रविवार, 28 दिसंबर 2008

वार्षिक गीतमाला (पायदान ५० से ४१ तक)

वर्ष २००८ के श्रेष्ट ५० फिल्मी गीत (हिंद युग्म के संगीत प्रेमियों द्वारा चुने हुए),पायदान संख्या ५० से ४१ तक

५० वीं पायदान

नम्बर ५० पर है फ़िल्म "किड्नाप" का दर्द भरा गीत जिसे गाया है संदीप व्यास ने और वही इस गीत की सबसे बड़ी खासियत भी हैं. संगीत भी ख़ुद संदीप और उनके भाई संजीव का बनाया हुआ है, बोल भी ख़ुद संदीप और संजीव ने ही रचे हैं. संजय गाधवी की इस फ़िल्म को दर्शकों का प्यार नही मिला, इस साल के हॉट शॉट हीरो इमरान खान की खलनायकी भी इसे डूबने से नही बचा पायी. पर संगीत प्रेमियों के इस बेहद प्रभाशाली संगीत जोड़ी का काम अनदेखा नही होने दिया. "मिट जाए" मिट कर भी नही मिटा, तभी कोई इसे पचासवीं पायदान से नही पाया हटा.


४९ वीं पायदान

४९ वीं पायदान पर है अज़ीज़ मिर्जा के निर्देशन में बनी रोमांटिक फ़िल्म किस्मत कनेक्शन का गीत "कहीं न लागे मन", पहला नशा की तर्ज पर बने इस गीत में वही सवाल है जो हर नया नया प्रेमी ख़ुद से पूछता है यानी - क्या यही प्यार है. थीम वही पुराना है पर गीत फ़िर भी सुनने में मधुर लगता है. शब्बीर अहमद के बोलों को सुरों से सजाया है प्रीतम ने और आवाजें हैं श्रेया घोसाल और मोहित चौहान की. "डूबा डूबा" से शुरुआत करने वाले मोहित अब इंडस्ट्री में अपने पैर जमा चुके हैं, उनकी आवाज़ में मिठास भी है और मौलिकता भी. "कहीं न लागे मन" ने हासिल किया है ४९ वां स्थान, श्रेया और मोहित की आवाजों ने दिया गीत को नया आसमान...



४८ वीं पायदान

अन्विता दत्त गुप्तन के बोलों को विशाल शेखर ने संगीत से सजाया है और गाया है इसी जोड़ी ने विशाल ददलानी ने अपने अलग अंदाज़ में. दोस्ती और दोस्ताने पर पहले भी हिन्दी फिल्मों में ढेरों गीत लिखे जा चुके है. पर ये पूरी तरह से आज के दौर का गीत है. इसकी मौलिकता ही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. अभिषेक बच्चन, जॉन अब्राहम और प्रियंका चोपडा के अभिनय से सजी ये फ़िल्म बेहद मनोरंजक है. और ये गीत भी है कुछ विशिष्ट. ४८ वीं पायदान पर जमाया कब्जा दोस्ताना के दोस्ताने ने, फ़िल्म को भी खूब सराहा शहरों के जवानों ने....


४७ वीं पायदान

बच्चों के लिए एक बेहद मनोरंजक फ़िल्म आई थी साल के शुरू में, थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक. जिसके लेखक निर्माता और निर्देशक थे कुणाल कोहली. यश राज बैनर के तले बनी ये फ़िल्म कुणाल की पिछली फ़िल्म फ़ना जैसी कमियाबी तो नही पा सकी पर गीत सभी बेहद बेहद अच्छे बने थे इस फ़िल्म के. प्रसून जोशी यहाँ अपने तारे ज़मीन पर वाले फॉर्म में नज़र आए तो शंकर एहसान और लॉय का संगीत भी दमदार रहा, इस मधुर गीत की आवाज़ दी है ख़ुद शंकर महादेवन ने. "प्यार के लिए" थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक मांगता है, इस मधुर गीत में प्रसून में शब्दों का जादू बोलता है.



४६ वीं पायदान

एक कदम और आगे बढ़ते हैं. मुंबई हादसे के बाद इस गीत ने सबका ध्यान अपनी तरफ़ खींचा. इस साल की एक बेहद चर्चित लीक से हट कर बनी फ़िल्म आमिर ने फ़िल्म निर्माण का एक नया पहलू दुनिया के लिए खोला. गीत को लिखा है अमिताभ वर्मा ने और स्वरबद्ध किया है अमित त्रिवेदी ने. अमिताभ वर्मा और शिल्पा राव की के गाये इस गीत में संवेदनाएं उभरकर सामने आती है. "एक लौ" ने रुलाया हर हिन्दुस्तानी को, सबने याद किया शहीदों की कुर्बानी को.


४५ वीं पायदान

जावेद जब्बार की लिखी एक बेहद सशक्त कहानी जो सच्ची घटनाओं पर आधारित है, को निर्देशित किया महरीन जब्बार ने और यकीन मानिये अपने पहली ही निर्देशित फ़िल्म में इस निर्देशक ने कमाल का काम किया है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं फ़िल्म रामचंद पाकिस्तानी की जिसके इस नर्मो नाज़ुक गीत को बेहद उन्दा गाया है शफ़क़त अमानत अली ने. बोल लिखे हैं अनवर मक़सूद ने और संगीतकार हैं देब्याज्योती मिश्रा. "फ़िर वही रास्ते" गीत ने मिटाई सरहदी रेखा, रॉक बैंड फ़ुज़ोन के लीड गायक का एक नया रूप सबने देखा...



४४ वीं पायदान

तारा राम पम और सलाम नमस्ते जैसी फिल्में बनाने के बाद निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने अपनी नई फ़िल्म बचना ऐ हसीनों के लिए चुना रणबीर कपूर और दीपिका पदुकोन की चर्चित रोमांटिक जोड़ी को. हिट संगीत दिया एक बार फ़िर विशाल शेखर ने. अन्विता दत्त गुप्तन ने एक बार फ़िर कलम का जौहर दिखलाया. इस गीत की एक और खासियत है बहुत दिनों में सुनायी पड़ी लक्की अली की आवाज़, साथ में है श्रेया घोसाल. चढ़ता है नशा इस गीत का अहिस्ता अहिस्ता, सुन कर लक्की और श्रेया की मधुर आवाजें होश हो जाते हैं लापता...


४३ वीं पायदान

नीरज श्रीधर और सुनिधि चौहान का गाया "ख्वाब देखे" गीत है इस पायदान पर. संगीतकार हैं प्रीतम और लिखा है इसे समीर ने. इस तेज़ रफ़्तार फ़िल्म का संगीत भी काफी तेज़ रफ़्तार है. सितारों से भरी इस फ़िल्म की खासियत ये है की इस फ़िल्म में सभी किरदार नेगेटिव हैं. "ख्वाब देखे झूठे मूठे" गाया जब सुनिधि ने, जवान दिल झूम उठे वो समां बंधा सुनिधि ने.



४२ वीं पायदान

माँ दा लाडला एक साधारण गीत नही एक स्टेटमेंट है. बेशक फ़िल्म विदेश में शूट हुई है और अजय ब्रहमत जी ने इस कहा कि ये भारतीय परिवेश की फ़िल्म नही है. सही है, पर इस फ़िल्म में एक संवेदनशील मुद्दे को बेहद हलके फुल्के अंदाज़ में दिखाया गया है. बिगड़ रहे हैं कहीं न कहीं माँ दे लाडले अगर हम संकेत समझें इस गीत का. समीर मर्चंट के गाये इस गीत को लिखा है अन्विता दत्त गुप्तन ने और संगीत है एक बार फ़िर विशाल शेखर का. बिगड़ रहे हैं माँ दे लाडले संकेत है ऐसा मिलता, बिन आग के कभी धुवाँ नही उठता...


४१ वीं पायदान

साल की सबसे अन्तिम फ़िल्म गजिनी को मिला संगीतकार ऐ आर रहमान का साथ, प्रसून अपने बेहतरीन फॉर्म में नही हैं यहाँ पर रहमान के प्रिये गायक बेन्नी दयाल और श्रेया ने अपनी आवाजों से इस गीत में जान डाल दी है. फ़िल्म को खासी लोकप्रियता मिल रही है और संगीत भी लोगों की जुबान पे चढ़ रहा है. "कैसे मुझे तू मिल गयी" पुछा जब बेन्नी दयाल ने, गीत को पहुँचाया ४१ वीं पायदान पर रहमान के कमाल ने





चुनिए वर्ष के सर्वश्रेष्ठ संगीतकार, आवाज़ की टीम द्वारा चुने गए इन ४ नामों में से -

ऐ आर रहमान फ़िल्म जोधा अकबर के लिए

ऐ आर रहमान फ़िल्म जाने तू या जाने न के लिए

शंकर एहसान लॉय फ़िल्म रॉक ऑन के लिए और

सलीम सुलेमान फ़िल्म रब ने बना दी जोड़ी के लिए

या कोई अन्य

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