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अल्बम - इट्स रोक्किंग


ALBUM # ITS ROCKING







तू रुबुरु - गायक : बिस्वजीत, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

आवारा दिल - गायक : सुबोध साठे, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : सुभोजित

बेंतेहा - गायक/गीतकार/संगीत - सुदीप यशराज

खुशमिजाज़ मिटटी - गायक : सुबोध साठे, गीतकार : गौरव सोलंकी, संगीत : सुबोध साठे

ओ मुनिया - गायक : जे ऍम सोरेन, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : जे ऍम सोरेन

डरना झुकना - गायक : जोगी सुरेंदर, अमन कौशल, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : पेरुब

उड़ता परिंदा - गायक/गीतकार/संगीत : सुदीप यशराज

महिया - बैंड : आवारा MUHAMMAD WALEED MUSTAFA:Lead vocalist,Rhythm guitarist,Lyrics writer
AFFAN QURESHI:Lead guitarist,back vocalist
WAQAS QADIR BALOCH:Drummer,basses

बुलबुला - गायक : ह्रिचा देबराज, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : बालमुरली बालू

धडका (UNPLUGGED) - गायक : कुहू गुप्ता, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : विक्रमादित्य मौर्या

शामियाने - गायक : कृष्ण राज कुमार, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : कृष्ण राजकुमार

नसीमे सुबह - गायक : रमेश चेलामनी, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : रमेश चेलामनी

जनाबे जाना - गायक : अमन कौशल, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : पेरुब

लौट चल - गायक : कृष्ण राजकुमार, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

धडका - गायक : कुहू गुप्ता, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : विक्रमदित्य मौर्या

जनाबे जाना - गायक : जोगी सुरेंदर, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत पेरुब

तू ही तो है - गायक : सागर पाटिल, गीतकार : प्रदीप पाठक, संगीत : सागर पाटिल

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महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

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