सोमवार, 7 सितंबर 2009

फुल टू एटीटियुड, दे दे तू ज़रा....अपनी नयी आवाज़ में हिमेश बजा रहे हैं मन का रेडियो

ताजा सुर ताल (20)

ताजा सुर ताल में आज हिमेश लौटे हैं नयी आवाज़ में नए गीत के साथ

सुजॉय - सजीव, एक गायक संगीतकार ऐसे हैं आज के दौर में जिनके बारे में इतना कहा जा सकता है कि चाहे लाख विवादों से वो घिरे रहे हों, लेकिन उनके गीत संगीत हमेशा कामयाब रहे हैं। कभी उनकी टोपी पहनने की अदा को लेकर लोगों ने मज़ाक बनाया, तो कभी उनके नैसल गायिकी पर लोगों ने समालोचना की। उनके संगीत को सुन कर गुजरात के किसी गाँव में भूतों के सक्रीय हो जाने की भी ख़बर फैली थी। और एक बार तो इन्होने ख़ुद ही आफ़त मोल ली थी एक बड़े संगीतकार के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर के।

सजीव- मैं तुम्हारा इशारा समझ गया, तुम हिमेश रेशमिया की ही बात कर रहे हो ना?

सुजॉय- बिल्कुल! कहते हैं ना कि 'any publicity is good publicity', तो इन सब कारणों से हिमेश को फ़ायदा ही हुआ। वैसे भी हिमेश जानते हैं कि इस पीढ़ी के जवाँ दिलों पर किस तरह से असर किया जा सकता है। तभी तो उनकी फ़िल्में चले या ना चले, उनका संगीत ज़रूर हिट हो जाता है। शायद ही उनका कोई ऐसा फ़िल्म हो जिसके गानें कामयाब न रहे हों!

सजीव- बिल्कुल ठीक कहा तुमने। बहुत दिनों के बाद हिमेश लौटे हैं अपनी नई फ़िल्म 'रेडियो- लव ऑन एयर' के साथ, जिसमें वो एक बार फिर से नायक भी हैं, गायक भी, और संगीतकार तो हैं ही। तो इसका मतलब आज तुम हमारे श्रोताओं को इसी फ़िल्म का गीत सुनवाने जा रहे हो?

सुजॉय- जी हाँ। इस फ़िल्म में हिमेश ने एक रेडियो जॉकी की भूमिका निभाई है। क्या आप कुछ और ऐसी फ़िल्मों के नाम गिना सकते हैं जिनमें नायक या नायिका रेडियो जॉकी के रोल निभाए हैं?

सजीव- प्रीति ज़िंटा ने 'सलाम नमस्ते' में और विद्या बालन ने 'लगे रहो मुन्ना भाई' में।

सुजॉय- बिल्कुल। एक और फ़िल्म आई थी अभी दो तीन साल पहले, '99.9 FM' के शीर्षक से, जिसमें नायक एक RJ होता है। अब देखना यह है कि हिमेश भाई क्या नया हमें दिखाते हैं इस फ़िल्म में।

सजीव- हिमेश के करीयर पर अगर ग़ौर करें तो हम इसे तीन भागों में बाँट सकते हैं। पहला भाग वह है जब वो केवल संगीतकार हुआ करते थे। जैसे कि 'प्यार किया तो डरना क्या', 'जोड़ी नम्बर वन', 'क्या दिल ने कहा', 'हेलो ब्रदर', 'तेरे नाम', 'कहीं प्यार ना हो जाए', 'चोरी चोरी चुपके चुपके', 'कुरुक्षेत्र', 'दुल्हन हम ले जाएँगे', 'हमराज़', 'चुरा लिया है तुमने', 'दिल माँगे मोर', 'ऐतराज़', और भी न जाने कितनी ऐसी फ़िल्में हैं जिनका संगीत उस ज़माने में सुपर डुपर हिट हुआ था। फिर उसके बाद आया वह दौर जिसमें हिमेश ने संगीत देने के साथ साथ अपनी आवाज़ भी मिलाई और चारों तरफ़ गूँजने लगे "आशिक़ बनाया आपने" के स्वर।

सुजॉय- वाक़ई बेहद मशहूर हुआ था यह गीत, और सब से मज़ेदार बात यह कि इस पहले ही गीत के लिए हिमेश को उस साल का सर्वश्रेष्ठ संगीतकार नही बल्कि सर्वश्रेष्ठ गायक का फ़िल्म-फ़ेयर अवार्ड मिला था। इससे पहले फ़िल्म-फ़ेयर के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ था कि किसी गायक-संगीतकार को गायन के लिए यह पुरस्कार दिया गया हो। इस फ़िल्म के बाद तो हिमेश ने कई फ़िल्मों में संगीत के साथ साथ गायन भी किया जैसे कि 'अक्सर', 'टॉम डिक ऐंड हैरी', '३६ चायना टाउन', 'हेरा फेरी' वगैरह वगैरह ।

सजीव- और तीसरा हिस्सा है वह हिस्सा जिसमें संगीतकार और गायक हिमेश रेशम्मिया बन गये एक नायक भी। 'आपका सुरूर', और 'कर्ज़' के बाद अब वो नज़र आएँगे 'रेडियो- लव ऑन एयर' में। रवि अगरवाल निर्मित इस फ़िल्म में हिमेश की नायिका बनीं हैं शेरनाज़ ट्रेज़रीवाला। और क्योंकि फ़िल्म रेडियो पर है, तो रेडियो मिर्ची बनें हैं इस फ़िल्म के मुख्य पार्टनर। रेडियो मिर्ची के जीतूराज हिमेश के पसंदीदा जॊकी हैं, और उन्ही का अंदाज़ इख़्तियार किया है हिमेश ने इस फ़िल्म में।

सुजॉय- सुनने में आया है कि इस फ़िल्म के लिए हिमेश ने कुछ औपरेशन करवाए हैं जिससे कि अब वो दो अलग अलग आवाज़ों में गा सकते हैं।

सजीव- सुना तो मैने भी है। और इस फ़िल्म के शीर्षक गीत "मन का रेडियो बजने दे ज़रा" में उनकी नई आवाज़ सुनाई देती है। कोई अगर बता न दे आपको तो शायद मुखड़ा सुन कर गेस न कर पाएँ कि इसे हिमेश ने गाया है। लेकिन जैसे ही अंतरे में ऊँचे सुर में वो गाते हैं तो वही पुराना हिमेश वापस आजाते हैं।

सुजॉय- हा हा हा ...वैसे तो गीत में बहुत ख़ास कुछ नहीं है, लेकिन बार बार सुनते सुनते गीत का रीदम जब ज़हन में उतर जाता है तो दिल थिरकने लगता है। इस गीत से बिल्कुल अलग हट के एक और रेडियो पर गीत इस फ़िल्म में हिमेश ने गाया है "ज़िंदगी जैसे एक रेडियो" जो पंजाबी भांगडा और पाश्चात्य संगीत का फ़्युज़न है, जिसमें ढोल के साथ साथ हिमेश ने भी खुल के अपनी आवाज़ मिलाई है।

सजीव- लेकिन सब से लाजवाब गीत इस फ़िल्म का मुझे जो लगता है वह है श्रेया घोषाल और हिमेश के युगल स्वरों में गाया हुआ "जानेमन"। इस साल अब तक जितने भी युगल गीत आए हैं उनमें यह टॉप टेन में ज़रूर आनी चाहिए।

सुजॉय - बिल्कुल, बहुत ही नर्मोनाज़ुक गीत। मेरे एक दोस्त का कहना है कि यह गीत 'कैंडल लाइट डिनर' के लिए सटीक है। एक और गीत है रेखा भारद्वाज के साथ, "पिया जैसे लड्डू मोतीचूर वाले", जिसमें हिमेश के शास्त्रीय संगीत पर अच्छी पकड़ के सबूत मिलते हैं।

सजीव- वैसे इस एल्बम को सुनकर लगता है की हिमेश अपनी उस पुरानी शैली में कुछ कुछ वापस आये हैं... जिसमें उन्होने कुछ बहुत ही मेलोडियस नाज़ुक-ओ-तरीन रोमांटिक गीत बनाए थे.

सुजॉय- हाँ मेरा भी यही ख्याल है. अब देखना यह है कि क्या इस फ़िल्म के गानें भी 'तेरे नाम' जैसा कमाल कर दिखाएगा! सजीव, आप क्या रेटिंग्‍ दे रहे हैं इस गीत को? मेरी तरफ़ से तो ४ अंक देता हूँ।

सजीव - मेरी तरफ से है ३.५...."तेरे नाम" जैसी कामियाब इस एल्बम को मिलेगी ये कहना ज़रा मुश्किल है. पर हाँ प्रस्तुत गीत के साथ साथ "जिंदगी जैसे एक रेडियो.." और "जानेमन" गीत जरूर हिट होंगें ये तय है....फिलहाल हम अपने श्रोताओं पर छोड़ते हैं की हिमेश की तथाकथित नयी आवाज़ में गीत "मन का रेडियो..." को वो कितने अंक देते हैं....

सुजॉय - गीत के बोल कुछ ऐसे हैं -

मन का रेडियो बजने दे ज़रा,
गम को भूल कर जी ले तू ज़रा,
स्टेशन कोई नया टियून कर ले ज़रा,
फुल टू एटीटियुड, दे दे तू ज़रा,
टूटा दिल, क्या हुआ,
हो गया जो हुआ....
भूले बिसरे गीत, गा के भूल जा,
बदल जो रिधम, उस पे झूल जा,
फुल टू एटीटियुड, दे दे तू ज़रा...
मन का रेडियो...

क्या होगा क्या नहीं होगा,
उपर वाले पे छोड़ दे,
आज इस पल में तू,
जिंदगी को जी ज़रा,
तुझको आकाश की वाणी का आसरा...
टुटा दिल...

क्या खोया क्या नहीं पाया,
उसपे रोना तू छोड़ दे,
बैंड जो बजे तेरा,
खुल के तू भी साथ गा,
दर्द ही बने दवा, फंडा है ये लाइफ का....
टुटा दिल....

मन का रेडियो....


और अब सुनिए ये गीत -



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 3.75 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं.हाल ही में प्रर्दशित फिल्म "मोहनदास" एक साहित्यिक कृति पर आधारित है, कौन हैं इस मूल उपन्यास के लेखक... बताईये और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब दिया सीमा जी ने, हिमेश रेशमिया के करियर के विभिन्न आयामों से तो अब आप सब परिचित हो ही गए हैं, सीमा जी बधाई...मंजू जी, शमिख जी और विनोद जी रेटिंग देने के लिए शुक्रिया


अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

4 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

This post has been removed by the author.

seema gupta ने कहा…

Mr. uday prakash

regards

Manju Gupta ने कहा…

गीत को ३ /५ रेटिंग दूंगी .

Shamikh Faraz ने कहा…

मुझे सही जवाब मालूम था लेकिन आने में काफी देर हो गई.Udya Prakash is the writer मैं गीत को ३.५/५ दूंगा.

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