बुधवार, 19 सितंबर 2012

छोटे परदे की कहानियाँ और पुराने फ़िल्मी गीत

प्लेबैक इंडिया ब्रोडकास्ट (१३)

रोज छोटे परदे पर नज़र आने वाले धारावाहिक, अधिकतर भारतीय परिवारों के लिए एक साथ बैठकर रात का भोजन खाने और तमाम गुफुत्गुओं के उस समय सफर के हमसफ़र होते हैं. कब जाने अनजाने ही इन धारावाहिकों के किरदार हमारे जीवन का हिस्सा बन जाते हैं और कब उनकी कहानियों में कहीं हम खुद को भी ढूँढने लगते हैं, पता ही नहीं चलता.  ऐसे में इन धारवाहिकों के निर्माताओं पर भी दबाब होता है कि नयी और अनूठी कहानियों को नए अंदाज़ में पेश करें, और इन कहानियों को दर्शकों से जोड़ने के लिए अगर वो पुराने हिंदी फ़िल्मी गीतों का सहारा लेते हैं तो हैरत नहीं होनी चाहिए. पर कहीं न कहीं पिछले कुछ दिनों में ये चलन बहुत तेज़ी से बढ़ा है, इसी पर एक पड़ताल है हमारा आज का ब्रोडकास्ट....सुनिए और अपनी राय देकर इस चर्चा को सार्थक बनायें.




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