Wednesday, March 11, 2009

"आज बिरज में होरी रे रसिया...."- लीपिका भट्टाचार्य की आवाज़ में सुनिए "होरी" गीत

सभी पाठकों और श्रोताओं को होली की शुभकामनायें. आज होली के अवसर पर आवाज़ पर भी कुछ बहुत ख़ास है आपके लिए. इस शुभ दिन को हमने चुना है आपको एक उभरती हुई गायिका से मिलवाने के लिए जो आपको अपनी मधुर आवाज़ में "होरी" के रंगों से सराबोर करने वाली हैं.

गायिका और संगीत निर्देशिका लीपिका भट्टाचार्य लगभग तभी से युग्म के साथ जुडी हैं जब से हमने अपने पहले संगीतबद्ध गीत के साथ युग्म पर संगीत रचना की शुरुआत की थी. उन दिनों वो एक जिंगल का काम कर चुकी थी. पर चूँकि हमारा काम इन्टरनेट आधारित रहा तो इसमें अलग अलग दिशाओं में बैठे कलाकारों के दरमियाँ मेल बिठाने के मामले में अक्सर परेशानियाँ सामने आती रही. लीपिका भी इसी परेशानी में उलझी रही, इस बीच उन्होंने अपनी दो कृष्ण भजन की एल्बम का काम मुक्कमल कर दिया जिनके नाम थे -"चोरी चोरी माखन" और "हरे कृष्ण". इन सब व्यस्तताओं के बीच भी उनका आवाज़ से सम्पर्क निरंतर बना रहा. बीच में उनके आग्रह पर हमने शोभा महेन्द्रू जी का लिखा एक शिव भजन उन्हें भेजा था स्वरबद्ध करने के लिए पर बात बन नहीं पायी. अब ऐसी प्रतिभा की धनी गायिका को आपसे मिलवाने का होली से बेहतर मौका और क्या हो सकता था. तो आईये लीपिका के स्वरों और सुरों के रंग में रंग जाईये और डूब जाईये होली की मस्ती में. यदि आप होली नहीं भी खेलते तो हमारा दावा है लीपिका के इस "होरी" गीत को सुनने के बाद आपका भी मन मचल उठेगा रंग खेलने के लिए. लीजिये सुनिए -



इसके आगे है>>>>>होरी गीतों के मशहूर जनगायक पंडित छन्नूलाल मिश्रा के गीतों से सजी शैलेश भारतवासी की प्रस्तुति

होली मुबारक


11 comments:

मानसी said...

अच्छी आवाज़ के साथ सधी गायकी भी। लीपिका को बधाई व शुभकामनायें।

संत शर्मा said...

Bahut khubsurat aawaj, Gane ka bol to khubsurat hai hi.

शैलेश भारतवासी said...

लीपिका जी,

आपने इस गीत को बहुत अच्छी तरह से गाया है। आवाज़ में जो ऊर्जा दिखनी चाहिए, वह दिख रही है। हम तो आग्रह करेंगे कि इस रामनवमी पर भी अपनी कोई प्रस्तुति दें।

होली मुबारक़

L.Goswami said...

होली की बहुत शुभकामनायें.

शोभा said...

bahut sundar geet holi mubarak

shanno said...

लीपिका जी का गाया इस 'होरी' गीत को मैं आंखें बंद करके सुनती रही और होली का आनंद लेती रही. कल्पना-पटल पर होली खेलने का एक सुंदर चित्र खिंच गया और मैं दर्शक बन कर सबको होली खेलते और रंगों में सराबोर होते हुए देखती रही. और इतनी दूर बैठी हुई मैं होली का आनंद उठाती रही बिना रंगों में भीगे हुए.......इससे बेहतरीन और क्या हो सकता है. इतने सुंदर गीत के लिए अति धन्यबाद. सभी को होली की शुभकामनाएं

anitakumar said...

बहुत सुंदर गीत बना है,लिपिका जी को बधाई

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

'आज बिरज में' सुन हुआ, मन को अति आनद.

सदय गायिका पर रहे, राधे-आनंदकंद.

मधुर कंठ ध्वनि मोहती, ऊर्जा स्वर में खूब.

उच्चारण स्पष्ट हैं, सकीं भाव में डूब.

रमीं छंद में लीपिका, साध सकीं आलाप.

भाव गीत के सके हैं अंतर्मन में व्याप.

-sanjivsalil.blogspot.com

Leepikaa Bhattacharya said...

Aawaj ke mere sabhi sathiyon ko mera Namashkar aur holi ki bahut sari subhkamanaye.
Aap sabhi ko ye holi geet aachi lagi is ke liye danyawad.
Mere is geet ko aawaj me post karne aur aap sab tak pahuchane ke liye sajeev jee ko bahut bahut dhanyawad.
Leepikaa

हिमांशु । Himanshu said...

इस सुन्दर होली गीत के लिये लीपिका जी को धन्यवाद और सम्पूर्ण हिन्द युग्म परिवार व इसमे पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

Ravishankar Shrivastava said...

होली के तमाम पुराने घिसे पिटे बारंबार चल चुके गीतों के बीच यह नए स्वर, नए संगीत का वर्जिन गान बहुत ही भाया. लिपिका (इनकी आवाज में तमाम संभावनाएं नजर आती हैं) व हिन्द युग्म दोनों का आभार.

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