Friday, October 26, 2012

शब्दों के चाक पर - 18

"आओ घोटाला करें" और "आवाज़ दे, कहाँ है"

काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में
उतरा है रामराज विधायक निवास में

पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत
इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में

आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह
जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में

पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें
संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में

जनता के पास एक ही चारा है बगावत
यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में


दोस्तों, आज की कड़ी में हमारे दो विषय हैं - "आओ घोटाला करें" और "आवाज़ दे, कहाँ है" है। जीवन के इन दो अलग-अलग पहलुओंकी कहानियाँ पिरोकर लाये हैं आज हमारे विशिष्ट कवि मित्र। पॉडकास्ट को स्वर दिया है अभिषेक ओझा ओर अनुराग शर्मा ने, स्क्रिप्ट रची है विश्व दीपक ने, सम्पादन व संचालन है अनुराग शर्मा का, व सहयोग है वन्दना गुप्ता का। आइये सुनिए सुनाईये ओर छा जाईये ...

(नीचे दिए गए किसी भी प्लेयेर से सुनें)



या फिर यहाँ से डाउनलोड करें


"शब्दों के चाक पर" हमारे कवि मित्रों के लिए हर हफ्ते होती है एक नयी चुनौती, रचनात्मकता को संवारने के लिए मौजूद होती है नयी संभावनाएँ और खुद को परखने और साबित करने के लिए तैयार मिलता है एक और रण का मैदान. यहाँ श्रोताओं के लिए भी हैं कवि मन की कोमल भावनाओं उमड़ता घुमड़ता मेघ समूह जो जब आवाज़ में ढलकर बरसता है तो ह्रदय की सूक्ष्म इन्द्रियों को ठडक से भर जाता है. तो दोस्तों, इससे पहले कि हम पिछले हफ्ते की कविताओं को आत्मसात करें, आईये जान लें इस दिलचस्प खेल के नियम -


1. इस साप्ताहिक कार्यक्रम में शब्दों का एक दिलचस्प खेल खेला जायेगा. इसमें कवियों को कोई एक थीम शब्द या चित्र दिया जायेगा जिस पर उन्हें कविता रचनी होगी...ये सिलसिला सोमवार सुबह से शुरू होगा और गुरूवार शाम तक चलेगा, जो भी कवि इसमें हिस्सा लेना चाहें वो रश्मि जी के फेसबुक ग्रुप में यहाँ जुड़ सकते है.

2. सोमवार से गुरूवार तक आई कविताओं को संकलित कर हमारे पोडकास्ट टीम के प्रमुख पिट्सबर्ग से अनुराग शर्मा जी अपने साथी पोडकास्टरों के साथ इन कविताओं में आवाज़ भरेंगें और अपने दिलचस्प अंदाज़ में इसे पेश करेगें.

3. हमारी टीम अपने विवेक से सभी प्रतिभागी कवियों में से किसी एक कवि को उनकी किसी खास कविता के लिए सरताज कवि चुनेगी. आपने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से यह बताना है कि क्या आपको हमारा निर्णय सटीक लगा, अगर नहीं तो वो कौन सी कविता जिसके कवि को आप सरताज कवि चुनते.

4. अधिक जानकारी के लिए आप हमारे संचालक विश्व दीपक जी से इस पते पर संपर्क कर सकते हैं- vdeepaksingh@gmail.com

5 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बेहतरीन प्रस्तुति...

vandan gupta said...

इस बार की कडी भी बेहद रोचक रही…………प्रस्तुतिकरण ने तो चार चांद लगा दिये। रजत सक्सैना जी को हार्दिक बधाई।

Sajeev said...

aj jaake suna paaya, veru nicely presented, anurag ji, tussi great ho :) mujhe vishay bhi bahut sateek laga, aur sabhi kaviyon aaj ke halaat par achhi tippani kii hai, vd ka kaam bhi supereb hai...

Rajesh Kumari said...

जनता के पास एक ही चारा है बगावत
यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में ---बहुत प्रभाव शाली पंक्तियाँ बहुत सुन्दर आज का एपिसोड भी बेहतरीन| भ्रष्टाचार के खिलाफ सभी कवियों ने शब्द रुपी बाण बखूबी चलायें हैं और उस अद्रश्य अलौकिक शक्ति का आह्वान किया है उसको अपने शब्दों से आवाज दी है और सशक्त मधुर आवाज के धनी अनुराग शर्मा और अभिषेक ओझा जी की शानदार प्रस्तुति ,विश्व दीपक जी की बेहतरीन स्क्रिप्ट और वंदना जी का चेलेंजिंग विषय कुल मिलकर उत्कृष्ट प्रस्तुति कर्ण प्रिय एपिसोड है इस प्रोग्राम से जुड़े सभी मित्रों को हार्दिक बधाई राजेश सक्सेना जी को उनकी कविता को सरताज घोषित किये जाने पर विशेष बधाई

cgswar said...

बहुत खूब रही ये प्रस्‍तुति‍ भी्...

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