Sunday, April 17, 2011

मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है....अरे नहीं साहब ये तो गाने के बोल हैं, हमारे अंगने में तो आपका ही काम है...आईये

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 636/2010/336

'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों, नमस्कार! आज हम एक नए सप्ताह में क़दम रख रहे हैं और इन दिनों जारी है लघु शृंखला 'सितारों की सरगम', जिसके अंतर्गत हम कुछ ऐसे गीत सुनवा रहे हैं जिन्हें आवाज़ दी है फ़िल्म अभिनेता और अभिनेत्रियों नें। शृंखला के पहले हिस्से में जिन पाँच सितारों की सरगमी आवाज़ से आपका परिचय हुआ वो थे राज कपूर, दिलीप कुमार, मीना कुमारी, नूतन और अशोक कुमार। आइए आज से शुरु हो रही इस शृंखला के दूसरे हिस्से में बात करें अगली पीढ़ी के सितारों की। ऐसे में शुरुआत 'मेगास्टार ऒफ़ दि मिलेनियम' के अलावा और किनसे हो सकती है भला! जी हाँ, बिग बी अमिताभ बच्चन। साहब उनकी आवाज़ के बारे में क्या कहें, यह तो बस सुनने की चीज़ है। और मज़े की बात यह है कि फ़िल्मों में आने से पहले जब उन्होंने समाचार वाचक की नौकरी के लिए वॊयस टेस्ट दिया था, तो उसमें वो फ़ेल हो गये थे और उन्हें बताया गया था कि उनकी आवाज़ वाचन के लिए सही नहीं है। और क़िस्मत ने क्या खेल खेला कि उनकी वही आवाज़ आज उनकी पहचान है। बच्चन साहब नें जो सफलता और शोहरत कमाई है अपने लम्बे करीयर में और जो सिलसिला आज भी जारी है, इस ऊँचाई तक बहुत कम लोग पहुँच पाते हैं। हमारे बौने हाथ उनकी उपलब्धि को छू भी नहीं सकते। बहुत साल पहले विविध भारती के एक मुलाक़ात में बच्चन साहब से पूछा गया था कि "अमित जी, आप जिस मुकाम पर आ गये हैं वहाँ संघर्ष आपको छू भी नहीं सकता, पर जब पहली बार आपको सफलता मिली थी, उस वक़्त आपको कैसा महसूस हुआ था?"; इसके जवाब में अमित जी का कहना था, "पहली बात तो यह है कि संघर्ष कभी ख़त्म नहीं होती, आज भी मुझे उतना ही संघर्ष करना पड़ता है जितना उस ज़माने में करना पड़ता था। मेरे बाबूजी कहते हैं कि जब तक जीवन है संघर्ष है। और जहाँ तक सफलता का सवाल है, ख़ुशी तो हुई थी, पर उसके लिए कोई ख़ास तरीक़े से मनाया नहीं गया था।"

दोस्तों, अमिताभ बच्चन साहब के अभिनय का लोहा तो हर किसी ने माना ही है, उनकी गायन क्षमता की भी जितनी दाद दी जाये कम है। उन्होंने कई फ़िल्मों में गीत गाया है और कई बार संवाद भी ऐसे निराले तरीक़े से कहे हैं गीतों में कि उस वजह से गीत एक अलग ही मुकाम तक पहुँच गया है। ऐसा ही एक गीत है फ़िल्म 'सिलसिला' का "ये कहाँ आ गये हम युंही साथ साथ चलते"। फ़िल्म 'ख़ुदा गवाह' में भी उनका बोला हुआ संवाद "सर ज़मीन-ए-हिंदुस्तान' को सॊंग् साउण्डट्रैक में शामिल किया गया था। 'नसीब' के "चल चल मेरे भाई" और 'अमर अक्बर ऐंथनी' में "माइ नेम इज़ ऐंथनी गोल्ज़ल्वेज़" में भी उनके हुए संवाद यादगार हैं। अमिताभ बच्चन के गायन से समृद्ध फ़िल्मों में जो नाम सब से पहले ज़हन में आते हैं, वो हैं - 'सिलसिला', 'मिस्टर नटवरलाल', 'लावारिस', 'पुकार', 'जादूगर', 'महान', 'तूफ़ान', 'बागबान'। 'सिलसिला' में दो गीत उन्होंने गाये थे, "नीला आसमाँ सो गया" और "रंग बरसे भीगे चुनरवाली"। यह होली गीत तो शायद सब से लोकप्रिय होली गीत होगा फ़िल्म जगत का! 'मिस्टर नटवरलाल' में "मेरे पास आओ मेरे दोस्तों", 'पुकार' में "तू मयके मत जैयो, मत जैयो मेरी जान", 'जादूगर' में "पड़ोसी अपनी मुरगी को रखना सम्भाल मेरा मुर्गा हुआ है दीवाना", 'महान' में "समुंदर में नहाके और भी नमकीन हो गई है", 'तूफ़ान' में "बाहर है प्रॊब्लेम अंदर है प्रॊब्लेम", और 'बागबान' में "होली खेले रघुवीरा", "चली चली देखो चली चली" और "मैं यहाँ तू वहाँ, ज़िंदगी है कहाँ" जैसे गीत ख़ूब लोकप्रिय हुए। लेकिन जो एक गीत जिसके उल्लेख के बग़ैर बच्चन साहब के गीतों की चर्चा अधूरी है, वह है फ़िल्म 'लावारिस' का "मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है"। अमिताभ बच्चन और अल्का याज्ञ्निक द्वारा अलग अलग गाये यह डबल वर्ज़न गीत लोक शैली में रचा हुआ एक हास्य गीत है जिसमें पत्नी की अलग अलग शारीरिक रूप को हास्य व्यंग के द्वारा दर्शाया गया है। अमिताभ बच्चन वाले वर्ज़न में अमित जी ख़ुद ही महिला का भेस धारण कर इन अलग अलग शारीरिक रूपों को दर्शाते हैं जिससे इस गीत को सुनने के साथ साथ देखना भी अत्यावश्यक हो जाता है। 'लावारिस' के संगीतकार थे कल्याणजी-आनंदजी, जिन्होंने कई अभिनेताओं से गीत गवाये हैं। जब उनसे इसके बरे में पूछा गया था 'विविध भारती' के 'उजाले उनकी यादों के' कार्यक्रम में, तब उन्होंने कहा था, "इत्तेफ़ाक़ देखिये, शुरु शुरु में पहले ऐक्टर्स ही गाया करते थे। एक ज़माना वो था जो गा सकता था वो ही हीरो बन सकता था। तो वो एक ट्रेण्ड सी चलाने की कोशिश की जब जब होता था, जैसे राइटर जितना अच्छा गा सकता है, अपने वर्ड्स को इम्पॊर्टैन्स दे सकता है, म्युज़िक डिरेक्टर नहीं दे सकता, जितना म्युज़िक डिरेक्टर दे सकता है कई बार सिंगर नहीं दे सकता, एक्स्प्रेशन-वाइज़, सब कुछ गायेंगे, अच्छा करेंगे, लेकिन ऐसा होता है कि वो सैटिस्फ़ैक्शन कभी कभी नहीं मिलता है कि जो हम चाहते थे वो नहीं हुआ। तो ये हमने कोशिश की, जैसे कि बहुत से सिंगरों ने गाया भी, कुछ कुछ लाइनें भी गाये, बहुत से कॊमेडी कलाकारों नें भी गाये, लेकिन बेसिकली जो पूरे गाने गाये, वो अमिताभ बच्चन जी थे, मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है"। तो आइए सुना जाये इस अनोखे सदाबहार गीत को जिसे लिखा है अंजान साहब नें।



क्या आप जानते हैं...
कि अमिताभ बच्चन को चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार और १४ बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वो भारतीय संसद के निर्वाचित सदस्य भी रहे १९८४ से १९८७ के बीच।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 7/शृंखला 14
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - इस युगल गीत में किशोर दा की भी आवाज़ है.

सवाल १ - किस बड़ी अभिनेत्री ने अपने लिए पार्श्वगायन किया है यहाँ - १ अंक
सवाल २ - परदे पर इस अभिनेत्री के साथ कौन दिखते है अभिनय करते - २ अंक
सवाल ३ - गीतकार कौन हैं - ३ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
दरअसल अमित जी का पहला उत्तर गलत था, गुड्डी में धर्मेन्द्र की भूमिका अतिथि की थी, समित ने अमिताभ वाला रोल उनसे छिना था, खैर किसी और ने इसका सही जवाब नहीं दिया और खुद अमित जी ने ही अंततः समित का नाम लिया तो ३ अंक के हकदार वो ही हुए, हिन्दुस्तानी जी और शरद जी भी सही निकले. अनजाना जी कहाँ गायब रहे.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

6 comments:

अमित तिवारी said...

गीतकार- GULSHAN BAWRA

Anjaana said...

Lyrics : Gulshan Baawra

Prateek Aggarwal said...

Randheer Kapoor

हिन्दुस्तानी said...

रणधीर कपूर

शरद तैलंग said...

Hema Malini

शरद तैलंग said...

IPL Match dekhne ke chakkar mein bhool gaya tha ki aaj pahelee aanee hai

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