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दो चमकती आँखों में कल ख्वाब सुनहरा था जितना.....आईये याद करें गीत दत्त को आज उनकी पुण्यतिथि पर

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 443/2010/143

"दो चमकती आँखों में कल ख़्वाब सुनहरा था जितना, हाये ज़िंदगी तेरी राहों में आज अंधेरा है उतना"। गीता दत्त के गाए इस गीत को सुनते हुए दिल उदास हो जाता है क्योंकि ऐसा लगता है कि जैसे यह गीत गीता जी की ही दास्ताँ बता रहा है। "हमने सोचा था जीवन में कोई चांद और तारे हैं, क्या ख़बर थी साथ में इनके कांटें और अंगारे हैं, हम पे क़िस्मत हँस रही है, कल हँसे थे हम जितना"। उफ़! जैसे कलेजा निकाल दे! आज २० जुलाई, गीता जी का स्मृति दिवस है। उनकी सुर साधना को 'आवाज़' की तरफ़ से श्रद्धा सुमन! दोस्तों, 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर इन दिनों जारी है लघु शृंखला 'गीत अपना धुन पराई'। आइए आज गीता जी की याद में उन्ही की आवाज़ में फ़िल्म 'डिटेक्टिव' का यही गीत सुनते हैं जो शायद उनके जीवन के आख़िरी दिनों की कहानी कह जाए! इस फ़िल्म के संगीतकार थे गीता जी के ही भाई मुकुल रॊय और इस गीत को लिखा शैलेन्द्र जी ने। 'डिटेक्टिव' बनी थी सन् १९५८ में। निर्देशक शक्ति सामंत ने तब तक 'इंस्पेक्टर', 'हिल स्टेशन' और 'शेरू' जैसी फ़िल्मों का निर्देशन कर चुके थे। १९५८ में उन्होने अमीय चित्र के बैनर तले बनी फ़िल्म 'डिटेक्टिव' का निर्देशन किया और इसी साल उन्होने अपनी निजी बैनर 'श्री शक्ति फ़िल्म्स' की भी नीव रखी। प्रदीप कुमार और माला सिन्हा अभिनीत 'डिटेक्टिव' के सभी गानें मशहूर हुए और मुकुल रॊय का जैसे क़िस्मत चमक उठा। लेकिन आश्चर्य की बात है कि इस फ़िल्म के बाद मुकुल रॊय ने किसी और फ़िल्म में संगीत नहीं दिया। इस फ़िल्म से संबंधित कुछ जानकारी हम आपको पहले दे चुके हैं जब गीता दत्त के जनमदिवस पर केन्द्रित १० गीतों की लघु शृंखला 'गीतांजली' के दौरान हमने आपको इसी फ़िल्म से गीता दत्त और हेमन्त कुमार का गाया "मुझको तुम जो मिले ये जहान मिल गया" सुनवाया था। ख़ैर, फ़िल्हाल वक़्त आ गया है आपको यह बताने का कि आज का प्रस्तुत गीत किस विदेशी गीत से प्रेरीत है। यह गीत आधारित है हैरी बेलाफ़ोण्ट के "जमाइकन फ़ेयरवेल" पर।

"जमाइकन फ़ेयरवेल" एक मशहूर कैलीप्सो है जिसमें वेस्ट इण्डीज़ के द्वीपों की ख़ूबसूरती का वर्णन है। इस गीत को लिखा था लॊर्ड बुर्गेस (इरविंग् बुर्गी) ने। उनका जन्म न्यु यॊर्क के ब्रूकलीन में सन् १९२६ को हुआ था। उनकी माँ बारबाडॊस की थीं और उनके पिता वर्जिनिया से ताल्लुख़ रखते थे। इस गीत को पहली बार मुक्ति मिली थी गायक हैरी बेलाफ़ोण्ट के लोकप्रिय ऐल्बम 'कैलीप्सो' में। 'बिलबोर्ड पॊप चार्ट' में यह गीत चौदहवें पायदान तक चढ़ा था। दरसल यह एक पारम्परिक गीत है जो अलग अलग हिस्सों में अलग अलग तरीकों से गाया जाता था। बुर्गेस ने इन सभी हिस्सों का संग्रह किया और उन तमाम लोक रचनाओं के टुकड़ों को जोड़ कर एक नया गीत तैयार कर दिया। और कहना ज़रूरी है कि उन कैरिबीयन द्वीपों से बाहर लाकर इस गीत को लोकप्रिय बनाने में गायक हैरी बेलाफ़ोण्ट का बहुत बड़ा योगदान है। बेलाफ़ोण्ट के अलावा और जिन कलाकारों ने आगे चलकर इस गीत को गाया उनमें शामिल हैं सर लैन्सलोट, जिम्मी बफ़े, सैम कूक, नीना और फ़्रेडरिक, पट रोले, कार्ली सायमन और नटी। इस गीत को बहुत सारी भाषाओं में अनुवादित किया गया है। यहाँ पर बताना अत्यन्त आवश्यक है कि केवल बंगला में ही इस गीत के कई सारे अनुवाद मौजूद हैं, जिनमें से कुछ तो बहुत जाने माने हैं। इनमें से एक वर्ज़न का इस्तेमाल तो ७० के दशक के बंगाल के नक्सली क्रांतिकारी विद्रोह में ऐन्थेम के तौर पर किया गया था। तो लीजिए, 'गीत अपना धुन पराई' में "जमाइकन फ़ेयरवेल" की धुन पर आधारित फ़िल्म 'डिटेक्टिव' का यह गीत सुनें, और गीता दत्त जी को उनकी पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करें।



क्या आप जानते हैं...
कि मुकुल रॊय ने केवल चार हिंदी फ़िल्मों में संगीत दिया था जिनके नाम हैं - भेद, दो बहादुर, सैलाब, और डिटेक्टिव।

पहेली प्रतियोगिता- अंदाज़ा लगाइए कि कल 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर कौन सा गीत बजेगा निम्नलिखित चार सूत्रों के ज़रिए। लेकिन याद रहे एक आई डी से आप केवल एक ही प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। जिस श्रोता के सबसे पहले १०० अंक पूरे होंगें उस के लिए होगा एक खास तोहफा :)

१. कल इनकी जयंती है, इनका नाम बताएं और ये किस रूप में जुड़े हैं इस गीत से ये भी - ३ अंक.
२. लता जी का साथ इस गीत में एक बेमिसाल पार्श्वगायक के सुपत्र ने दिया है, कौन हैं ये - २ अंक.
३. यह गीत स्वीडिश पॊप ग्रूप 'ए.बी.बी.ए' के गीत "आइ हैव अ ड्रीम" से प्रेरित है, संगीतकार बताएं - २ अंक.
४. युवाओं को केंद्रित इस बेहद सफल प्रेम कहानी की फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
वाह वाह, सब के सब फॉर्म में लौट आये हैं, शरद जी अवध जी और इंदु जी को ढेरों बधाईयां. जासूस के बारे में शरद जी आपको जल्दी ही कन्फर्म करते हैं

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

Comments

प्रश्न १ : राजेन्द्र कुमार ,इस गीत की फ़िल्म के निर्माता,निर्देशक एवं एक्टर
AVADH said…
लता दीदी के साथ पार्श्व गायक थे किशोर दा के सुपुत्र अमित कुमार
अवध लाल
यदि मेरा जवाब सही है तो जहाँ तक मैंनें पढ़ा है राजेन्द्र कुमार की जयन्ती कल नहीं आज २० जुलाई को ही होनी चाहिए ।
Anonymous said…
1) Mukesh - Jayanti on July 22, his son Nitin Mukesh is one of the singers
2) Parshav Gayak: Nitin Mukesh
3) Sangeetkar: Khayyam Sharmaji
4) Film: Noorie

Kish..
Ottawa, Canada.
AVADH said…
Dear Kish.. from Ottawa,
Please look up the clues nos. 3 & 4.
I have a dream = देखो मैंने देखा है यह एक सपना,
युवाओं को केंद्रित इस सफल प्रेम कहानी की फिल्म: Love Story.
अवध लाल
पुनश्च: प्रिय सुजॉय जी,
मेरा एक विनम्र अनुरोध है कि यदि आप साथ साथ प्रेरणा स्रोत मूल विदेशी गीतों को भी अपने ब्लॉग में लगा दें तो श्रोताओं को उनका भी आनंद मिल सकेगा.
कृपया विचार कीजियेगा.
आभार सहित,
अवध लाल

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