रविवार, 5 जून 2011

एक राजे का बेटा लेकर उड़ने वाला घोड़ा....सुनिए एक कहानी सहगल साहब की जुबानी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 671/2011/111

मस्कार! 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की एक नई सप्ताह के साथ मैं, सुजॉय चटर्जी, साथी सजीव सारथी के साथ आप सब की ख़िदमत में हाज़िर हूँ। दोस्तों, बचपन में हम सभी नें अपने दादा-दादी, नाना-नानी और माँ-बाप से बहुत सारी किस्से कहानियाँ सुनी हैं, है न? उस उम्र में ये कहानियाँ हमें कभी परियों के साम्राज्य में ले जाते थे तो कभी राजा-रानी की रूप-कथाओं में। कभी भूत-प्रेत की कहानियाँ सुन कर रात को बाथरूम जाने में डर भी लगा होगा आपको। और हम जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं, हमारी कहानियाँ भी उम्र और रुचि के साथ साथ बदलती चली जाती है। कहानी-वाचन भी एक तरह की कला है। एक अच्छा कहानी-वाचक सुनने वालों को बाकी सब कुछ भूला कर कहानी में मग्न कर देता है, और कहानी के साथ जैसे वो बहता चला जाता है। हमारी फ़िल्में भी कहानी कहने का एक ज़रिया है। और फ़िल्मों के गीत भी ज़्यादातर समय फ़िल्म की कहानी को ही आगे बढ़ाते हैं। लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ है कि कोई फ़िल्मी गीत भी अपने आप में कोई कहानी कहता है। कुछ ऐसे ही गीतों को लेकर, जिनमें छुपी है कोई कहानी, हम आज से एक नई शृंखला की शुरुआत कर रहे हैं। कहानी भरे गीतों का जैसे ही ख़याल आया तो सब से पहले मुझे जो गीत याद आया, वह है फ़िल्म 'जब जब फूल खिले' का "एक था गुल और एक थी बुलबुल"। लेकिन क्योंकि यह गीत 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर आनन्द बक्शी साहब पर केन्द्रित शृंखला में बज चुका है, इसलिए इस शृंखला के लिये इतना सटीक होते हुए भी हम इसे शामिल नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन बक्शी साहब की लिखी इस कहानी को सलाम करते हुए हम इस शृंखला का शीर्षक रखते हैं - 'एक था गुल और एक थी बुलबुल'।

इस शृंखला के लिये गीतों की खोज करते हुये मेरे हाथ जो सबसे पुराना गीत लगा, वह है साल १९३७ का। वैसे एक नहीं, वर्ष १९३७ के मुझे दो ऐसे गीत मिले हैं जिनमें कहानी है। और इस शृंखला की पहली दो कड़ियों में ये ही दो गीत आप सुनने जा रहे हैं। शुरु करते हैं पहले सिंगिंग् सुपरस्टार कुंदनलाल सहगल से। १९३७ की फ़िल्म 'प्रेसिडेण्ट' का गीत "इक बंगला बने न्यारा" आप हाल ही में इस स्तंभ में सुन चुके हैं। इस गीत में सहगल साहब सपना देखते हैं उस मिल का मालिक बनने का जिसमें वो एक मज़दूर की हैसियत से काम करते हैं। लेकिन लगता है उनका यह सपना टूट जाता है, उनकी नौकरी चली जाती है, और वो इस बात को अपने परिवार से छुपाने की कोशिश करते हैं। इसी सिचुएशन पर फ़िल्म का अगला गीत है "एक राजे का बेटा लेकर उड़ने वाला घोड़ा"। यह गीत उनकी कोशिश है अपनी नौकरी चले जाने को छुपाने की। किदार शर्मा के लिखे इस गीत को स्वरबद्ध किया है रायचन्द बोराल नें। गीत बच्चों वाला है, जिसमें रूपकथा है, लेकिन फ़िल्म के सिचुएशन के हिसाब से यह ग़मज़दा गीत है क्योंकि नायक की नौकरी चली गई है। इस गीत में जो कहानी है, उसे पूरा तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन जो भी है, गीत उस ज़माने का सुपरहिट गीत रहा है। गीत सुनने से पहले ये रही इस गीत में कही गई कहानी:

एक राजे का बेटा लेकर उड़ने वाला घोड़ा,
देश देश के सैर की ख़ातिर अपने घर से निकला।

उड़ते-उड़ते चलते-चलते थके जो उसके पाँव,
तो इक जगह पर बैठ गया वो देख के ठण्डी छाँव।

इतने में होनी ने अपनी बंसी वहाँ बजायी,
जिसको सुन कर परियों की शहज़ादी दौड़ी आयी।


उसके बाद क्या हुआ, उसकी आप ख़ुद ही कल्पना कर लीजिये, और हो सके तो इस गीत को पूरा लिख कर हमें oig@hindyugm.com पर ज़रूर लिख भेजिये।



क्या आप जानते हैं...
कि संगीतकार रायचन्द बोराल के पिता लालचन्द बोराल अपने ज़माने के मशहूर गायक और पखावजवादक थे।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 2/शृंखला 18
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - शांता आप्टे की आवाज़ है इसमें.
सवाल १ - गीतकार बताएं - ३ अंक
सवाल २ - संगीतकार बताएं - २ अंक
सवाल ३ - फिल्म के निर्देशक बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
एक बार फिर अमित और अनजाना जी ने शानदार शुरुआत की है, अविनाश जी लगता है इस बार उन्हें अच्छी टक्कर दे पायेंगें. पिछली शृंखला का आत्मविश्वास उनके जरूर काम आएगा, प्रतीक जी को भी बधाई

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

9 टिप्‍पणियां:

Anjaana ने कहा…

Munshi Aziz

Avinash Raj ने कहा…

SHANTARAM ATHAVALE

Prateek Aggarwal ने कहा…

Music by Keshavrao Bhole

अमित तिवारी ने कहा…

geetkar: Shantaram Athavale

Kshiti ने कहा…

v. shantaram

हिन्दुस्तानी ने कहा…

Director: V. Shantaram

भारतीय नागरिक ने कहा…

सहगल साहब हमेशा जीवित रहेंगे...

कृष्णमोहन ने कहा…

सुजॉय जी,
फिल्म प्रेसिडेंट का यह पूरा गीत oig@hindyugm.com पर भेज दिया है|

गुड्डोदादी ने कहा…

एक याद पुरानी

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