शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

शब्दों में संसार - हरा सोना

शब्दों में संसार - एपिसोड ०१ - हरा सोना 

शब्दों में संसार की पहली कड़ी में आप सबका स्वागत है। यह श्रॄंखला "शब्दों के चाक पे" की तरह हीं "कविताओं" पर आधारित है। बस फर्क यह है कि जहाँ "चाक" पर हम आजकल की ताज़ातरीन कविताओं की मिट्टी डालते थे, वहीं "संसार" में हम उन कविताओं को खोदकर ला रहे हैं जो मिट्टी तले कई सालों से दबी हैं यानि कि श्रेष्ठ एवं नामी कवियों की पुरानी कविताएँ। आज की कड़ी में हमने "निराला", "पंत" से लेकर "त्रिलोचन" एवं "नागार्जुन" तक की कविताएँ शामिल की हैं और आज का विषय है "हरा सोना"। "हरा सोना" नाम से हीं साफ हो जाता है कि हम खेतों में लहलहाते फसलों एवं जंगलों में शान से सीना ताने खड़े पेड़ों की बातें कर रहे हैं। हम प्रकृति यानि कि कुदरत की बातें कर रहे हैं। 

लीजिए सुनिए रेडियो प्लेबैक का ये अनूठा पोडकास्ट -



आप इस पूरे पोडकास्ट को यहाँ से डाउनलोड भी कर सकते हैं


आज की कड़ी में प्रस्तुत कवितायें और उनसे जुडी जानकारी इस प्रकार हैं -

 कविता ०१ - फिर बेले में कलियाँ आई : कवि - निराला : स्वर -गार्गी कुलकर्णी



 कविता ०२ - नयी नयी कोंपलें : कवि -माखनलाल चतुर्वेदी : स्वर - अनुराग शर्मा



 कविता ०३ - उठ किसान : कवि -त्रिलोचन : स्वर -संज्ञा टंडन



 कविता ०४ : गोरी गोरी सौंधी धरती : कवि -धर्मवीर भारती : स्वर -सुनीता यादव



 कविता ०५ : कृषक संवरिया : कवि - केदारनाथ अग्रवाल : स्वर -अर्चना चावजी 



 कविता ०६ : नारियल के पेड : कवि -केदारनाथ अग्रवाल : स्वर -राजीव रंजन प्रसाद



 कविता ०७ : महुआ : कवि - शमशेर बहादुर सिंह : स्वर - संज्ञा टंडन



 कविता ०८ : जंगल की याद : कवि -सर्वेश्वर दयाल सक्सेना : स्वर -वरद देशमुख



 कविता ०९ : शाल के जंगल : कवि -नागार्जुन : स्वर -पूजा यादव

 

कविता १० : हरी बिछली घास : कवि - अज्ञेय : स्वर -राजीव रंजन प्रसाद



कोंसेप्ट, कविता-चयन और स्क्रिप्ट - विश्व दीपक 
स्वर - अभिषेक ओझा और शैफाली गुप्ता 

शीर्षक गीत - सजीव सारथी 
स्वर - अनुराग यश, कृष्ण राजकुमार 
संगीत - कृष्ण राजकुमार 

निर्माण सहयोग - अनुराग शर्मा, रश्मि प्रभा, सुनीता यादव, संज्ञा टंडन, राजीव रंजन प्रसाद, अमित तिवारी 
संयोजन एवं प्रस्तुति - सजीव सारथी 

हिंदी साहित्य के इन अनमोल रत्नों को इस सरलीकृत रूप में आपके सामने लाने का ये हमारा प्रयास आपको कैसा लगा, हमें अपनी राय के माध्यम से अवश्य अवगत करवाएं. यदि आप भी आगामी एपिसोडों में कविताओं को अपनी आवाज़ से सजाना चाहें तो हमसे संपर्क करें.

6 टिप्‍पणियां:

Rajesh Kumari ने कहा…

सभी कवितायें और सभी गायक लाजबाब लगे बहुत बहिया प्रस्तुति इस प्रोग्राम से जुड़े सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई सम्मानीय कवियों को नमन

Rajesh Kumari ने कहा…

मैंने सुबह ये एपिसोड सुना भी और टिपण्णी भी दी ना जाने मेरी टिपण्णी कहाँ गायब हो गई कहीं स्पैम में तो नहीं चली गई बहुत अच्छा एपिसोड है अपने साहित्यिक वन्दनीय कवियों की रचनाएं और गाने वाले सभी शानदार हैं इस प्रोग्राम से जुड़े सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं

cgswar ने कहा…

shandar prayog, behtareen prastuti.....

JAY SINGH"GAGAN" ने कहा…

बेहतरीन प्रयोग,लाजबाब प्रस्तुति,"शब्दों में संसार"के यह प्रस्तुति वाकई हरी तो है ही एक खरा सोना भी है.....सभी प्रस्तोताओं को हार्दिक बधाई.

Archana Chaoji ने कहा…

मेरी उस दिन की टिप्पणी गायब हो गई :-(
...खैर
बहुत ही बढ़िया अंक रहा ये "हरा सोना" ..एक नया अनुभव...
पूरी टीम को बधाई...

वाणी गीत ने कहा…

सार्थक श्रम के लिए पूरी टीम को बधाई !

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