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बोलती कहानियाँ - शत्रु - सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' - अनुभव प्रिय

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में दीपक बाबा की कहानी "ईमानदार प्रधान" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार 'अज्ञेय' द्वारा लिखित लघु कथा "शत्रु", जिसको स्वर दिया है, दिल्ली पब्लिक स्कूल, पटना में नवीं कक्षा के छात्र अनुभव प्रिय ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 8 मिनट 16 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

"अज्ञेय" को मरणोपरांत भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'(1911-1987)
हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी
"उसने देखा, एक स्त्री भूमि पर लेटी हुई थी।”
('अज्ञेय' की "शत्रु" से एक अंश)

नीचे के प्लेयर से सुनें.


यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3

Fifth story, Shatru, Hindi Stories, Audio Book, 2012/5. Author: Agyeya. Voice: Anubhav Priya

Comments

शानदार प्रस्तुति...

बधाईयाँ!!
Amit said…
बहुत अच्छी प्रस्तुति
बहुत अच्छे वत्स!! स्वर का उतार चढ़ाव कमाल का है और उच्चारण स्पष्ट!!
Smart Indian said…
अनुभव,

रेडियो प्लेबैकइंडिया परिवार द्वारा "बोलती कहानियाँ" कार्यक्रम में स्वागत है। स्पष्ट शब्द, साफ़ उच्चारण, शानदार उतार चढ़ाव; कुल मिलाकर वाचन कमाल का है।

शुभकामनायें!
Archana Chaoji said…
आभार छोटू उस्ताद का ....
अनुभव की प्रस्तुति कमाल की है।
keep it up!
anubav ne bahut achchhe swar men prastuti ki hai ye kahani... shubhkamnyen.
अज्ञेय जी की यह कहानी मैंने पहले भी पढी है लेकिन इतने सुन्दर वाचन ने कहानी को और भी रोचक बना दिया है । कुछ उपेक्षा तथा कुछ अंग्रेजी के आकर्षणवश हिन्दी में शुद्ध वाचन अब दुर्लभ सा प्रतीत होने लगा है लेकिन नवमीं कक्षा के अनुभव ने कहानी के रोचक वाचन के साथ हिन्दी में अपनी योग्यता भी दर्ज करदी है । हार्दिक शुभ-कामनाएं ।
anubhav said…
आप सभी का आभारी हूँ!
इन गुणी-जनों के बीच मुझे भी एक स्थान देने के लिए धन्यवाद!
सदा said…
बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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