Tuesday, July 17, 2012

ख्वाब क्यों ???...कविताओं में जवाब तलाशता एक सवाल

शब्दों की चाक पर - एपिसोड 07

शब्दों की चाक पर हमारे कवि मित्रों के लिए हर हफ्ते होती है एक नयी चुनौती, रचनात्मकता को संवारने  के लिए मौजूद होती है नयी संभावनाएँ और खुद को परखने और साबित करने के लिए तैयार मिलता है एक और रण का मैदान. यहाँ श्रोताओं के लिए भी हैं कवि मन की कोमल भावनाओं उमड़ता घुमड़ता मेघ समूह जो जब आवाज़ में ढलकर बरसता है तो ह्रदय की सूक्ष्म इन्द्रियों को ठडक से भर जाता है. तो दोस्तों, इससे पहले कि  हम पिछले हफ्ते की कविताओं को आत्मसात करें, आईये जान लें इस दिलचस्प खेल के नियम - 


1. कार्यक्रम की क्रिएटिव हेड रश्मि प्रभा के संचालन में शब्दों का एक दिलचस्प खेल खेला जायेगा. इसमें कवियों को कोई एक थीम शब्द या चित्र दिया जायेगा जिस पर उन्हें कविता रचनी होगी...ये सिलसिला सोमवार सुबह से शुरू होगा और गुरूवार शाम तक चलेगा, जो भी कवि इसमें हिस्सा लेना चाहें वो रश्मि जी से संपर्क कर उनके फेसबुक ग्रुप में जुड सकते हैं, रश्मि जी का प्रोफाईल यहाँ है.


2. सोमवार से गुरूवार तक आई कविताओं को संकलित कर हमारे पोडकास्ट टीम के हेड पिट्सबर्ग से अनुराग शर्मा जी अपने साथी पोडकास्टरों के साथ इन कविताओं में अपनी आवाज़ भरेंगें. और अपने दिलचस्प अंदाज़ में इसे पेश करेगें.

3. हमारी टीम अपने विवेक से सभी प्रतिभागी कवियों में से किसी एक कवि को उनकी किसी खास कविता के लिए सरताज कवि चुनेगें. आपने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से ये बताना है कि क्या आपको हमारा निर्णय सटीक लगा, अगर नहीं तो वो कौन सी कविता जिसके कवि को आप सरताज कवि चुनते. 

चलिए अब लौटते हैं अनुराग शर्मा और अभिषेक ओझा की तरफ जो आज आपके लिए लेकर आये हैं एक सवाल और उसके कुछ उलझे सुलझे जवाब. आज के कार्यक्रम की स्क्रिप्ट लिखी है हमारे प्लेबैक इंडिया के प्यारे सदस्य विश्व दीपक ने. तो दोस्तों सुनिए सुनाईये और छा जाईये...

(नीचे दिए गए किसी भी प्लेयेर से सुनें)





या फिर यहाँ से डाउनलोड करें 

14 comments:

Shaifali said...

अनुरागजी और अभिषेकजी की आवाज में इतनी सौम्यता है की 'ख्वाब क्यों', इस शीर्षक से लिखी कवितायेँ किसी ख्वाब के सच होने जैसी उमंग नस-नस में भर रही है. समयाभाव के कारण मैं सभी की कवितायेँ पेज पर नहीं पढ़ पाई, लेकिन इतनी अद्भुत आवाज में कवितायेँ सुनकर दिल खुश हो गया, और फिर सारी कवितायेँ मैंने पढ़ ली :) . मेरी कविता को आवाज देने के लिए हार्दिक धन्यवाद. अपनी ही कविता को एक नए भाव से सुना. बहुत अच्छा लगा. सभी कवियों को बधाई और आदरणीय रश्मिजी, अनुरागजी और अभिषेकजी को धन्यवाद.

Rajesh Kumari said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति आवाज में कोई व्यवधान नहीं एक दम स्पष्ट अनुराग जी और अभिषेक जी की कमाल की प्रस्तुति सभी कवियों की बेहतरीन प्रविष्टियाँ आप सभी को बधाई आज की सरताज कवयित्री सरस्वती माथुर जी को बहुत बहुत हार्दिक बधाई

The Serious Comedy Show. said...

saraswati mathur jee ko haardik badhaee.anurag abhishek dway ko bhee khoobsoorat bhaavpoorna prastutee ke liye bahut bahut dhanyawaad......anokha ehsaas hai.....pahlee baar apnee kavita sun raha hoon.

रंजू भाटिया said...

बहुत बढ़िया .सरस्वती जी को बहुत बहुत बधाई ...कविता को यूँ धीमे धीमे संगीत और बढ़िया स्क्रिप्ट के साथ सुनना अदभुत लगा ..बधाई एक बार फिर से पूरी टीम को ...

रश्मि प्रभा... said...

शानदार ..... विश्व दीपक जी से आरम्भ ... सब ख़्वाबों के खूबसूरत हकीकत से लगे
सरस्वती जी को बहुत बहुत बधाई

Anonymous said...

डॉ सरस्वती का कहना है ...... सजीवजी , अनुरागजी, अभिषेक जी व् रश्मि जी बहुत बहुत आभार मेरी कविताओं को शब्दों की चाक में शामिल करके उन्हें पसंद करने के लिए ! पूरे हफ्ते अनुरागजी व् अभिषेक जी की आवाज को सुनने की अकुलाहट रहती है, बैचनी से इंतज़ार रहता है, और इतने सुंदर तरीके से उनका प्रस्तुतीकरण होता है की देर तक उनकी आवाज़ की गूँज मन में रहती है ...बार बार सुनने का मन होता है ...पूरी टीम को बहुत- बहुत बधाई ! मेरा आभार भी स्वीकारें ..डॉ सरस्वती माथुर

नीलिमा शर्मा said...

Bahut bahut shukriya is team ko ........yeh teesra mouka hai jab meri kavita ko swar diya gya ........ hats off to u all

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

आपका यह प्रयास बेहद सराहनीय है ... जिसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है ... आभार


कल 18/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.
आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


'' ख्वाब क्यों ???...कविताओं में जवाब तलाशता एक सवाल''

vandan gupta said...

सरस्वती जी को बहुत बहुत बधाई…………बेहद उम्दा प्रयास है पूरी टीम बधाई की पात्र है।

मुकेश कुमार सिन्हा said...

badhai ........ specially Saraswati jee ko:)

Disha said...

bahut hi sundar prastuti

sunita yadav said...

wow!!!!!!!!!!!!!awesome !!!!!



ख्वाब देखो कि अनंत जीवन के राही हो ...जिओ ऐसे कि आज ही मरण हो ..
ख्वाब ऐसे देखो कि चांदनी में राह मिल जाए
सजा ऐसे पाओ कि सुबह आप को पहले नजर आ जाए:-)

वाणी गीत said...

शब्दों की चाक पर उगल रहे शब्द अनुरागजी और अभिषेक जी की आवाज़ में रंग रहे हैं ...
खूबसूरत गीत के साथ प्रस्तुति बहुत बेहतरीन बन पड़ी है .
सरस्वती जी को बहुत- बहुत बधाई
शुभकामनायें !

poonam said...

khubsurat

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