Tuesday, August 10, 2010

सलीम-सुलेमान की आशाएँ ढल गई हैं धीमी गति के प्रेरक गीतों में.. साथ हैं प्रीतम और शिराज़ भी

ताज़ा सुर ताल ३०/२०१०

सुजॊय - 'ताज़ा सुर ताल' के सभी श्रोताओं व पाठकों को हमारा प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, इसे इत्तेफ़ाक़ ही कहिए या कुछ और, हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री में कुछ नायक ऐसे हुए हैं जिनकी फ़िल्मों के गानें हमेशा ही सुपरहिट हुआ करते हैं। जैसे कि राजेश खन्ना की शायद ही कोई फ़िल्म ऐसी होगी जिसके गानें चले ना हों। नए दौर में सलमान ख़ान ऐसे नायक बनें जिनकी फ़िल्मों के गानें बेहद लोकप्रिय होते आए हैं और आज भी होते हैं। ऐसे ही एक और अभिनेता हैं जॊन एब्राहम जिनकी फ़िल्मों का संगीत भी चलता आया है, फिर चाहे फ़िल्म चले या ना चले।

विश्व दीपक - 'जिस्म', 'साया', 'धूम', 'सलाम-ए-इश्क़', 'काल', 'गरम मसाला', 'दोस्ताना', 'गोल', 'न्यू यार्क', 'पाप', 'टैक्सी नंबर ९ २ ११', ये सारी जॉन की फ़िल्में संगीत के लिहाज़ से सफल ही मानी जाएंगी। आज हम जॉन की नई फ़िल्म 'आशाएँ' के गानें लेकर उपस्थित हुए हैं, और इन गीतों को सुनने के बाद हमें और आपको मिलकर यह निर्णय लेना है कि क्या जॉन की पिछली सारी फ़िल्मों के संगीत की तरह इस फ़िल्म के संगीत पर भी 'हिट सुपरहिट' की मोहर लगाई जा सकती है या नहीं।

सुजॊय - सब से पहले तो फ़िल्म के शीर्षक की बात करेंगे। परसेप्ट पिक्चर कंपनी के बैनर तले बनी इस फ़िल्म को लिखा व निर्देशित किया है नागेश कुकुनूर ने। अब आप समझ गए होंगे कि हमने फ़िल्म के शीर्षक का ज़िक्र क्यों किया। जी हाँ, नागेश की मशहूर फ़िल्म 'इक़बाल' के मशहूर गीत "आशाएँ खिले दिल की" से इस फ़िल्म का शीर्षक प्रेरित है।

विश्व दीपक - जॉन एब्राहम के अलावा इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं नवोदित अभिनेत्री सोनल सहगल (जो हिमेश भाई के साथ उनकी फ़िल्म रेडियो में भी दिखी थीं), गिरिश कारनाड, फ़रीदा जलाल, आश्विन चितले, अनिता नायर प्रमुख। श्रेयस तलपडे का भी एक गेस्ट अपीयरेन्स है फ़िल्म में। पॉण्डिचेरी और हैदराबाद के लोकेशन्स पर फ़िल्माये गये इस फ़िल्म के लिए जॉन को १६ किलो का वज़न कम करना पड़ा है ऐसा सुनने में आया है। ये तो थे फ़िल्म से जुड़े कुछ तथ्य, आइए अब गीतों का सिलसिला शुरु किया जाए। फ़िल्म में कुल ८ गीत हैं और ५ रीमिक्स ट्रैक्स।

सुजॊय - 'स्ट्राइकर' और 'राजनीति' की तरह 'आशाएँ' में भी एकाधिक संगीतकार हैं, मुख्य संगीतकार हैं सलीम-सुलेमान, जिन्होंने फ़िल्म का पार्श्व संगीत भी तय्यार किया है। और जो दूसरे संगीतकार हैं, वो हैं प्रीतम (२ गीत) और शिराज़ उप्पल (१ गीत)। गीतकार हैं मीर अली हुसैन, समीर, कुमार और शक़ील सोहैल। तो आइए सुनते हैं पहला गीत नीरज श्रीधर की आवाज़ में। नीरज का नाम देख कर आप समझ ही गए होंगे कि इसके संगीतकार हैं प्रीतम। इस गीत को समीर ने लिखा है।

गीत - मेरा जीना है क्या


विश्व दीपक - नीरज श्रीधर और प्रीतम की जोड़ी जिस तरह के गानें हमें देती आई है आज तक (हरे राम हरे राम, प्रेम की नैय्या, तुम मिले, वगेरह), उससे कुछ अलग हट के है यह गीत। गीत शुरु होता है नर्मोनाज़ुक अंदाज़ में, लेकिन बाद में रॉक शैली आ जाती है। नीरज की आवाज़ अच्छी बैठी है इस गीत में लेकिन यह गीत तो के.के वाला गीत है बिल्कुल। आजकल इस गीत को ख़ूब टीवी पर दिखाया जा रहा है फ़िल्म के प्रोमो में। और नीरज और उस प्रोमो में प्रीतम भी नज़र आ रहे हैं रॉक सिंगर्स की तरह।

सुजॊय - मुझे यह गीत अच्छा ही लगा, लेकिन मेरा भी ख़याल है कि के.के की आवाज़ में गीत और ज़्यादा खुल कर सामने आता। ख़ैर, नीरज ने भी अच्छा निभाया है। आगे बढ़ते हैं दूसरे गीत की तरफ़, और अब की बार गीतकार कुमार के बोल, प्रीतम का ही संगीत, और इसे गाया है शान और तुलसी कुमार ने। एक सुरीले मेलोडियस युगल गीत की उम्मीद हम ज़रूर रख सकते हैं, क्यों? आइए ख़ुद सुनते हैं और फिर निर्णय लेते हैं।

गीत - दिलकश दिलदार दुनिया


सुजॊय - अनुप्रास अलंकार!!! लेकिन जिस तरह के मेलोडियस नर्मोनाज़ुक रोमांटिक युगल गीत की कल्पना मैंने की थी, वैसा नहीं पाया। मैंने तो सोचा था कि "तेरी ओर" और "ख़ुदा जाने" जैसा कुछ सुनने को मिलेगा। लेकिन इस गीत का अंदाज़ कुछ अलग सा है। शान की आवाज़ भी कुछ बदली हुई-सी लगी। तुल्सी कुमार की आवाज़ में तो मुझे कभी कोई ख़ास बात नज़र नहीं आई। ग़लत अर्थ ना निकालें तो मैं यही कहूँगा कि तुलसी कुमार जैसी आवाज़ और गायकी तो हर रियल्टी शो में सुनने को मिल जाती है। इस आवाज़ में ख़ास बात क्या है कोई मुझे समझाए ज़रा!

विश्व दीपक - इस गीत के बारे में इतना ही कहूँगा कि कम्पोजिशन अच्छा है, बीट बेस्ड सॉंग है, ठीक ठाक गीत है। लेकिन प्रीतम से हम कुछ और बेहतर उम्मीद रखते हैं, ख़ास कर रोमांटिक नर्मोनाज़ुक गीतों में। चलिए अब बढ़ते हैं तीसरे गीत की ओर। प्रीतम के बाद अब है शिराज़ उप्पल की बारी। उन्होंने ना केवल इस गीत को स्वरबद्ध किया है, बल्कि शक़ील सोहैल के लिखे इस गीत को ख़ुद गाया भी है। सुनते हैं "रब्बा"।

गीत - रब्बा


विश्व दीपक - गायक-संगीतकार शिराज़ उप्पल पाक़िस्तान से ताल्लुक़ रखते हैं। गाना तो अच्छा ही बना है, धुन भी अच्छी है, गाया भी ठीक-ठाक है, लेकिन पता नहीं क्यों इस गीत ने कोई आस असर नहीं छोड़ा। बस यही कह सकता हूँ कि "रब्बा ये क्या हुआ"।

सुजॊय - यह शायद इसलिए भी हो सकता है कि शिराज़ की आवाज़ में ऊँचे नोट्स वाले गीत ज़्यादा अच्छे लगते हैं। नीचे सुर के गीतों में उनकी आवाज़ खुल के बाहर नहीं आती। इस गीत के बारे में यही कहूँगा कि शक़ील सोहैल ने अच्छा कलम चलाया है।

विश्व दीपक - अच्छा, हमने तीन गीत सुनें, अब से अगले पाँच गीतों में संगीत सलीम सुलेमान का है और गीतकार हैं मीर अली हुसैन। सुनते हैं इस गीतकार-संगीतकार जोड़ी की पहली रचना ज़ुबीन की आवाज़ में।

गीत - अब मुझको जीना


सुजॊय - यह आशावादी और प्रेरणादायक गीत था। ज़ुबीन आसाम से ताल्लुक़ रखते हैं और वहाँ पर ख़ूब लोकप्रिय हैं। हिंदी में प्रीतम ने उनसे फ़िल्म 'गैंगस्टर' में "या अली रहम अली" गवाया था जो बहुत लोकप्रिय हुआ था। इस गीत को भी उन्होंने पूरे जोश के साथ गाया है। ज़ोरदार ऑरकेस्ट्रेशन और क़दमों को थिरकाने वाला गीत है। पिछले तीन गीत भी अच्छे थे लेकिन कुछ ना कुछ कमी लग रही थी उनमें। इस गीत को सुन कर एक ताज़गी जैसी आ गई, बहुत ही खुल कर यह गीत आया है और सही में गीत अच्छा है।

विश्व दीपक - इस गीत की शुरुआत में कुछ कुछ 'Summer of 69' जैसा लगा, फिर गीत ने तेज़ गति पकड़ ली और अपनी अलग राह पकड़ कर अपने मुक़ाम तक पहुँच गई। ज़ुबीन गर्ग की आवाज़ में एक अलग कशिश है और भीड़ से अलग सुनाई देती है। उनसे और भी ज़्यादा गानें संगीतकार गवा सकते हैं। 'आशाएँ' फ़िल्म का पाँचवा गीत है शफ़ाक़त अमानत अली की आवाज़ में, "शुक्रिया ज़िंदगी"। आइए गीत सुनते हैं, फिर बात करते हैं।

गीत - शुक्रिया ज़िंदगी


सुजॊय - ज़िंदगी का शुक्रिया अदा करता हुआ यह गीत सुन कर हम सलीम सुलेमान, मीर अली हुसैन और शफ़ाक़त अमानत अली का शुक्रिया अदा ही कर सकते हैं। "छन के आई तो क्या चांदनी तो मिली" जैसे अन्योक्ति अलंकार में सजकर यह गीत ज़िंदगी के प्रति आशावादी होने की प्रेरणा देती है। मुझे तो यह गीत सुनते हुए फ़िल्म 'सदमा' का वो मशहूर याद गया कि "ऐ ज़िंदगी गले लगा ले, हमने भी तेरे हर एक ग़म को गले से लगाया है, है न"।

विश्व दीपक - बेहद ख़ूबसूरत बोल लिखे हैं मीर अली हुसैन ने। मुझे तो लग रहा है कि अच्छे गीतकारों और अच्छे बोल वाले गीतों का ज़माना वापस आ गया है। पिछले कुछ समय से निम्न स्तर के बोल वाले गानें बहुत ही कम हो गए हैं। क्या फ़िल्म संगीत एक बार फिर से करवट ले रहा है?

सुजॊय - काश ऐसा हो जाए, और फ़िल्म संगीत का एक और सुनहरा दौर आ जाए तो मज़ा आ जाए! शफ़ाक़त अमानत अली के बाद अब बारी है श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज़ की। "पल में मिला जहाँ" श्रेया की मधुर आवाज़ में ढलकर बेहद सुरीला सुनाई देता है, आइए सुनते हैं।

गीत - पल में मिला जहां (श्रेया)


विश्व दीपक - श्रेया की नर्म आवाज़ में बिना किसी साज़ के जैसे ही "पल में मिला जहां" शुरु होता है, गीतकार किस ख़ूबसूरती से हर पंक्ति की शुरुआत "पल में" से करके "पल में" पर ही ख़त्म करते हैं, गीत को सुन कर महसूस किया जा सकता है।

पल में मिला जहां, है धुआँ पल में,
पल में यक़ीन था, अब गुमां पल में,
पल में उम्मीद थी, अरमां पल में,
पल में बहार थी, अब ख़िज़ाँ पल में।

सुजॊय - गीत में कम से कम साज़ों का इस्तेमाल हुआ है, जिस वजह से श्रेया को काफ़ी मेहनत करनी पड़ी होगी क्योंकि पूरा दायित्व उनकी गायकी पर आ गया है। गीत तो निस्संदेह उत्कृष्ठ है, लेकिन देखना यह है कि आज के जेनरेशन के कितने लोगों को इस गीत को पूरा सुनने का धैर्य रहेगा। इसी गीत का एक पुरुष संस्करण भी है शंकर महादेवन की आवाज़ में, आइए लगे हाथ इसे भी सुन लिया जाए।

गीत - पल में मिला जहां (शंकर)


विश्व दीपक - इन दोनों संस्करणों को सुन कर कह पाना मुश्किल है कि कौन सा बेहतर है। शंकर ने ज़्यादा ज़ोर डाल कर गाया है। शंकर एक ऐसे गायक और संगीतकार हैं जिन्हे हर संगीतकार पसंद करते हैं, उनकी गायकी के साथ साथ उनके मीठे स्वभाव के कारण भी। तभी तो दूसरे संगीतकार उनसे समय समय पर गवाते रहते हैं। हाल ही में फ़िल्म 'राजनीति' में "धन धन धरती रे" उन्होंने गाया था।

सुजॊय - और आठवें और अंतिम गीत की बारी जिसे गाया है मोहित चौहान ने। एक और धीमी गति वाला गीत जिसमें है रोमांस, लेकिन गभीरता के साथ। "चला आया प्यार" में परक्युशन का सुंदर इस्तेमाल हुआ है।

विश्व दीपक - तबले का भी सुंदर इस्तेमाल सुनाई देता है। आम तौर पर फ़्युज़न गीतों में गीत देसी होता है, सुर देसी होते हैं और बीट्स विदेशी होते हैं; लेकिन इस गीत में गायकी और गीत की धुन आधुनिक है, लेकिन जो रीदम है उसे तबले की थापों पर शास्त्रीय अंदाज़ में तय्यार किया गया है जिससे एक नवीनता आई है गाने में। सुना जाए...

गीत - चला आया प्यार


इन आठ गीतों को सुन कर हमारी तरफ़ से तो थम्प्स अप है। हाँ, गानें ज़रा धीमी लय के और गहरे शब्दों वाले हैं। आख़िर नागेश कुकुनूर की फ़िल्म है, उसमें कुछ गहरी बातें तो होंगी। अभी हाल ही में इस फ़िल्म की टीम (जॉन, सोनल सहगल और नागेश कुकुनूर) इण्डियन आइडल में गेस्ट बन कर आए थे अपनी इस फ़िल्म को प्रोमोट करने के लिए। उसमें इन लोगों ने कहा कि यह फ़िल्म लीक से हट कर है और कम बजट की फ़िल्म है। लेकिन यह लोगों के दिलों को ज़रूर छूएगी। फ़िल्म के गीतों ने तो हमारे दिल को छुआ है, देखना है कि फ़िल्म किस तरह का कमाल दिखाती है। हमारी तरफ़ से इस फिल्म को लाखों दुआएँ!

ढर्रे के अनुसार हमें यह भी तो बताना होगा कि अगली बार हम किस फिल्म की समीक्षा लेकर हाज़िर होने वाले हैं। तो दोस्तों, अभी हमारे सामने दो फिल्में हैं - "वी और फ़ैमिली" और "दबंग"। अब कौन सी फिल्म किस्मत वाली साबित होगी, यह तो वक़्त हीं बताएगा। हाँ, अगर आप इन दोनों में से किसी एक को खासा-पसंद करते हैं तो टिप्पणी में इसका ज़िक्र जरूर कर दें। हम आपकी राय का पूरा ख्याल रखेंगे। वैसे अंतिम निर्णय तो हमारा है काहे कि हम तो ठहरे दबंग :)

आवाज़ रेटिंग्स: आशाएँ: ***१/२

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ८८- ये गुलशन कुमार की सुपुत्री हैं और इस कारण भी संगीत की दुनिया में इनका नाम है। पिछले दिनों आई फिल्म "वन्स अपॉन ए टाईम इन मुंबई" में भी इन्होंने एक गाना गाया था। २००९ में रीलिज हुई इनके डेब्यु एलबम का नाम बताईये।

TST ट्रिविया # ८९- नागेश कुकुनूर की उस फ़िल्म का नाम बताएँ जिसमें दोस्ती को समर्पित एक गाना था। वह गाना किसने गाया था?

TST ट्रिविया # ९०- "फ़ना" के गीत "चाँद सिफ़ारिश" की प्रोग्रामिंग किस संगीतकार (संगीतकार बंधुओं) ने की थी? इसी (इन्हीं) की सलाह पर इस गाने में "शुभान-अल्लाह" डाला गया था।


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. "चरके बोदन चिरबी चकर" का इस्तेमाल हुआ है जो किशोर कुमार ने फ़िल्म 'पड़ोसन' के मशहूर गीत "एक चतुर नार" में किया था।
२. शैल हाडा।
३. "एक तीखी तीखी सी उफ़ करारी से लड़की" (लागा चुनरी में दाग)।

3 comments:

seema gupta said...

1) Tulsi Kumar
Love Ho Jaaye

seema gupta said...

3) jatin lalit

regards

seema gupta said...

2) Yaaron – Rockford (1999)

regards

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