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चंदा चांदनी में जब चमके...गीता दत्त और गीता बाली का अनूठा संगम

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 278

राग सांकला जी के चुने हुए गीता दत्त के गाए गानें इन दिनों आप सुन रहे हैं 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की ख़ास लघु शृंखला 'गीतांजली' के अन्तर्गत। आज के अंक में गीता दत्त गा रहीं हैं गीता बाली के लिए। जी हाँ, वही गीता बाली जिनकी थिरकती हुई आँखें, जिनके चेहरे के अनगिनत भाव, जिनकी नैचरल अदाकारी के चर्चे आज भी लोग करते हैं। और इन सब से परे यह कि वो एक बहुत अच्छी इंसान थीं। गीता बाली का जन्म अविभाजित पंजाब में एक सिख परिवार में हुआ था। उनका असली नाम था हरकीर्तन कौर। देश के बँटवारे के बाद परिवार बम्बई चली आई और गरीबी ने उन्हे घेर लिया। तभी हरकीर्तन कौर बन गईं गीता बाली और अपने परिवार को आर्थिक संकट से उबारा एक के बाद एक फ़िल्म में अभिनय कर। बम्बई आने से पहले उन्होने पंजाब की कुछ फ़िल्मों में नृत्यांगना के छोटे मोटे रोल किए हुए थे। कहा जाता है कि जब किदार शर्मा, जिन्होने गीता बाली को पहला ब्रेक दिया, पहली बार जब वो उनसे मिले तो वो अपने परिवार के साथ किसी के बाथरूम में रहा करती थीं। किदार शर्मा ने पहली बार गीता बाली को मौका दिया १९४८ की फ़िल्म 'सुहाग रात' में। और इसी फ़िल्म से शुरु हुआ गीता बाली और गीता रॉय का साथ। गीता बाली और गीता दत्त, दोनों ने ही यह साबित किया कि दर्दीले और चुलबुले, दोनों तरह के किरदार और गीत गानें में वो अपनी अपनी जगह पारंगत हैं। १९५१ में गुरु दत्त की पहली हिट फ़िल्म 'बाज़ी' से गीता बाली एक नामचीन अदाकारा बन गईं। देव आनंद ने इस फ़िल्म के बारे में कहा था कि "People came repeatedly to theatres to see Geeta's spirited dancing to "tadbeer se bigdi hui taqdeer bana de". This cemented the bonding between Geeta Bali and Geeta Roy!" शम्मी कपूर गीता बाली की ज़िंदगी में आए जब वे दोनों 'मिस कोका कोला' और 'कॊफ़ी हाउस' जैसी फ़िल्मों में साथ साथ काम कर रहे थे। दोनों ने आगे चलकर शादी कर ली, लेकिन बहुत जल्द गीता बाली इस दुनिया से गुज़र गईं। उस वक़्त शम्मी कपूर 'तीसरी मंज़िल' फ़िल्म में काम कर रहे थे।

गीता बाली की थोड़ी चर्चा हमने की, और अब बारी है आज के गाने की। गीता दत्त की आवाज़ में पेश है गीता बाली पर फ़िल्माया फ़िल्म 'मुजरिम' का गीत "चंदा चांदनी में जब चमके"। वैसे आपको बता दें कि इस फ़िल्म में शम्मी कपूर की नायिका थीं रागिनी; गीता बाली तो बस होटल डान्सर की भूमिका में केवल इसी आइटम सॊंग् में नज़र आईं। इस गीत में गीता बाली को बर्मीज़ लुक्स दिए गए, जिस तरह से हेलेन दिखती थीं। बहुत ही खुशमिजाज़ गीत है और एक बार फिर से ओ. पी. नय्यर साहब की धुन, लेकिन इस बार गीतकार हैं मजरूह सुल्तानपुरी। इस गीत का शुरुआती संगीत काफ़ी हद तक हमें याद दिलाती है "मेरा नाम चिन चिन चू" के शुरुआती संगीत का। तो दोस्तों, आइए गीत को सुना जाए, पिछले दो गीतों की तरह आज भी बारी है झूमने की। गीता दत्त की आवाज़ में इस तरह के गानें इतने अच्छे लगते हैं कि सच में दिल झूम उठता है। ५० के दशक में नय्यर साहब ने बहुत से इस तरह के गानें गीता दत्त से गवाए हैं, जिनमें से बहुत से गानें आज कहीं से बिल्कुल सुनाई नहीं देते हैं। और आज का गीत उन्ही में से एक है। लेकिन पराग जी के प्रयास का नतीजा है कि आज हम इस गीत को एक बार फिर से जी रहे हैं। आइए सुनते हैं।



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा अगला (अब तक के चार गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी (दो बार), स्वप्न मंजूषा जी, पूर्वी एस जी और पराग सांकला जी)"गेस्ट होस्ट".अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. एक नेपाली इसाई परिवार में जन्मी अभिनेत्री हैं ये जिन पर ये गीत फिल्माया गया है.
२. वो गायिका के भाई थे जिन्होंने इस गीत को संगीत से सजाया.
३. इस युगल गीत के मुखड़े की अंतिम पंक्ति में शब्द है -"कमल".इस पहेली को बूझने के आपको मिलेंगें २ की बजाय ३ अंक. यानी कि एक अंक का बोनस...पराग जी इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकेंगें.

पिछली पहेली का परिणाम -
इंदु जी, एक बार फिर आपने पाबला जी को मात देकर बाज़ी मार ली, २१ अंकों के लिए बधाई, पराग जी....आपकी बात सर आँखों पर...सही कहा आपने, सच्चाई यही है.

खोज - पराग सांकला
आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

Comments

indu puri said…
फिल्म-डिटेक्टिव (1958 )
म्यूजिक-मुकुल रॉय
गायकहेमंत कुमार,गीता दत्त
गीत-मुझ को तुम जो मिले ये जहाँ मिल गया
तुम जो मेरे दिल में हंसे दिल का कमल खिल गया
ये गीत माला सिन्हा और प्रदीप कुमार पर फिल्माया गया था
पर....बाप रे .......छका दिया
indu puri said…
फिल्म-डिटेक्टिव (1958 )
म्यूजिक-मुकुल रॉय
गायकहेमंत कुमार,गीता दत्त
गीत-मुझ को तुम जो मिले ये जहाँ मिल गया
तुम जो मेरे दिल में हंसे दिल का कमल खिल गया
ये गीत माला सिन्हा और प्रदीप कुमार पर फिल्माया गया था
पर....बाप रे .......छका दिया
बी एस पाबला said…
वाह इंदु जी बधाई!

लीजिए यह हैं बोल:
हेमंत: मुझ को तुम जो मिले ये जहान मिल गया
गीता: तुम जो मेरे दिल में हँसे दिल का कमल देखो खिल गया

हेमंत: आ ऽ ये भीगती हुई फ़िज़ा, बरस रही है चाँदनी
गीता: तारों ने मिल के छेड़ दी मधुर मिलन की रागिनी
हेमंत: लेके क़रार आया है प्यार, क्या है अगर मेरा दिल गया
दोनों: मुझ को तुम जो मिले ये जहान मिल गया

गीता: आ ऽ देखते चल रहे हैं हम है प्यार का ये रास्ता
हेमंत: चाँद और सितारों का, बहार का ये रास्ता
गीता: लेके क़रार आया है प्यार, क्या है अगर मेरा दिल गया
दोनों: मुझ को तुम जो मिले ये जहान मिल गया

हेमंत: आ ऽ मेरे सुहाने ख़्वाब, कि तुम मेरे सामने रहो
गीता: ऐसी हसीन रात है दिल ये कहे सहर न हो
हेमंत: लेके क़रार आया है प्यार, क्या है अगर मेरा दिल गया
दोनों: मुझ को तुम जो मिले ये जहान मिल गया
तुम जो मेरे दिल में हँसे दिल का कमल देखो खिल गया

यह है
ऑडियो

यह है
वीडियो

यह है गीता दत्त के
भाई की जानकारी

यह है माला सिन्हा के जनम की कथा:
माला सिन्हा अल्बर्ट सिन्हा की बेटी थी। जनम कोलकाता में 11 नवम्बर 1936 को हुआ। उनके जन्म का नाम था Alda लेकिन दोस्त उसे Dalda के रूप में बुलाया करते थे तो वह उनका नाम बदल दिया गया।

बी एस पाबला
Parag said…
वाह वाह पाबला जी, पहेली तो इंदु जी ने जीती है, आपने भी संगीत प्रेमियोंका दिल जीता है.
आभारी
पराग
बी एस पाबला said…
धन्यवाद पराग जी,
यह आप सभी साथियों के स्नेह का ही परिणाम है।

बी एस पाबला
indu puri said…
early morning hi result declare kar diya ?
very bad !
thodi der aur suspense me rahne dete parag babu result ko

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