मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

मैं और मेरा साया - भूपेन दा का एक नायाब एल्बम.

बात एक एल्बम की # ०१

फीचर्ड आर्टिस्ट ऑफ़ दा मंथ - भूपेन हजारिका.
फीचर्ड एल्बम ऑफ़ दा मंथ - मैं और मेरा साया, - भूपेन हजारिका (गीत अनुवादन - गुलज़ार)


दोस्तों आज बात एक ऐसी शख्सियत की हो रही है जिनके बारे में कुछ कहने में ढेरों मुश्किलों से साक्षत्कार होना पड़ता है. इस एक शख्स में कई शख्सियत समायी हुई है ।बुद्धिजीवी संगीतकार, उत्कृष्ट गायक, सवेदनशील कवि, अभिनेता, लेखक, निर्देशक, समाज सेवक और न जाने कितने रूप. दोस्तों मै दादा साहेब फाल्के सम्मान से सम्मानित डॉक्टर भूपेन हजारिका के बारे में बात कर रहा हूँ .जब भी हिन्दी सिने जगत में लोकसंगीत की बात आएगी तो भूपेन दा के का नाम शीर्ष पर रहेगा. उन्होंने अपने संगीत के जरिये आसाम की मिट्टी की सोंधी खुश्बू कायनात में घोल दी है.


बचपन में पिता शंकर देव का उपदेश ज्यादातर गेय रूप में प्राप्त होता था. उन्ही दिनों उनके मन में संगीत ने अपना घर बना लिया और वे ज्योति प्रसाद अग्रवाल, विष्णु प्रसाद शर्मा और फणी शर्मा जैसे संगीतविदों के संपर्क में आकर लोकगीत की तालीम लेने लगे।

भूपेन दा के आवाज़ में वह बंजारापन है जो उस्तादों से लेकर आम जन -जन को अपने गिरफ्त में ले लेता हैं और अपनी आवाज़ को सबकी आवाज़ बना देता हैं। भूपेन दा की रचनाओं की वेदना की गहराई का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है जब वे एक दफ़ा नागा रिबेल्स से बात करने गए तो आपनी एक रचना 'मानुहे मनोहर बाबे' को वहां के एक नागा युवक को उन्हीं कि अपनी भाषा में अनुवाद करने को कहा और जब उन लोगों ने इस गीत को सुना तो सभी के आंखों में आँसू आ गए। भूपेन दा के इस गीत के बंगला अनुवाद 'मानुष मनुषेरे जन्में', को बी.बी.सी.की तरफ़ से 'सॉंग ऑफ द मिलेनियम,के खिताब से नवाजा गया. इस गीत के जरिये भूपेन दा का कवि रूप का चिंतन हमारे सामने आता है.

हमारे फीचर्ड आर्टिस्ट भूपेन दा पर होंगी और बातें अगले मंगलवार, फिलहाल सुनते हैं इस महीने की फीचर्ड एल्बम, "मैं और मेरा साया" से भूपेन हजारिका की आवाज़. भूपेन दा के मूल गीत का हिंदी अनुवाद किया है गुलज़ार साहब ने.



साप्ताहिक आलेख - उज्जवल कुमार



"बात एक एल्बम की" एक साप्ताहिक श्रृंखला है जहाँ हम पूरे महीने बात करेंगे किसी एक ख़ास एल्बम की, एक एक कर सुनेंगे उस एल्बम के सभी गीत और जिक्र करेंगे उस एल्बम से जुड़े फनकार/फनकारों की. इस स्तम्भ को आप तक ला रहे हैं युवा स्तंभकार उज्जवल कुमार. यदि आप भी किसी ख़ास एल्बम या कलाकार को यहाँ देखना सुनना चाहते हैं तो हमें लिखिए.


7 टिप्‍पणियां:

शोभा ने कहा…

भूपेन जी की आवाज़ में गीत बहुत अच्छा लगा। आभार।

Pradeep Kumar ने कहा…

gazab ki koshish hai . jiska bhi ye prayas hai usko tahe dil se shukriya. kaash bhoopen ji ka poora collection hi yahaan hota

shanno ने कहा…

बहुत ही, बहुत ही, बहुत ही सुंदर पहाड़ी गीत, कमाल की आवाज़ और अंदाज़. सुनते हुए जैसे मैं भी कहीं दूर ऊंचाइयों से पहाड़ियों का scene देखने लगी जहाँ ऊंची पगडंडी पर जाते हुए कहार काँधे पर डोली उठाये ले जा रहे हों और ऊपर नीचे पहाड़ी वृक्षों की हरीतिमा में पक्षियों के कलरव से वातावरण गूँज रहा हो.
आगे इस तरह के और भी गीत सुनवाते रहियेगा, please.

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

नहीं गीत में शब्द हैं, गुंथे हुए हैं भाव.

भूपेन दा हैं छोड़ते, अद्भुत 'सलिल' प्रभाव.

Partha Pratim Das ने कहा…

Being an Indian and also an Assamese I must say that Bhupenda's songs are a school of thought; it can lift us up from material world to somewhere up above.....

Anonymous ने कहा…

Great job !!

Listen more : http://bhupenhazarika-news.blogspot.com/search/label/Hindi%20Music

Anonymous ने कहा…

Excellent vioce, outstanding voice

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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