रविवार, 25 जुलाई 2010

ये रास्ते हैं प्यार के.....जहाँ कभी कभी "प्रेरणा" भी काम आती है

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 446/2010/146

'ओल्ड इज़ गोल्ड' स्तंभ के सभी संगीत रसिकों का एक बार फिर से स्वागत है इस सुरीली महफ़िल में जो रोशन है फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर के सुनहरे सदाबहार नग़मों से। इन दिनों 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर जारी है लघु शृंखला 'गीत अपना धुन पराई', जिसके अंतर्गत हम कुछ ऐसे हिट गीत सुनवा रहे हैं जिनकी धुन किसी ना किसी विदेशी धुन से प्रेरित है। ये दस गीत दस अलग अलग संगीतकारों के संगीतबद्ध किए हुए हैं। पिछले हफ़्ते इस शृंखला के पहले हिस्से में आपने जिन पाँच संगीतकारों को सुना, वो थे स्नेहल भाटकर, अनिल बिस्वास, मुकुल रॊय, राहुल देव बर्मन और सलिल चौधरी। अब आइए अब इस शृंखला को इस मुक़ाम से आगे बढ़ाते हैं। आज की कड़ी के लिए हमने चुना है संगीतकार रवि को। रवि ने भी कई गीतों में विदेशी धुनों का सहारा लिया था जिनमें से एक महत्वपूर्ण गीत है गीता दत्त का गाया फ़िल्म 'दिल्ली का ठग' का "ओ बाबू ओ लाला, मौसम देखो चला"। यह गीत आधारित है मूल गीत "रम ऐण्ड कोकाकोला" की धुन पर। वैसे आज की कड़ी के लिए हमने रवि साहब के जिस गीत को चुना है वह है फ़िल्म 'ये रास्ते हैं प्यार के' का शीर्षक गीत आशा भोसले की आवाज़ में। और यह गीत प्रेरित है लोकप्रिय गीत "दि ब्रीज़ ऐण्ड आइ" से। इससे पहले कि इस मशहूर विदेशी गीत की थोड़ी जानकारी आपको दें, फ़िल्म 'ये रास्ते हैं प्यार के' के बारे में यह बताना चाहेंगे कि यह फ़िल्म १९६३ की फ़िल्म थी जिसका निर्माण किया था सुनिल दत्त साहब ने और निर्देशन था आर. के. नय्यर का। फ़िल्म के मुख्य कलाकार थे अशोक कुमार, सुनिल दत्त, लीला नायडु, मोतीलाल, रहमान, राजेन्द्र नाथ और शशिकला। फ़िल्म के गानें लिखे राजेन्द्र कृष्ण ने।

"दि ब्रीज़ ऐण्ड आइ" एक बेहद लोकप्रिय गीत रहा है जो एक स्पैनिश गीत "ऐण्डालुसिआ" पर आधारित है। मूल गीत को लिखा था अर्नेस्टो लेक्योना ने और जिसके स्पैनिश में बोल थे "एमिलियो दि तोरे"। इसके अंग्रेज़ी वर्ज़न के बोल लिखे अल स्टिलमैन ने। इस गीत के भी समय समय पर कई वर्ज़न निकले हैं, जिनमें सब से लोकप्रिय जो दो वर्ज़न हैं, उनमें एक है १९४० में आई जिम्मी डॊरसे का गाया, और दूसरा है १९५५ में कैटरीना वैलेन्टे की आवाज़ में। वैलेन्टे के इस गीत को उस साल अमेरीका में १३-वाँ स्थान और इंगलैण्ड में ५-वाँ स्थान मिला था। जिम्मी डॊरसे वाले वर्ज़न में बॊब एबर्ली का वोकल भी शामिल था, और इस गीत को जारी किया था डेक्का रेकॊर्ड्स ने। इसे बिलबोर्ड मैगज़ीन चार्ट्स में पहली बार एंट्री मिली थी २० जुलाई १९४० के दिन। यानी कि आज से ठीक ६० बरस और ५ दिन पहले। लोकप्रियता की पायदान दर पायदान चढ़ते हुए कुल ९ हफ़्तों तक इस हिट परेड शो की शान बना रहा और दूसरे नंबर तक पहुँच सका था। उधर पॊलीडोर के लिए कैटरीना वैलेन्टे वाला वर्ज़न जारी किया डेर्क्का रेकॊर्ड्स ने ही इंगलैण्ड में, और इसे बिलबोर्ड मैगज़ीन चार्ट्स में प्रथम एंट्री मिली थी ३० मार्च १९५५ को, और यह १४ हफ़्तों तक इस काउण डाउन में रही, और यह १३-वीं पायदान तक ही चढ़ सका था। यह तो था "दि ब्रीज़ ऐण्ड आइ" के बारे में कुछ जानकारी, तो लीजिए सुनिए रवि के संगीत में फ़िल्म 'ये रास्ते हैं प्यार के' का शीर्षक गीत आशा भोसले की आवाज़ में।



क्या आप जानते हैं...
कि संगीतकार हेमंत कुमार के सहायक के रूप में काम करते हुए फ़िल्म 'जागृति' के मशहूर गीत "हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के" की धुन दरसल रवि ने बनाई थी। लेकिन फ़िल्म क्रेडिट्स में हेमन्त दा का ही नाम छपवाया गया।

पहेली प्रतियोगिता- अंदाज़ा लगाइए कि कल 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर कौन सा गीत बजेगा निम्नलिखित चार सूत्रों के ज़रिए। लेकिन याद रहे एक आई डी से आप केवल एक ही प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। जिस श्रोता के सबसे पहले १०० अंक पूरे होंगें उस के लिए होगा एक खास तोहफा :)

१. You won't admit you love me, And so how am I ever to know? You always tell me, Perhaps, perhaps, perhaps....ये है मूल अंग्रेजी गीत, संगीतकार बताएं देसी संस्करण का - २ अंक.
२. गीतकार बताएं - ३ अंक.
३. कौन है इस गीत की गायिका - २ अंक.
४. गुरुदत्त की ये फिल्म थी, किस पर फिल्माया गया था ये नशीला गीत - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
शरद जी कैसे न माने आपको महागुरु, फिर एक बार सही है जवाब आपका, इंदु जी और अवध जी भी स्पोट ऑन हाँ, किश जी, मुझे लगता है अब आप एकदम सही समझ पाए हैं पहेली को, पहल जवाब गलत हुआ तो क्या हुआ, संभले तो सही, सही जवाब देकर बधाई, आपका खाता खुल चुका है.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

4 टिप्‍पणियां:

AVADH ने कहा…

गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
अवध लाल

शरद तैलंग ने कहा…

Music Director : OP Nayyar

singhSDM ने कहा…

musician------OP Naiyar

*****PAWAN KUMAR

रोमेंद्र सागर ने कहा…

"गीता दत्त" के अलावा यह सुरीली आवाज़ और भला किसकी हो सकती है !

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