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मिलिए सागर से जिन्हें लायीं है रश्मि जी ब्लोग्गेर्स चोईस में


सागर को जानना हो तो उसकी लहरों से पूछो, हिम्मत हो तो उसकी गहराई में जाओ - असली सीप असली मोती वहीँ मिलते हैं. चलिए यह जब होगा तब होगा ..... मैंने सागर से उसकी पसंद के ५ गाने मांगे.... सागर ने ४ दिए और कहा - एक पसंद आपकी शामिल हो तो एक सीप और पूर्ण हो.' क्योंकि सागर को ऐतबार है मेरी पसंद पर ('जी' लगाने से सागर की लहरें खो जातीं तो सागर ही लिखा है) तो ४ गाने सागर के, यह कहते हुए कि - 'सुनो और जानो इसमें क्या है !', और साथ में एक गीत मेरी पसंद का.

तो सुना जाए -

१. दिल ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन - दिल्ली में मशीन बना रहता हूँ, सर पर सलीब लटकती रहती है और ख्यालों को खेत में छोड़ आया हूँ इसलिए...


२. तेरे खुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे - गंगा, पुल, प्रेम और कोहरे में स्पष्ट दीखता धुंधला सा चेहरा...


३. माई री मैं का से कहूँ पीर अपने जिया की - इसके कुछ शब्द बेहद मौलिक और आत्मीय लगते हैं.


४. वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहाँ - एस. डी. बर्मन की भटियाली आवाज़... जैसे खाई में कूद जाने का मन होता है.


५. अंत में
एक जो आपको सबसे ज्यादा पसंद हो - अबकी कारण बताने की जरुरत नहीं, आप बेहतर जानती होंगी.
तो आपके साथ मेरी पसंद.

Comments

सारे ही गीत बड़े सुन्दर हैं.
Amit said…
आँखें बंद करिये और इन गानों को सुनिए आप एक अलग ही दुनिया में पहुँच जायेंगे
Smart Indian said…
सागर की पसंद के गीत सुनना अच्छा लगा। मगर जिसकी पसन्द सुन रहे हैं उसका थोड़ा सा मौलिक परिचय और चित्र आदि भी पोस्ट में हो तो और अच्छा लगेगा।