Thursday, July 1, 2010

और इस दिल में क्या रखा है....कल्याणजी आनंदजी जैसे संगीतकारों के रचे ऐसे गीतों के सिवा

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 430/2010/130

ल्याणजी-आनंदजी के स्वरबद्ध गीतों को सुनते हुए आज हम आ पहुँचे हैं लघु शृंखला 'दिल लूटने वाले जादूगर' की अंतिम कड़ी पर। आपने पिछली नौ कड़ियों में महसूस किया होगा कि किस तरह से बदलते वक़्त के साथ साथ इस संगीतकार जोड़ी ने अपने आप को बदला, अपनी स्टाइल में बदलाव लाए, जिससे कि हर दौर में उनका संगीत हिट हुआ। आज अंतिम कड़ी में हम सुनेंगे ८० के दशक का एक गीत। युं तो १९८९ में बनी फ़िल्म 'त्रिदेव' को ही कल्याणजी-आनंदजी की अंतिम हिट फ़िल्म मानी जाती है (हालाँकि उसके बाद भी कुछ कमचर्चित फ़िल्मों में उन्होने संगीत दिया), लेकिन आज हम आपको 'त्रिदेव' नहीं बल्कि १९८७ की फ़िल्म 'ईमानदार' का एक बड़ा ही ख़ूबसूरत गीत सुनवाना चाहते हैं। जी हाँ, बिलकुल सही पहचाना, "और इस दिल में क्या रखा है, तेरा ही दर्द छुपा रखा है"। इस गीत के कम से कम दो वर्ज़न है, एक आशा और सुरेश वाडकर का डुएट है, और दूसरा सुरेश की एकल आवाज़ में। आज आपको सुनवा रहे हैं सुरेश वाडकर की एकल आवाज़। गाना मॊडर्ण है, लेकिन जो पैथोस गीतकार प्रकाश मेहरा ने इस गीत में डाले हैं, वह इस गीत को यादगार बना देता है। बेहद कामयाब हुआ था यह गीत और मुझे याद है उन दिनों रेडियो पर इस गीत की गूंज आए दिन सुनाई पड़ती थी। दोस्तों, हमें पूरा यकीन है कि इस गीत को आज सुन कर आप में से बहुतों को अपने स्कूल कालेज का वह ज़माना याद आ गया होगा, है ना! इसी फ़िल्म में अलका याज्ञ्निक और साधना सरगम से भी उन्होने गानें गवाए। अलका और साधना के ज़िक्र से याद आया कि कल्यानजी-आनंदजी ने बहुत से नए कलाकारों को मौका दिया है समय समय पर। सिर्फ़ मौका ही नहीं बल्कि उन्हे बाक़ायदा ट्रेन किया है। आइए आज उनके इसी पक्ष पर थोड़ा सा और नज़र डालते हैं।

जब १९९७ की उस इंटरव्यू में कल्याणजी भाई से गणेश शर्मा ने यह पूछा कि आज की पीढ़ी की बहुत सी गायक गायिकाएँ आप से अपनी 'सिंगिंग् करीयर' शुरु की है, बहुत कुछ सीखा है, इन नए सिंगर्स के बारे में कुछ हम जानना चाहेंगे आप से, तो कल्याणजी भाई ने जवाब दिया - "कभी भी कोई सिंगर या कोई ऐक्टर या कामेडियन, उस वक़्त तो दिखाई दे जाता है कि उसमें कोई बात है, लेकिन उपरवाला कब उसको मौका दे वो हम नहीं बता सकते। लेकिन ये सिंगर्स तो सब्जेक्ट है हमारा। कुमार सानू ने इतने स्टगलिंग् में दिन निकाले कि कोई दूसरा आदमी हो तो भाग जाए! मैंने उनका एक यह देखा कि कुछ भी हो, अपना रियाज़ है उसको नहीं छोड़ते थे। अनुराधा जी भी काफ़ी टाइम से इस लाइन में थीं, उनमें लगन इतनी है कि 'जो भी रंग चाहोगे मैं गाऊँगी'। उनकी लगन देखिए, आज भी देखिये, हर रंग में उन्होनें गाना गाया है। उसके बाद की पीढ़ी में अलका को आप ने देखा होगा, वो भी ५-७ साल तो बहुत स्ट्रगल करना पड़ा उनको, कोई सुनता नहीं था, कोई नया सिंगर जब भी होता है न, नए की कुछ वैल्यू नहीं होती। अभी तो नई पीढ़ी आई है, उसमें साधना सरगम, सोनाली बाजपेई, जावेद, ये बहुत ही अच्छे सिंगर्स हैं। उसके बीच में सपना मुखर्जी आईं थीं, उसने भी अपने रंग में अच्छे अच्छे गानें गाए। मनहर उधास ने भी गानें गाए। उसके बाद उदित नारायण हैं यहाँ, बहुत अच्छे आदमी हैं, बहुत रियाज़ करते हैं, बहुत अच्छे अच्छे सिंगर्स निकले हैं यहाँ से। हमें तो बहुत आनंद आता है देख कर। अभी जो ये साधना-सोनाली की पीढ़ी है, ये सिर्फ़ पापुलारिटी पर नहीं जाते हई, बहुत अभ्यास किया है इन लोगों ने।" और आइए अब आज के गीत को सुना जाए और इस गीत को सुनते हुए कल्याणजी-आनंदजी को फिर एक बार सलाम करते हुए इस लघु शृंखला 'दिल लूटने वाले जादूगर' का समापन किया जाए। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की महफ़िल फिर सजेगी रविवार की शाम और हम उपस्थित होंगे एक नई लघु शृंखला के साथ। तब तक के लिए इजाज़त, नमस्कार!



क्या आप जानते हैं...
कि 'कलावीर अकेडमी' में कल्याणजी भाई के संरक्षण में शिक्षा ग्रहण कर जो कलावीर फ़िल्म गायन के क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त कर रहे हैं, उनके नाम हैं कुमार सानू, अलका यज्ञ्निक, अनुराधा पौडवाल, साधना सरगम, सोनाली बाजपेई, सुनिधि चौहान आदि।

पहेली प्रतियोगिता- अंदाज़ा लगाइए कि कल 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर कौन सा गीत बजेगा निम्नलिखित चार सूत्रों के ज़रिए। लेकिन याद रहे एक आई डी से आप केवल एक ही प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। जिस श्रोता के सबसे पहले १०० अंक पूरे होंगें उस के लिए होगा एक खास तोहफा :)

१. कालिदास की एक महान कृति पर बनी है ये फिल्म, जिस कृति के नाम पर फिल्म का भी नाम है, बताएं वो नाम -२ अंक.
२. गायक जगमोहन के गाये इस गीत के संगीतकार बताएं - ३ अंक.
३. देबकी बोस निर्देशित ये फिल्म किस सन में प्रदर्शित हुई थी - १ अंक.
४. इस वर्षा गीत के गीतकार बताएं - ३ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
शरद जी को ३ अंक और अवध जी को २ अंक देते हुए हम बताते चलें कि प्रतियिगिता के चौथे हफ्ते के अंत में आते आते शरद जी ने अवध जी को पीछे छोड दिया है, आपका स्कोर है ३६ और ३३ पर है अवध जी....इंदु जी १४ अंकों पर है.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

3 comments:

AVADH said...

संगीतकार कमल दासगुप्ता
अवध लाल

शरद तैलंग said...

Film : Meghdoot

इंदु पुरी गोस्वामी said...

ओ वर्षा के पहले बादल'
मैं आ गई .
काम से फ्री.
पर आज के प्रश्न कहाँ है? मिल ही नही रहे?

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