डॊ. स्वरूप नारायण वर्मा से हुआ, लेकिन नाबालिक होने की वजह से वो अपने माता पिता के साथ ही रहने लगीं और पढ़ाई लिखाई में मन लगाया। उनके पति लखनऊ में अपनी पढ़ाई पूरी। महादेवी जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और १९२९ में बी.ए की डिग्री लेकर १९३३ में सम्स्कृत में एम.ए कर लीं। महादेवी वर्मा और उनके पति दांपत्य जीवन में ज़्यादातर अलग अलग ही रहे अपनी अपनी रुचियों के चलते। १९६६ में स्वरूप जी के निधन के बाद महादेवी स्थायी रूप से इलाहाबाद में रहने लगीं और आजीवन वहीं रहीं। महात्मा बुद्ध के विचारों का उन पर गहरा असर हुआ और एक समय उन्होंने एक बौध भिक्षुणी बनने की भी कोशिश की थी। इलाहाबाद महिला विद्यापीठ की वो प्रथम मुख्यशिक्षिका बनीं, जिसका मुख्य उद्येश्य था हिंदी माध्यम से लड़कियों को शिक्षा देना। आगे चलकर वो इस विद्यापीठ की चांसेलर भी बनीं। ११ सितंबर १९८७ के रात ९:२७ मिनट पर महादेवी वर्मा चिरनिद्रा में सो गईं।

महादेवी वर्मा द्वारा लिखित कविता संग्रह 'यामा' को बेहद सराहना मिली थी, जिसे ज्ञानपीठ पुरस्कर से सम्मानित किया गया था। १९५६ में भारत सरकार ने साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए महादेवी वर्मा को पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इसके अलावा १९७९ में देश के सर्वोच्च साहित्य सम्मान 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। १९८८ में मरणोपरांत उन्हें पद्मविभुषण से सम्मानित किया गया था। महादेवी वर्मा की लिखी कविताएँ और कहानियाँ स्कूल कालेजों के पाठ्यपुस्तकों में स्थान पाते हैं। महादेवी वर्मा को एक फ़िल्मी गीतकार के रूप में पाना फ़िल्म जगत का सौभाग्य है। १९८६ की फ़िल्म 'त्रिकोण का चौथा कोण' में उनका लिखा एक गीत शामिल किया गया था। छाया गांगुली की आवाज़ में यह गीत एक अद्भुत रचना है जिसे जयदेव ने स्वरबद्ध किया था। दोस्तों, मैं कोई साहित्यकार नहीं जो इस गीत के साहित्यिक पक्ष पर कोई टिप्पणी कर सकूँ, लेकिन इतना ज़रूर महसूस कर सकता हूँ कि यह एक उत्कृष्ट रचना है। इस कमचर्चित फ़िल्म के मुख्य कलाकार थे विजयेन्द्र घाटगे, स्वरूप सम्पत, प्रियदर्शिनी, प्रमुख। जैसा कि फ़िल्म के शीर्षक से ही प्रतीत होता है, विवाह से बाहर के संबंधों का ताना बाना बुना गया होगा इस फ़िल्म की कहानी में। आइए इस गीत को सुनते हैं,

हौले हौले रस घोले बोले मुझसे जिया,
पिया पिया पे क्या जादू पर मैंने क्या किया।

इठलाये, इतराये, इतराये, इठलाये, पूछे मुझसे जिया,
पिया पिया पे क्या जादू पर मैंने क्या किया।

ज़रा देखिए कि किस तरह से "इठलाये" और "इतराये" शब्दों को दूसरी बार आपस में बदल कर गीत के सौंदर्य को और भी बढ़ा दिया है। लीजिए यह गीत सुनिए और महसूस कीजिए कि छाया गांगुली ने कैसा ख़ूबसूरत अंजाम दिया है इस गीत को। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' का आज का यह अंक समर्पित है महान कवयित्री और साहित्यकार महादेवी वर्मा की पुण्य स्मृति को।



क्या आप जानते हैं...
कि छायावादी विचारधारा के चार स्तंभों में महादेवी वर्मा के अलावा बाकी तीन स्तंभ कौन से हैं? ये हैं सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', जयशंकर प्रसाद, और सुमित्रानंदन

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली ०९ /शृंखला ०३
ये प्रिल्यूड है गीत का -


अतिरिक्त सूत्र - ये कवि पिता भी हैं इंडस्ट्री के एक महानायक के.

सवाल १ - कवि / गीतकार का नाम बताएं - १ अंक
सवाल २ - गायक बताएं - २ अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
श्याम कान्त जी ने काफी अच्छी बढ़त बना ली है, लगता है एक और मुकाबला उनके नाम रहेगा. शरद जी और अमित को भी बधाई, अवध जी का आभार

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Thursday, February 25, 2010

'काव्यनाद' और 'सुनो कहानी' की बम्पर सफलता



हिन्द-युग्म ने 19वें विश्व पुस्तक मेले (जो 30 जनवरी से 7 फरवरी 2010 के दरम्यान प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित हुआ) में बहुत-सी गतिविधियों के अलावा दो नायाब उत्पादों का भी प्रदर्शन और विक्रय किया। वे थे प्रेमचंद की 15 कहानियों का ऑडियो एल्बम ‘सुनो कहानी’ और जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध स्वरूप का एल्बम ‘काव्यनाद’। ये दोनों एल्बम विश्व पुस्तक मेला में सर्वाधिक बिकने वाले उत्पादों में से थे। दोनों एल्बमों की 500 से भी अधिक प्रतियों को साहित्य प्रेमियों ने खरीदा। इस एल्बम के ज़ारी किये जाने से पहले हिन्द-युग्म के संचालकों को भी इसकी इस लोकप्रियता और सफलता का अंदाज़ा नहीं था। 1 फरवरी 2010 को प्रगति मैदान के सभागार में इन दोनों एल्बमों के विमोचन का भव्य समारोह भी आयोजित किया गया जिसमें वरिष्ठ कवि अशोक बाजपेयी, प्रसिद्ध कथाकार विभूति नारायण राय और संगीत-विशेषज्ञ डॉ॰ मुकेश गर्ग ने भाग लिया। ‘काव्यनाद’ और ‘सुनो कहानी’ कहानी की इस सफलता के बाद ऑल इंडिया रेडियो के समाचार-प्रभाग के रितेश पाठक ने जब हिन्द-युग्म के प्रमुख संचालक शैलेश भारतवासी से प्रतिक्रिया माँगी तो शैलेश ने कहा-
लोग साहित्य के साथ हुए इन नये प्रयोगों को सराह रहे हैं। हमारे स्टॉल पर कई सारे ऐसे आगंतुक भी पधार रहे हैं जिन्होंने इन एल्बमों के बारे में अखबारों या वेबसाइटों पर पढ़ा और बिना ज्यादा पड़ताल के ही अपने और अपने मित्रों-सम्बंधियों के लिए ये एल्बम खरीद कर ले जा रहे हैं। हमारी पूरी टीम मेले के रेस्पॉन्स से बहुत खुश है।

इसके बाद हिन्द-युग्म से बहुत से स्कूलों-कॉलेजों ने ईमेल के द्वारा इन एल्बमों के सम्बंध में जानकारी माँगी है। कई विद्यालयों के प्राचार्यों ने यहाँ तक कहा कि ये अभिनव प्रयोग विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए बहुत उपयोगी हैं और इन्हें हर विद्यार्थी और अभिभावक तक पहुँचाया जाना चाहिए। हिन्द-युग्म का मानना है कि साहित्य का तकनीक के साथ सकारात्मक ताल-मेल भी हो सकता है, बस हमारी दृष्टि साफ हो कि हमें साहित्य और भाषा को किस ओर लेकर जाना है।

कई ऐसे साहित्यप्रेमी भी मेले में हिन्द-युग्म के स्टॉल पर आये जिन्होंने पहले खरीदकर इन्हें सुना और फोन द्वारा या स्टॉल पर दुबारा आकर इनकी भूरी-भूरी प्रसंशा की। बहुत से लोगों ने नागार्जुन, धूमिल, मुक्तिबोध इत्यादि कवियों की कविताओं को संगीतबद्ध करने की सलाह दी। कइयों ने कहाँ कि ‘काव्यनाद’ जैसा प्रयोग ही किसी एक कवि की 10 या 10 से अधिक कविताओं को लेकर किये जाने की ज़रूरत है। वरिष्ठ कथाकार हिमांशु जोशी स्टॉल पर पधारे और कहा कि ऐसे कथाकारों की कहानियों को कथाकारों की ही आवाज़ में संरक्षित करने की ज़रूरत है जो बहुत वरिष्ठ हैं और जिनकी कहानियाँ महत्वपूर्ण हैं। हिन्द-युग्म ने पाठकों, श्रोताओं और साहित्यकारों को इस दिशा में नित नये प्रयोग करते रहने का विश्वास दिलाया।

हिन्द-युग्म ने अपनी कार्ययोजना में यह भी जोड़ा है कि इन एल्बमों को दुनिया भर के उन स्कूलों में ज़रूर से ज़रूर पहुँचाना है जहाँ हिन्दी प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक या प्राच्य भाषा के तौर पर पढ़ाई जाती है। दक्षिण भारत से आये एक हिन्दी के अध्यापक ने प्रेमचंद की कहानियों के एल्बम को गैरहिन्दी भाषियों के लिए हिन्दी भाषा सीखने और समझने का एक उपकरण भी माना।

हिन्द-युग्म के ये एल्बम होली के बाद भारत के सभी हिन्दी प्रदेशों के प्रमुख म्यूजिक स्टोर पर उपलब्ध कराये जाने की योजना बनाई है। हिन्द-युग्म ने इन एल्बमों को ऑनलाइन बेचने का भी प्रबंध किया है और मूल्य केवल लागत मूल्य के बराबर रखा है।

हिन्द-युग्म की आवाज़-टीम अपनी इस सफलता से बहुत उत्साहित है और नये और पुराने कवियों की कविताओं के साथ एक साथ प्रयोग करना चाहती है। हिन्द-युग्म वर्ष 2010 में कविता पर लघु फिल्म बनाने की भी योजना बना रहा है। हिन्द-युग्म कुछ महान कविताओं पर फिल्म निर्माण के बाद उसे दुनिया के सभी लघु फिल्म समारोहों में प्रदर्शित करना चाहती है। ‘काव्यनाद’ की कुछ संगीतबद्ध कविताओं को लेकर भी हिन्दी भाषा पर एक डाक्यूमेंटरी फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

‘काव्यनाद’ के बनने की कहानी भी अपने आप में अभूतपूर्व है। शैलेश बताते हैं- ‘मई 2010 में डैलास, अमेरिका से साहित्यप्रेमी आदित्य प्रकाश का फोन आया, बातों-बातों में उन्होंने कहा कि शैलेश आपकी आवाज़ टीम वाले इतने सारे गीतों को कम्पोज करते हैं, कभी उनसे कविता को संगीतबद्ध करने को कहिए। और उसी समय मैंने उनके साथ मिलकर गीतकास्ट प्रतियोगिता को आयोजित करने की योजना बनाई। आदित्य प्रकाश ने अपनी ओर से विजेताओं को नगद इनाम भी देने का वचन दिया। जब इस प्रतियोगिता के पहले अंक के लिए (यानी जयशंकर प्रसाद की कविता ‘अरूण यह मधुमय देश हमारा’ के लिए) प्रविष्टियाँ आईं तो मेरे साथ-साथ आदित्य प्रकाश भी बहुत खुश हुए। उन्होंने इन प्रविष्टियों को रेडियो सलाम नमस्ते के ‘कवितांजलि’ कार्यक्रम में बजाया और पूरी दुनिया के साहित्य प्रेमियों ने इस प्रयोग को सर-आँखों पर बिठा लिया। उसी समय आदित्य प्रकाश के साथ मिलकर हमने यह तय किया के छायावादी युगीन चारों स्तम्भ कवियों की 1-1 कविताओं के साथ यह प्रयोग किया जाय। इसके लिए शेर बहादुर सिंह, डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह और अशोक कुमार से सहयोग मिला और इन्होंने पहले आयोजन से दोगुनी राशि को इनाम में देने का हमारा आवेदन स्वीकार कर लिया और श्रोताओं ने खुद सुना कि गीकास्ट प्रतियोगिता के हर नये अंक की प्रविष्टियाँ अपने पिछले अंक से बेहतर थीं।“

शैलेश ने आगे बताया कि जब हमने छायावादी युगीन कवियों तक इस प्रयोग को सफल बना लिया तो आदित्य प्रकाश के साथ यह तय किया कि आने वाले विश्व पुस्तक मेला में क्यों न इन कविताओं को एक एल्बम निकाला जाय। हमें लगा कि एल्बम निकाले जाने के लिए 4 कविताएँ कम हैं इसलिए कमल किशोर सिंह, दीपक चौरसिया 'मशाल', डॉ॰ शिरीष यकुन्डी, डॉ॰ प्रशांत कोले, डॉ॰ रघुराज प्रताप सिंह ठाकुर और शैलेश त्रिपाठी की मदद से रामधारी सिंह दिनकर और मैथिली शरण गुप्त की एक-एक कविता को संगीतबद्ध किये जाने की प्रतियोगिता रखी गई। लेकिन इतने मात्र से तो एल्बम की समाग्री ही बनी, एल्बम को बज़ार तक लाने के लिए भी धन की आवाश्यकता थी। लेकिन मैं आदित्य प्रकाश, ज्ञान प्रकाश सिंह और बिस्वजीत का धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने इस काम के लिए भी हमारी हर सम्भव मदद की।

आवाज़ के संचालक सजीव सारथी कहते हैं कि हमें उम्मीद है कि हमारे इन सभी साहित्यानुरागियों का सहयोग पहले की तरह यथावत बना रहेगा और और हम जल्द ही कुछ और अभिनव और पहले से कई गुना बेहतर गुणवत्ता के प्रयोग करेंगे। हमने काव्यनाद की समीक्षा की भी शुरूआत की है। काव्यनाद की समीक्षा अभी कुछ दिनों पहले ही मैंने सुजॉय के साथ मिलकर 'ताज़ा सुर ताल' में की है। भविष्य में अन्य संगीत विशेषज्ञों से भी हम इसकी समीक्षा करवायेंगे।

Sunday, September 13, 2009

महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' का संगीतबद्ध रूप

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-4: जो तुम आ जाते एक बार

हर वर्ष 14 सितम्बर का दिन हिन्दी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। हिन्दी सेवी संस्थाएँ तरह-तरह के सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन करती हैं। सरकारी उपक्रम तो हिन्दी सप्ताह, हिन्दी पखवाड़ा व हिन्दी मास अभियान चलाने जैसी बातें करते हैं। लेकिन हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं। बल्कि इससे एक दिन पहले महीयसी महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' का संगीतबद्ध संस्करण जारी कर रहे हैं।

हिन्द-युग्म डॉट कॉम अपने आवाज़ मंच पर गीतकास्ट प्रतियोगिता के माध्यम से हिन्दी के स्तम्भ कवियों की एक-एक कविताओं को संगीतबद्ध/स्वरबद्ध करने की प्रतियोगिता आयोजित करता है। इसमें हमने शुरूआती शृंखला के तौर पर छायवादी युगीन कवियों की कविताओं को स्वरबद्ध करने की प्रतियोगिता रखी। जिसके अंतर्गत अब तक जयशंकर प्रसाद की कविता ' अरुण यह मधुमय देश हमारा', सुमित्रानंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' को संगीतबद्ध किया जा चुका है। आज हम छायावादी युग की अंतिम कड़ी यानी महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' का परिणाम लेकर हाज़िर हैं।

जब हमें लगा कि कविता को स्वरबद्ध करना मुश्किल है, तब हमें बहुत अधिक प्रविष्टियाँ मिली। जबकि इस बार हमें महसूस हो रहा था कि महादेवी वर्मा की यह कविता बहुत आसानी से संगीतबद्ध हो जायेगी तो मात्र 10 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया। लेकिन सजीव सारथी, अनुराग शर्मा, यूनुस खान, आदित्य प्रकाश और शैलेश भारतवासी सरीखे निर्णायकों ने कहा कि इस बार संगीत संयोजन, गायकी और उच्चारण के स्तर पर प्रविष्टियाँ पहले से कहीं बेहतर हैं। तब हमें बहुत संतोष भी मिला।

पाँच जजों द्वारा मिले औसत अंकों के आधार में हमने कृष्ण राज कुमार और श्रीनिवास पांडा/कुहू गुप्ता को संयुक्त विजेता घोषित करने का निर्णय लिया है। इस तरह से प्रथम स्थान के लिए निर्धारित रु 2000 और दूसरे स्थान के निर्धारित के लिए निर्धारित रु 1000 को जोड़कर आधी-आधी राशि इन दो विजेताओं (विजेता समूहों) को दी जायेगी।

आपको याद होगा की श्रीनिवास पांडा के संगीत-निर्देशन में बिस्वजीत नंदा द्वारा गायी गई निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' को भी पहला स्थान प्राप्त हुआ था। इस बार संगीतकार श्रीनिवास ने कुहू गुप्ता के रूप में बहुत ऊर्जावान गायिका हिन्द-युग्म को दिया है।


श्रीनिवास/कुहू

श्रीनिवास
कुहू
कुहू युग्म पर पहली बार शिरकत कर रही हैं। पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। ये पिछले 5 वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रही हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। इन्होंने ज़ी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने कुछ व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं। वैसे ये अपनी संतुष्टि के लिए गाना ही अधिक पसंद करती हैं।

श्रीनिवास हिन्द-युग्म के लिए बिलकुल नये संगीतकार हैं। 'स्नेह-निर्झर बह गया है' के माध्यम से आवाज़ पर इन्होंने अपनी एंट्री की थी। मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1500 का नग़द पुरस्कार

विशेष- अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-
64kbps

128kbps



इसी स्थान पर कृष्ण राजकुमार की प्रविष्टि भी शामिल है।


कृष्ण राज कुमार

कृष्ण राज कुमार एक ऐसे गायक-संगीतकार हैं जिनके बारे में जानकर और सुनकर हर किसी को सलाम करने का मन करता है। गीतकास्ट प्रतियोगिता अभी तक 4 बार आयोजित हुई है, इन्होंने चारों दफा इसमें भाग लिया है और निर्णायकों का ध्यान आकृष्ट किया है। जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' के लिए प्रथम पुरस्कार, सुमित्रा नंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' के लिए द्वितीय पुरस्कार और इस बार महादेवी वर्मा के लिए भी प्रथम पुरस्कार। निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' के लिए भी इनकी प्रविष्टि उल्लेखनीय थी। कृष्ण राज कुमार जो मात्र 22 वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले 14 सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1500 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-
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तीसरे स्थान के विजेता आवाज़ के दैनिक श्रोता हैं। ओल्ड इज़ गोल्ड के गेस्ट-होस्ट रह चुके हैं। आवाज़ से ही कैरिऑके में अपनी आवाज़ डालना सीखे हैं और आज तीसरे स्थान के विजेता हैं। इस प्रविष्टि में संगीत इनका है और संगीत संयोजन इनके मित्र ब्रजेश दाधीच का। आवाज़ भी इन्हीं की है।


शरद तैलंग

शरद तैलंग सुगम संगीत के आकाशवाणी कलाकार, कवि, रंगकर्मी और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के कार्यकारिणी सदस्य हैं। वे भारत विकास परिषद के अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय सम्मेलन के सांस्कृतिक सचिव भी रह चुके हैं।

आप अनेक साहित्यिक व संगीत संस्थाओँ के सदस्य अथवा पदाधिकारी रह चुके है, अनेकों संगीत एवं नाट्य प्रतियोगिताओँ में निर्णायक रह चुके हैं तथा देश के केरल, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र प्रदेशों के अनेक शहरों में अपनी संगीत प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। आपकी रचनाएँ देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओँ जैसे धर्मयुग, हंस, मरु गुलशन, मरु चक्र, सौगात, राजस्थान पत्रिका, राष्ट्रदूत, माधुरी, दैनिक भास्कर आदि में प्रकाशित हो चुकी हैं।

ऑल इण्डिया आर्टिस्ट एसोसिएशन शिमला, जिला प्रशासन कोटा आई. एल. क्लब तथा अनेक संस्थानों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका हैं। आप आवाज़ पर बहुचर्चित स्तम्भ 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के अतिथि-होस्ट रह चुके हैं।

पुरस्कार- तृतीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-
64kbps

128kbps



इनके अतिरिक्त हम रफ़ीक शेख, कमल किशोर सिंह, रमेश धुस्सा, अम्बरीष श्रीवास्तव, शारदा अरोरा, कमलप्रीत सिंह, और अर्चना चाओजी इत्यादि के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है। हम निवेदन करेंगे कि आप इसी ऊर्जा के साथ गीतकास्ट के अन्य अंक में भी भाग लेते रहें।


इस कड़ी के प्रायोजक है डैलास, अमेरिका के अशोक कुमार हैं जो पिछले 30 सालों से अमेरिका में हैं, आई आई टी, दिल्ली के प्रोडक्ट हैं। डैलास, अमेरिका में भौतिकी के प्रोफेसर हैं, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के आजीवन सदस्य हैं। और हिन्दी-सेवा के लिए डैलास में एक सक्रिय नाम हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।

Wednesday, August 12, 2009

महादेवी वर्मा की विरह-कविता गायें और स्वरबद्ध करें

हिन्द-युग्म ने मई 2009 से गीतकास्ट प्रतियोगिता के माध्यम से महाकवियों की कविताओं को संगीतबद्ध करने की परम्परा शुरू की है। इस क्रम में सबसे पहले हमने हिन्दी कविता के स्वर्णिम काल छायावादी युग के चार स्तम्भ कवियों की एक-एक कविता को संगीतबद्ध करवाने का संकल्प लिया है। उल्लेखनीय है कि हमने चार में से तीन कवियों (जयशंकर प्रसाद, सुमित्रा नंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला) की एक-एक कविता को संगीतबद्ध करने की प्रतियोगिता का सफल आयोजन कर भी लिया है।

आज हम महीयसी महादेवी वर्मा की कविता के लिए संगीतबद्ध प्रविष्टियाँ भेजने की उद्‍घोषणा लेकर उपस्थित हैं। महादेवी वर्मा को विरह की कवयित्री भी कहा जाता है। हमने इनकी एक विरह और मिलन की कल्पना से उपजने वाले भावों से पिरोई कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' को संगीतबद्ध करवाने का निर्णय लिया है।

इस कड़ी के प्रायोजक है डैलास, अमेरिका के अशोक कुमार हैं जो पिछले 30 सालों से अमेरिका में हैं, आई आई टी, दिल्ली के प्रोडक्ट हैं। डैलास, अमेरिका में भौतिकी के प्रोफेसर हैं, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के आजीवन सदस्य हैं। और हिन्दी-सेवा के लिए डैलास में एक सक्रिय नाम हैं।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 31 अगस्त 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को अशोक कुमार की ओर से क्रमशः रु 2000, रु 1000 और रु 1000 के नग़द पुरस्कार दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रमों में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश रेडियो के किसी कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार'

जो तुम आ जाते एक बार

कितनी करुणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग

आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार

हँस उठते पल में आर्द्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर-संचित विराग

आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार

Sunday, March 29, 2009

पॉडकास्ट कवि सम्मलेन मार्च २००९

Doctor Mridul Kirti - image courtesy: www.mridulkirti.com
डॉक्टर मृदुल कीर्ति
मैं नीर भरी दुःख की बदली
कविता प्रेमी श्रोताओं के लिए प्रत्येक मास के अन्तिम रविवार का अर्थ है पॉडकास्ट कवि सम्मेलन। आवाज़ के तत्त्वावधान में इस बार हम लेकर आए हैं नवम् ऑनलाइन कवि सम्मेलन का पॉडकास्ट।

मेरा पग पग संगीत भरा,
श्वासों में स्वप्न पराग झरा,
नभ के नव रंग बुनते दुकूल,
छाया में मलय बयार पली

(महादेवी वर्मा की कविता "नीर भरी दुख की बदली" से)

कवि सम्मलेन के सभी श्रोताओं को हिंद युग्म की टीम की ओर से नव संवत्सर २०६६ की शुभ कामनाएं। देश भर में यह समय प्राचीन काल से ही उत्सवों का समय रहा है। राष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में नाम चाहे भिन्न हों परन्तु गुडी पडवो, युगादि, चैत्रादि, चेती-चाँद, नव-रात्रि, राम नवमी, बोहाग बिहू के साथ ही उल्लास और आनंद की एक नयी लहर हर ओर दिखाई पड़ रही है। इस शुभ अवसर पर हम आपके समक्ष एक नया कवि सम्मेलन लेकर उपस्थित हैं। इस बार के कवि सम्मलेन के माध्यम से हम महान कवयित्री महादेवी वर्मा को नमन कर रहे हैं जिनका जन्मदिन २५ मार्च को है।
छायावाद की इस महान कवयित्री को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए इस अंक में हमारे साथ उपस्थित हैं आचार्य संजीव सलिल महादेवी वर्मा के साथ अपनी व्यक्तिगत यादों को हमारे साथ साझा करने के लिए।
तो आईये इस बार के कवि सम्मलेन के माध्यम से आनंद लेते हैं एक नए युग की शुरुआत का। डॉक्टर मृदुल कीर्ति के मंझे हुए संचालन में चुनी हुई सुमधुर रचनाओं का आनंद उठाईये।

पिछले सम्मेलनों की सफलता के बाद हमने आपकी बढ़ी हुई अपेक्षाओं को ध्यान में रखा है। हमें आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि इस बार का सम्मलेन आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा और आपका सहयोग हमें इसी जोरशोर से मिलता रहेगा। यदि आप हमारे आने वाले पॉडकास्ट कवि सम्मलेन में भाग लेना चाहते हैं तो अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। कवितायें भेजते समय कृपया ध्यान रखें कि वे १२८ kbps स्टीरेओ mp3 फॉर्मेट में हों और पृष्ठभूमि में कोई संगीत न हो। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। पॉडकास्ट कवि सम्मेलन के अगले अंक का प्रसारण २५ अप्रैल २००९ को किया जायेगा और इसमें भाग लेने के लिए रिकॉर्डिंग भेजने की अन्तिम तिथि है १९ अप्रैल २००९

नीचे के प्लेयर से सुनें:


यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)
VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis

हम सभी कवियों से यह अनुरोध करते हैं कि अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे।

रिकॉर्डिंग करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। हिन्द-युग्म के नियंत्रक शैलेश भारतवासी ने इसी बावत एक पोस्ट लिखी है, उसकी मदद से आप सहज ही रिकॉर्डिंग कर सकेंगे।

अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।

# Podcast Kavi Sammelan. Part 9. Month: March 2009.
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