Friday, July 16, 2010

बस करना है खुद पे यकीं....शारीरिक विकलांगता से जूझते लोगों के लिए बिस्वजीत, ऋषि और सजीव ने दिया एक नया मन्त्र

Season 3 of new Music, Song # 14

विकलांगता कोई अभिशाप नहीं है, न ये आपके पूर्वजन्मों के पापों की सजा है न आपके परिवार को मिला कोई श्राप. वास्तविकता यह है कि इस दुनिया में कोई भी परिपूर्ण नहीं है, कोई न कोई कमी हर इंसान में मौजूद होती है, कुछ नज़र आ जाती है तो कुछ छुपी रहती है. इसी तरह हर इंसान में कुछ न कुछ अलग काबिलियत भी होती है. अपनी कमियों को समझकर उस पर विजय पाना ही हर जिंदगी का लक्ष्य है. इंसान वही है जो अपनी खूबियों का पलड़ा भारी कर अपनी कमियों को पछाड़ देता है, और दिए हुए संदर्भों में खुद को मुक्कम्मल साबित करता है. पर ये भी सच है कि सामजिक धारणाओं और संकुचित सोच के चलते शारीरिक विकलांगता के शिकार लोगों को समाज में अपनी खुद की समस्याओं के आलावा भी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आवाज़ महोस्त्सव के चौदहवें गीत में आज हम इन्हीं हालातों से झूझ रहे लोगों के लिए ये सन्देश लेकर आये हैं हिम्मत और खुद पे विश्वास कर अगर वो चलें तो कुछ भी मुश्किल नहीं है. सजीव सारथी के झुझारू बोलों को सुरों में पिरोया है ऋषि एस ने और आपनी आवाज़ से इस गीत में एक नया जोश भरा है बिश्वजीत नंदा ने. आशा है कि हमारा ये प्रयास बहुत से निराश दिलों में प्रेरणा भरने में कामियाब रहेगा.

गीत के बोल -

ना कमी, तुझमें कोई
अब कर ले तू, खुद पे यकीं....
जीतेगा तू, हर कदम,
बस करना है, खुद पे यकीं...

हिम्मत बुलंद यारा,
मुश्किल है ज़ंग यारा,
तुझको कसम जो छोडे हौंसले,
खुद में मुक्कम्मल है तू,
मंजिल के काबिल है तू.
दिल से मिटा दे झूठे फासले,
फासले...
हिम्मत बुलंद यारा....

न कमी तुझमे कोई,
अब करे ले तू खुद पे यकीं,
जीतेगा तू हर कदम,
बस करना है खुद पे यकीं...
तेरी काबिलियत पे
होंगें तकाजे भी,
बंद मिलेंगें तुझको
लाखों दरवाज़े भी,
इन आज़माईशों से
तुझको गुजरना होगा,
हर इम्तहानों पे
सच्चा उतरना होगा,
खुद पे भरोसा कर,
खुद अपना साथी बन
आँधियों में जले,
तू ऐसी एक बाती बन,
ना डगमगाए तेरा....
खुद पे यकीं....
खुद पे यकीं

गुन्जायिश गलतियों की,
तुझको मयस्सर नहीं,
पर तेरी मेहनत हरगिज़,
होगी बेअसर नहीं,
सोये हुनर को अपने
तुझको जगाना होगा
हाँ सबसे बेहतर है तू,
तुझको दिखाना होगा,
हाँ सबसे बेहतर है तू,
तुझको दिखाना होगा,
दुनिया क्या सोचे तू,
इसकी परवा न कर,
जो कुछ हो बस में तू
वो बे डर होकर कर गुजर,
बढ़ता ही जाए तेरा,
खुद पे यकीं,
खुद पे यकीं...

खुद पे यकीं,
खुद पे यकीं...




मेकिंग ऑफ़ "खुद पे यकीं" - गीत की टीम द्वारा

ऋषि एस:लगभग ८-९ महीने हुए जब से इस गीत की धुन बनी पड़ी है, इस दौरान मेरे संगीत में बहुत से सकारात्मक बदलाव आ चुके थे. इतने विलंबित गीत को फिर से शुरू करने के पीछे एक कारण इसका सशक्त शब्द संयोजन भी था, जिसके लिए सजीव जिम्मेदार हैं. बिस्वजीत के साथ इतने लंबे समय के बाद काम करके बहुत मज़ा आया. जो कुछ भी मेरे जेहन में था इस गीत के लिए उनके गायन में लगभग वही परिपक्क्वता मिली मुझे, जबकि मुझे उन्हें कुछ खास निर्देशन नहीं देना पड़ा, केवल मेरे गाये संस्करण को सुनकर ही उन्होंने ये कर दिखाया.

बिस्वजीत:'खुद पे यकीन' पे काम करना मेरे खुद के लिए एक ब्लेस्सिंग है. सही में मेरा मानना है की कमी अगर कही होती है वो मन में होती है. मैं मोटिवेशनल स्पीकर निक उजिसिक जी का एक बड़ा फैन हूँ जो पैदा हुए थे बिना पांव और बिना हाथ के. लकिन उनका मानना है की ईश्वर उनको ऐसा बनाए क्योंकि वो जीसस के खास बंदे है. वो बोलते है कोई घर में जब एक छोटा सा बच्चा आता है मम्मी उसका मुंह देखने के लिए तरस जाती है और जब निक ने इस दुनिया में कदम रखा, उनकी मम्मी मुंह मोड लिए थे उनसे, वो सह नहीं पाए ऐसे एक बच्चे को देखने के लिए, ऐसी ज़िंदगी थी उनकी. पर आज वो ऐसे सक्सेस की बुलंदियों को छुए है जिसको मॅग्ज़िमम लोग शायद सपनो में भी सोच नहीं सकते. आज सिर्फ़ 20/25 साल के उम्र में दुनिया के वन ऑफ दा ग्रेटेस्ट मोटिवेशनल स्पीकर है और सारे दुनिया में बाइबल का ट्रू मीनिंग लोगो को समझते है. उनका ऑर्गनाइज़ेशन आज कितने डिसेबल्ड लोगो को फाइनान्शियल और नों-फाइनान्शियल हेल्प प्रवाइड करती है. पूरे बचपन में वो एक ही सवाल पूछे थे GOD से कि उन्होने उनको ऐसा क्यों बनाए, बाइबल से आन्सर खोजे, और उनको आन्सर मिला कि भगवान जब कोई फिज़िकल कमी देते है ये बताते है की वो इंसान उनके करीब होता है. फिर वो कभी नहीं रुके, पूरे दुनिया में जीसस की बातो को स्प्रेड किए, आज एक मिलियनेर है, कितने लोगो को रोज़गार दिए है, कितने डिसेबल्ड लोगो को वो फाइनान्शियल और नों फाइनान्शियल मदद देते है. अगर ये कमी है तो सबको ऐसी कमी मिले. एसलिए कमी नहीं होती है इंसान में, अगर कोई कमी है तो सोच में. खुद पे यकीन सबको मोटीवेट करे यही आशा कर रहा हूँ.

सजीव सारथी:ऋषि के साथ इतने गाने कर चुका हूँ कि अब हम बिना बोले एक दूसरे के मन में क्या है ये समझ लेते हैं. ऋषि की सबसे बड़ी खासियत ये है कि हमेशा लीक से हटकर अर्थात रोमांस आदि विषयों से हटकर कुछ ऐसे गीत रचने की कोशिश करते हैं को समाज के लिए किसी न किसी रूप में हितकारी हों. "जीत के गीत" और "वन वर्ल्ड" जैसे गीत इन्हीं कोशिशों का नतीजा है. दरअसल मैं खुद भी कुछ नया करने में अधिक रूचि लेता हूँ. चूँकि मैं खुद भी एक शारीरिक चुनौती से लड़ रहा हूँ अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में, तो मेरे लिए आप समझ सकते हैं कि ये गीत महज एक गीत ही नहीं है. ये मेरे जीवन के लक्ष्यों में से एक है. मेरा विश्वास है कि इस दुनिया में हर इंसान के जीवन का एक उद्देश्य अवश्य होता है. और यदि आपके हिस्से में कोई शारीरिक चुनौती आई है तो उसे भी पोसिटीविली लें और बिना रुके थमे अपनी राह पर चलते चलें. मैं शुक्रगुजार हूँ ऋषि और बिस्वा का जिन्होंने इस गीत को इस अंजाम तक पहुंचाकर मेरे लक्ष्य में मेरी मदद की है. अगर इस गीत से कोई एक शख्स भी मोटिवेट होता है तो मैं खुद को खुशकिस्मत समझूंगा
बिस्वजीत
बिस्वजीत युग्म पर पिछले 1 साल से सक्रिय हैं। हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र में इनके 5 गीत (जीत के गीत, मेरे सरकार, ओ साहिबा, रूबरू और वन अर्थ-हमारी एक सभ्यता) ज़ारी हो चुके हैं। ओडिसा की मिट्टी में जन्मे बिस्वजीत शौकिया तौर पर गाने में दिलचस्पी रखते हैं। वर्तमान में लंदन (यूके) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं। इनका एक और गीत जो माँ को समर्पित है, उसे हमने विश्व माँ दिवस पर रीलिज किया था।

ऋषि एस
ऋषि एस॰ ने हिन्द-युग्म पर इंटरनेट की जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीतों के निर्माण की नींव डाली है। पेशे से इंजीनियर ऋषि ने सजीव सारथी के बोलों (सुबह की ताज़गी) को अक्टूबर 2007 में संगीतबद्ध किया जो हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत बना। हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' में ऋषि के 3 गीत संकलित थे। ऋषि ने हिन्द-युग्म के दूसरे संगीतबद्ध सत्र में भी 5 गीतों में संगीत दिया। हिन्द-युग्म के थीम-गीत को भी संगीतबद्ध करने का श्रेय ऋषि एस॰ को जाता है। इसके अतिरिक्त ऋषि ने भारत-रूस मित्रता गीत 'द्रुजबा' को संगीत किया। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में भी एक गीत का निर्माण किया। भारतीय फिल्म संगीत को कुछ नया देने का इरादा रखते हैं।

सजीव सारथी
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।
Song - Khud Pe Yakeen
Voice - Biswajith Nanda
Backup voice - Rishi S
Music - Rishi S
Lyrics - Sajeev Sarathie
Graphics - samarth garg


Song # 14, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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8 comments:

निखिल आनन्द गिरि said...

पोस्ट का शीर्षक दुरुस्त कर लें...टाइपिंग की गलती रह गई है.....
मैंने आवाज़ के सारे गाने नहीं सुने हैं....बहुत दिनों बाद कोई गाना पूरा सुन सका....गाने के बोल अच्छे हैं, मगर बालाजी की धुन सुनी हुई लगती है.....गाना सुनते-सुनते 'सुबह की ताज़गी' याद आ रही थी...म्यूज़िक में गायक थोड़ा दबकर रह गए हैं(हालांकि, मुझे म्यूज़िक की समझ ज़ीरो है लेकिन जो लगा कह रहा हूं...)...रही बात गाने के संदेश की तो हमें इस तरह के गाने एनजीओ या वैसी संस्थाओं को देने के बारे में सोचना चाहिए जो इस तरह की सेवा में जुटे हैं....शायद इस गाने से वहां किसी को प्रेरणा मिल सके....लगे रहिए सजीव जी...आपका हौसला तो खुद ही चलता-फिरता संगीत है...

Anonymous said...

badhaai sweekaarein :)
bahut sundar koshish ek sandesh dene ki. sabhi ne apne apne departments me oomdaa kaam kiya hai. bas ek baat ki kami lagii ... pronunciation me kaafi jagah problems hain... Hindi aur Urdu dono me... us par please dhyaan dijiyega.
Kuhoo

Anonymous said...

बहुत अच्छा गीत बन पड़ा है।
'हिन्द-युग्म' को आज मैंने आज पहली बार देखा, नाम पहले भी कई बार पढ़-सुन चुका हूँ। अभी समझ नहीं पाया हूँ ठीक से कि "हिन्द-युग्म" है क्या!
बिस्वजीत की आवाज़ से लगा येसुदास युवा हो गए और ताज़ादम गा रहे हैं।
ॠषि एस0 का संगीत कर्णप्रिय और सहज है, एक ही गीत के आधार पर कुछ अधिक कह नहीं पाऊँगा।
आपका गीत बड़ा सीधी-सीधी बात कहता हुआ है, सरल अन्दाज़ में और इसीलिए प्रभावी बन पड़ा है। मैं तो ये कहूँगा कि आपकी शैली गीतकार शैलेन्द्र जी जैसी है - सरल, सहज, प्रभावी। गीत में यथेष्ट ऊर्जा और जोश भी है। बिस्वजीत को बधाई - अलग से इस अदायगी के लिए।
संगीत से मुझे बहुत लगाव है, इस प्रकार के प्रयासों के लिए लॉजिस्टिक्स को जानता हूँ और इसीलिए इस प्रयास के पीछे हुई मेहनत भी समझ सकता हूँ मैं।
यह देखते हुए कि यह एक सार्थक पहल - एक मिशन जैसी कोशिश है; आप लोगों की तिकड़ी की जितनी प्रशंसा की जाए - कम है।

शुभेच्छु,
हिमान्शु मोहन

Vinay Prajapati 'Nazar' said...

बहुत सुन्दर गीत है

दिलीप कवठेकर said...

वाकई !!आप और आपकी टीम बढिया काम कर रही है.

सृजनशीलता का यह चरम स्थान है. शुभकामनायें!!

Abhimanyu said...

Ye gaana jitne dilse Biswajit gaaye hai uske liye main unko badhai dena chahunga. Rishiji ki music justice kar rahi hai feeling ke saath. Sajeevji aap ki feelings dikh rahi hai ye gaane mein. Pure hind yugm family ko badhaai aur best wishes.

Sasmita said...

Bahut achha laga ye song mujhe.

seema gupta said...

कमी, तुझमें कोई
अब कर ले तू, खुद पे यकीं....
जीतेगा तू, हर कदम,
बस करना है, खुद पे यकीं...
" जोश और उर्जा से भरा ये गीत बहुत ही पसंद आया.."
regards

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