Tuesday, April 14, 2009

बहता हूँ बहता रहा हूँ...एक निश्छल सी यायावरी है भूपेन दा के स्वर में

बात एक एल्बम की # 02

फीचर्ड आर्टिस्ट ऑफ़ दा मंथ - भूपेन हजारिका.
फीचर्ड एल्बम ऑफ़ दा मंथ - मैं और मेरा साया, - भूपेन हजारिका (गीत अनुवादन - गुलज़ार)


भूपेन दा का जन्म १ मार्च १९२६ को नेफा के पास सदिया में हुआ.अपनी स्कूली शिक्षा गुवाहाटी से पूरी कर वे बनरस चले आए और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में राजनीती शास्त्र से स्नातक और स्नातकोत्तर किया. साथ में अपना संगीत के सफर को भी जारी रखा और चार वर्षों तक 'संगीत भवन' से शास्त्रीय संगीत की तालीम भी लेते रहे। वहां से अध्यापन कार्य से जुड़े रहे इन्ही दिनों ही गुवाहाटी और शिलांग रेडियो से भी जुड़ गए. जब इनका तबादला दिल्ली आकाशवाणी में हो गया तब अध्यापन कार्य छोड़ दिल्ली आ गए ।

भूपेन दा के दिल में एक ख्वाहिश थी की वे एक जर्नलिस्ट बने. इन्ही दिनों इनकी मुलाकात संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष नारायण मेनन से हुई. भूपेन दा की कला और आशावादिता से वे खासा प्रभावित हुए और उन्हें सलाह दी के वे विदेश जा कर पी.एच.डी. करें भूपेन दा ने उनकी सलाह मान ली और कोलंबिया विश्वविद्यालय में मॉस कम्युनिकेशंस से पी.एच डी करने चले गए. मेनन साहब ने स्कालरशिप दिलाने में काफी मदद की. कोलंबिया में पढ़ाई के साथ -साथ होटल में काम किया और कुछ मैगजीन और लघु फिल्मों में संवाद भी बोले. इन सब कामो से वे लगभग २५० डालर कमा लेते थे जिससे उनके शौक भी पूरे हो जाया करते. इन्ही दिनों इनकी मुलाकात राबर्ट स्टेन्स और राबर्ट फेल्हरती से हुई जिनके संपर्क में इन्हे फिल्मो के बारे में काफी कुछ सीखने का मौका भी मिला. जगह -जगह के लोक संगीत को संग्रह करना और सीखना भूपेन साहब के शौको में सबसे उपर. एक दिन दादा एक सड़क से हो कर गुजर रहे थे तभी अमेरिका के मशहुर नीग्रो लोकगायक पॉल रॉबसन गाते हुए देखा वे गाये जा रहे थे 'ol 'man river,you dont say nothing ,you just keep rolling along' पॉल के साथ मात्र एक गिटार वादक था और एक ड्रम और कोई इंस्ट्रूमेंट नही.पॉल की आवाज और उनका गाया यह गाना भूपेन दा को इतना अच्छा लगा कि उससे प्रेरित हो कर 'ओ गंगा तुम बहती हो क्यूँ' रचना का सृजन किया. पॉल से से इनकी जान पहचान भी हो गई और पॉल से ये नीग्रो लोकगायकी के गुर भी सीखने लगे मगर पॉल की दोस्ती थोडी महंगी पड़ी और 7 दिनों के लिए पॉल के साथ जेल की हवा खानी पड़ी .बहरहाल हजारिका अपनी शिक्षा पूरी कर भारत लौट आए।

चलिए आगे का किस्सा अगले सप्ताह अब सुनते हैं हमारे फीचर्ड एल्बम "मैं और मेरा साया" से भूपेन के गाये ये दो गीत.
हाँ आवारा हूँ ..यायावर दादा के चरित्र को चित्रित करता है ये मधुर गीत-




कुछ इसी भाव का है ये दूसरा गीत भी. कितने ही सागर, कितने ही धारे...बहते हैं बहता रहा हूँ....वाह... सुनिए और इस आनंद में सागर में डूब जाईये -



साप्ताहिक आलेख - उज्जवल कुमार



"बात एक एल्बम की" एक साप्ताहिक श्रृंखला है जहाँ हम पूरे महीने बात करेंगे किसी एक ख़ास एल्बम की, एक एक कर सुनेंगे उस एल्बम के सभी गीत और जिक्र करेंगे उस एल्बम से जुड़े फनकार/फनकारों की. इस स्तम्भ को आप तक ला रहे हैं युवा स्तंभकार उज्जवल कुमार. यदि आप भी किसी ख़ास एल्बम या कलाकार को यहाँ देखना सुनना चाहते हैं तो हमें लिखिए.

5 comments:

महाशक्ति said...

भूपेन जी की आवाज का क्‍या कहना, और भी कृति की प्रतीक्षा करूँगा।

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

uttam prastuti.

surhall said...

This post has been removed by the author.

surhall said...

surhall said...
hi
bhupin dada ka jawb nahi NOrth east ke Rafi ji hain enka sangeet , sing bhut good hain awaaz me midhas hain, ,

meri music lover se request hain two song cheye(need) Mukesh ji 1969 and shamshahad begum 1955 sing both under bhupin dada, if any music lover have this song pl, email to me,
thanks
surhall
surhall@gmail.com

param said...

sir can u send me these songs or cn u give me the link 4m where i can download these great song.

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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