Tuesday, June 14, 2011

एक हसीना थी, एक दीवाना था....एक कहानी नुमा गीत जिसमें फिल्म की पूरी तस्वीर छुपी है

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 678/2011/118

'एक था गुल और एक थी बुलबुल' शृंखला में कल आपने १९७९ की फ़िल्म 'मिस्टर नटवरलाल' का गीत सुना था। जैसा कि हमने कल बताया था कि आनन्द बक्शी साहब के लिखे दो गीत आपको सुनवायेंगे, तो आज की कड़ी में सुनिये उनका लिखा एक और ज़बरदस्त कहानीनुमा गीत। यह केवल कहानीनुमा गीत ही नहीं, बल्कि उसकी फ़िल्म का सार भी है। पुनर्जनम की कहानी पर बनने वाली फ़िल्मों में एक महत्वपूर्ण नाम है 'कर्ज़' (१९८०)। राज किरण और सिमी गरेवाल प्रेम-विवाह कर लेते हैं। राज को भनक तक नहीं पड़ी कि सिमी ने दरअसल उसके बेहिसाब जायदाद को पाने के लिये उससे शादी की है। और फिर एक दिन धोखे से सिमी राज को गाड़ी से कुचल कर पहाड़ से फेंक देती है। राज किरण की मौत हो जाती है और सिमी अपने स्वर्गवासी पति के एस्टेट की मालकिन बन जाती है। लेकिन कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई। प्रकृति भी क्या क्या खेल रचती है! राज दोबारा जनम लेता है ॠषी कपूर के रूप में, और जवानी की दहलीज़ तक आते आते उसे अपने पिछले जनम की याद आ जाती है और किस तरह से वो सिमी से बदला लेता है अपने इस जनम की प्रेमिका टिना मुनीम के साथ मिल कर, किस तरह से पिछले जनम का कर्ज़ चुकाता है, यही है इस ब्लॉकबस्टर फ़िल्म की कहानी। एक कमर्शियल फ़िल्म की सफलता के लिये जिन जिन बातों की ज़रूरत होती है, वो सभी बातें मौजूद थीं सुभाष घई की इस फ़िल्म में। यहाँ तक कि इसके गीत-संगीत का पक्ष भी बहुत मज़बूत था। दोस्तों, पूनर्जनम और सस्पेन्स फ़िल्मों में पार्श्वसंगीत का बड़ा हाथ होता है माहौल को सेट करने के लिये। और ख़ास कर पूनर्जनम की कहानी मे ऐसी विशेष धुन की ज़रूरत होती है जिससे आती है एक हौण्टिंग् सी फ़ीलिंग्। यह धुन बार बार बजती है, और कभी कभी तो इसकी कहानी में इतनी अहमियत हो जाती है कि यह धुन ही पिछले जनम की याद दिलवा जाये! ऐसा ही कुछ 'कर्ज़' में भी था। याद है आपको वह इन्स्ट्रुमेण्टल पीस जो राज किरण और सिमी की गाड़ी में बजी थी ठीक राज के कत्ल से पहले। अगले जनम में ऋषी इसी धुन पर आधारित गीत गा कर और उस धुन पर उसी भयानक कहानी को सुना कर सिमी को भयभीत कर देता है। और दोस्तों, यही कहानी है आज के गीत में, जिसे आवाज़ें दी हैं किशोर कुमार और आशा भोसले नें। "एक हसीना थी, एक दीवाना था..."। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत था इस फ़िल्म में।

अभी जो उपर 'कर्ज़' फ़िल्म की कहानी हमने बतायी, उसी का एक अन्य रूप था गीत की शक्ल में! और फिर एक बार आनन्द बक्शी ऐट हिज़ बेस्ट!!! क्या कमाल का लिखा है। सिचुएशन है कि ऋषी कपूर को पिछले जनम की कातिल-पत्नी सिमी गरेवाल को उस भायानक कहानी की याद दिला कर उसे डराना है, उसे एक्स्पोज़ करना है। इस जनम में ऋषी एक सिंगर-डान्सर हैं, और यह काम वो एक स्टेज-शो में टिना मुनीम के साथ मिल कर करते हैं। गीत के शुरुआती बोल ऋषी कपूर की आवाज़ में ही है। आइए इस गीत-रूपी कहानी को पहले पढ़ें और फिर सुनें।

रोमिओ-जुलिएट, लैला-मजनु, शिरी और फ़रहाद,
इनका सच्चा इश्क़ ज़माने को अब तक है याद।

याद मुझे आया है एक ऐसे दिलबर का नाम,
जिसने धोखा देकर नाम-ए-इश्क़ किया बदनाम।

यही है सायबान कहानी प्यार की,
किसी ने जान ली, किसी ने जान दी।

एक हसीना थी, एक दीवाना था,
क्या उमर, क्या समा, क्या ज़माना था।

एक दिन वो मिले, रोज़ मिलने लगे,
फिर मोहब्बत हुई, बस क़यामत हुई,
खो गये तुम कहाँ, सुन के ये दास्ताँ,
लोग हैरान हैं, क्योंकि अंजान हैं,
इश्क की वो गली, बात जिसकी चली,
उस गली में मेरा आना-जाना था,
एक हसीना थी एक दीवाना था।

उस हसीं ने कहा, सुनो जाने-वफ़ा,
ये फ़लक ये ज़मीं, तेरे बिन कुछ नहीं,
तुझपे मरती हूँ मैं, प्यार करती हूँ मैं,
बात कुछ और थी, वो नज़र चोर थी,
उसके दिल में छुपी चाह दौलत की थी,
प्यार का वो फ़कत एक बहाना था,
एक हसीना थी एक दीवाना था।

बेवफ़ा यार ने अपने महबूब से,
ऐसा धोखा किया,
ज़हर उसको दिया,
धोखा धोखा धोखा धोखा।

मर गया वो जवाँ,
अब सुनो दास्ताँ,
जन्म लेके कहीं फिर वो पहुँचा वहीं,
शक्ल अंजान थी, अक्ल हैरान थी,
सामना जब हुआ, फिर वही सब हुआ,
उसपे ये कर्ज़ था, उसका ये फ़र्ज़ था,
फ़र्ज़ तो कर्ज़ अपना चुकाना था।




क्या आप जानते हैं...
कि 'कर्ज़' फ़िल्म के इस गीत के पहले इंटरल्युड म्युज़िक का इस्तमाल अनु मलिक नें फ़िल्म 'हर दिल जो प्यार करेगा' के गीत "ऐसा पहली बार हुआ सतरह अठरह सालों में" में किया था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 9/शृंखला 18
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - लता की आवाज़ है गीत में.
सवाल १ - संगीतकार कौन हैं - २ अंक
सवाल २ - गीतकार का नाम बताएं - ३ अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
लगता है अनजाना जी वाकई सत्यग्रह पर बैठ गए हैं, अरे भाई हम सरकार नहीं हैं वापस आईये मुकाबल एकतरफा हो रहा है, अमित जी क्षिति जी और अविनाश जी को बधाई

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

6 comments:

Avinash Raj said...

Ravinder rawal

अमित तिवारी said...

geetkar-Ravinder rawal

Kshiti said...

Sangeetkar - Ram Lakshman

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत बढ़िया गाना है.

AVADH said...

फिल्म: हम साथ साथ हैं.
अवध लाल

हिन्दुस्तानी said...

Film: Bezubaan

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