शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

घर-जमाई - प्रेमचंद

सुनो कहानी: प्रेमचंद की "घर-जमाई"
'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में हिंदी साहित्यकार प्रेमचंद की हृदयस्पर्शी कहानी "सवा सेर गेहूं" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं मुंशी प्रेमचंद की कहानी "घर-जमाई", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 15 मिनट 59 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।







मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)


हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी


इस घर में वह कैसे जाय? क्या फिर वही गालियाँ खाने, वही फटकार सुनने के लिए?
(प्रेमचंद की "घर-जमाई" से एक अंश)



नीचे के प्लेयर से सुनें.
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)








यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3
#Fourty Fourth Story, Gharjamai: Premchand/Hindi Audio Book/2009/38. Voice: Anurag Sharma

7 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

बहुत सुन्दर और लाजबाब संग्रह आप अपने ब्लॉग पर कर रहे है, इसके लिए बधाई ! मैं तो अपने स्कूल के दिनों में जो प्रेमचंद की कहानियों की किताब पाठ्यकर्म में होती थी, एक ही दिन में पढ़ डालता था !

सजीव सारथी ने कहा…

बढ़िया कहानी चुनी है एक बार फिर....ट्विस्ट अच्छा लगा....अनुराग जी बधाई

सजीव सारथी ने कहा…

बढ़िया कहानी चुनी है एक बार फिर....ट्विस्ट अच्छा लगा....अनुराग जी बधाई

अर्शिया ने कहा…

बहुत सुंदर प्रयास है, आभार।
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स्त्री के चरित्र पर लांछन लगाती तकनीक।
चार्वाक: जिसे धर्मराज के सामने पीट-पीट कर मार डाला गया।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर काम किया अनुराग जी, अमि तो पुजारी हुं प्रेमचंद जी का.

धन्यवाद

दिलीप कवठेकर ने कहा…

मैने बचपन में प्रेमचंद जी को कहीं कहीं पढा था, क्योंकि मैं मरठी मीडीयम में पढा पहले, बाद में हिन्दी.

मगर यहां तो एक नया इतिहास ही रचा जा रहा है आपके और अनुराग जी के द्वारा, कि पूरी कहानीयां नई पीढी के लिये श्रव्य माध्यम में उपलब्ध है.आप सभी धन्यवाद के पात्र हैं.

अगर संभव होता तो इसे दृष्य श्रव्य माध्यम में भी तब्दील किया सकता था, अगरचे कोई बढिया चित्रकार इन में से मुख्य घटनाओं को चित्रित भी करे.

Shamikh Faraz ने कहा…

बहुत शानदार कहानी और साथ ही खुबसूरत पेशकश. मुबारकबाद.

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