Tuesday, December 30, 2008

वार्षिक गीतमाला (पायदान ४० से ३१ तक)

वर्ष २००८ के श्रेष्ट ५० फिल्मी गीत (हिंद युग्म के संगीत प्रेमियों द्वारा चुने हुए),पायदान संख्या ४० से ३१ तक

पिछले अंक में हम आपको ५०वीं पायदान से ४१वीं पायदान तक के गीतों से रूबरू करा चुके हैं। उन गीतों का दुबारा आनंद लेने के लिए यहाँ जाएँ।

४० वीं पायदान - आशियाना(फैशन)

४०वें पायदान पर फिल्म "फैशन" का गीत "आशियाना" काबिज़ है। इस गीत के बोल लिखे हैं इरफ़ान सिद्दकी ने और सुरबद्ध किया है सलीम-सुलेमान की जोड़ी ने। इस गीत को सलीम मर्चैंट(सलीम-सुलेमान की जोड़ी से एक) ने अपनी आवाज़ से जीवंत किया है। मधुर भंडारकर की यह फिल्म "फैशन" अपने विषय के साथ-साथ अपने गीतों के कारण भी चर्चा में रही है।



३९ वीं पायदान - अलविदा(दसविदानिया)

कैलाश खेर यूँ तो अपनी आवाज़ और संगीत के कारण संगीत-जगत में मकबूल हैं। लेकिन जो बात बहुत कम लोग जानते हैं, वह यह है कि अमूमन अपने सभी गानों के बोल कैलाश हीं लिखते हैं।अलविदा भी उनकी त्रिमुखी प्रतिभा का साक्षात उदाहरण है। "दसविदानिया" अपनी सीधी-सपाट कहानी, हद में किए गए अभिनय और "कौमन मैन" की छवि वाले नायक के कारण फिल्मी जगत के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। जिन्हें "दसविदानिया" का अर्थ न मालूम हो या जिन्होंने जानने की कभी कोशिश न की हो, उन्हें बता दूँ कि "दसविदानिया" एक रसियन वर्ड है,जिसका अर्थ होता है "गुड बाय/अलविदा" ।


३८ वीं पायदान - ओए लकी लकी ओए(ओए लकी लकी ओए)

आजकल हिन्दी फिल्म-उद्योग में पंजाबी गानों की धूम मची हुई है।इसी का असर है कि पिछले साल आई "मौजा हीं मौजा" या फिर इस साल आए "सिंह इज किंग" में अपनी आवाज का लोहा मनवाए हुए मिका सिंह इस गाने में भी अपनी मौजूदगी का अहसास दिला जाते हैं। इस गीत को अपनी धूनों से सजाया है "स्नेहा खनवल्कर" ने, जिन्होंने अपने कैरियर की शुरूआत राम गोपाल वर्मा के "गो" से की थी। निस्संदेह "गो" का किसी को पता नहीं,लेकिन "ओए लकी लकी ओए" से बालीवुड में स्नेहा की री-इंट्री कई उम्मीदें जगाती है। इस गीत के बोल लिखे हैं निर्देशक दिवाकर बनर्जी( खोसला का घोसला फेम), उर्मी जुवेकर एवं मनु ऋषि ने। तेज धुन की यह गीत झूमने पर मजबूर करती है।


३७ वीं पायदान - मन्नताँ(हीरोज)

यूँ तो "हीरोज" बाक्स-आफिस पर पीट गई,लेकिन फिल्म का यह गीत दर्शकों और श्रोताओं पर असर करने में कामयाब साबित हुआ। इसे सोनू निगम और कविता कृष्णमूर्ति की आवाज़ का जादू कहें , साजिद-वाजिद की स्वर-लहरियों का नशा या फिर जलीस शेरवानी-राहुल सेठ की कलम का हुनर,यह गीत कहीं से भी निराश नहीं करता। इस गाने की सबसे बड़ी खासियत है फिल्म इंडस्ट्री में कविता कृष्णमूर्ति की वापसी।


३६ वीं पायदान - सहेली जैसा सैंया(यू,मी और हम)

बाक्स आफिस के अब तक के रिकार्ड यही बताते हैं कि अजय देवगन ने अभिनय के अलावा जिस भी क्षेत्र में अपने कदम बढायें है, सौदा नुकसानदायक हीं साबित हुआ है, फिर चाहे वो फिल्म-निर्माण हो(राजू चाचा,यू मी और हम) या फिर निर्देशन(यू,मी और हम)। इस फिल्म में अजय देवगन सातवीं बार अपनी पत्नी काजोल के साथ अभिनय करते नज़र आए हैं,लेकिन इस बार "लेडी लक" भी अजय देवगन की नौका पार नहीं करा पाया। रही बात गाने की तो, इस गाने का मूल आकर्षण है "सुनिधि चौहान" की आवाज़। वैसे तो "मुन्ना धीमन" के अनकन्वेंशनल बोल एवं विशाल भारद्वाज का रूमानी संगीत भी बेहतरीन है,लेकिन "सुनिधि" का जादू हीं इस गाने की जान है।


३५ वीं पायदान - नज़रें मिलाना(जाने तू या जाने ना)

ए०आर० रहमान-- नाम हीं काफी है, किसी ने सच हीं कहा है। इस गाने की यू०एस०पी० का पूरा श्रेय ए०आर० रहमान को जाता है। फिल्म-इंडस्ट्री में यह विख्यात है कि जिस खूबी से रहमान गायकों का प्रयोग करते हैं,वैसा कोई भी संगीतकार नहीं कर पाता। इस गाने को सात गायकों ने अपनी आवाज़ दी है- अनुपमा देशपांडे, बेनी दयाल(आवाज़ हूँ मैं(युवराज),कैसे मुझे तू मिल गई(गज़नी) फेम),दर्शना, नरेश अय्यर(पाठशाला,रूबरू फेम), सतीश चक्रवर्ती, श्वेता भार्गवे एवं तन्वी। इस गाने के बोल लिखे हैं, इस फिल्म के लेखक एवं निर्देशक अब्बास टायरवाला ने। यह फिल्म अपनी अप्रत्याशित सफलता के कारण अब्बास टायरवाला के लिए निर्देशक के रूप में ड्रीम डेब्यु साबित हुई है।


३४ वीं पायदान - हा रहम(महफ़ूज़)(आमिर)

साधारण स्टार-कास्ट लेकिन असाधारण कहानी के साथ आई यह फिल्म सबों के दिल को छू गई। ऎसा लगा मानो अपनी हीं कहानी है। टीवी जगत से आए "राजीव खंडेलवाल" ने लाचार लेकिन आत्मविश्वासी "आमिर" के रूप में अपनी अदायगी से अपनी क्षमता का लोहा मनवा दिया। निर्देशन के क्षेत्र में पहली बार उतरे "राज कुमार गुप्ता" ने अपनी हीं कहानी "आमिर" को बड़े पर्दे पर बखूबी उतारा है। अमिताभ वर्मा के बोल और अमित त्रिवेदी के संगीत से सजे "महफ़ूज" में वह सारी बात है जो दिल को छूने के लिए काफ़ी होती है। गायकी में अमित और अमिताभ का साथ दिया है ए०आर०रहमान की खोज मुर्तजा कादिर( चुपके से(साथिया) फेम) ने।


३३ वीं पायदान - अल्लाह अल्लाह(खुदा के लिए)

"खुदा के लिए" एक पाकिस्तानी उर्दू फिल्म है,जिसे अपने लेखन एवं निर्देशन से संवारा है शोएब मंसूर ने।प्रमुख सितारे हैं- पाकिस्तान के सुपर स्टार शान, ईमान अली एवं फवाद खान। यह फिल्म पाकिस्तान की सबसे बड़ी व्यावसायिक फिल्म साबित हुई है।यह फिल्म अपने कंटेंट के कारण विवादों में रही और इस कारण इसके कई दृश्यों पर कैंची चली। इस बदकिस्मती की मार इस फिल्म के सबसे बेहतरीन सीन पर भी पड़ी,जिस कारण दर्शक नसीरूद्दीन शाह की लाजवाब अदायगी का जलवा देखने से वंचित रह गए। "अल्लाह-अल्लाह" गाने की बात करें , तो इसे संगीत से सजाया है खवर जवाद ने और आवाजें दी हैं सईन ज़हूर एवं ज़रा मदानी ने। इस गाने में "अल्लाह-अल्लाह" कहने का तरीका श्रोता को अंदर तक रोमांचित कर देता है।


३२ वीं पायदान - जाने तू मेरा क्या है(जाने तू या जाने ना)

फिर से ए०आर०रहमान एवं अब्बास टायरवाला का जादू। इस साल ए०आर०रहमान ने पाँच फिल्मों का संगीत-निर्माण किया और हर फिल्म के हर गीत का मूड दूजे से जुदा। इस गाने को अपनी आवाज़ से मुकम्मल किया है रूना रिज़वी ने। इस गाने के साथ एक दिलचस्प कहानी जुड़ी है। इस फिल्म के निर्माता आमिर खान, निर्देशक अब्बास टायरवाला एवं आमिर खान के भाई एवं इस फिल्म के निर्देशन-सहयोगी मंसूर खान इस गाने का वीडियो फिल्म में नहीं रखना चाहते थे,इसलिए फिल्म इस गाने के बिना हीं रीलिज की गई। इस बात का जिक्र आमिर ने खुद अपने ब्लाग पर किया है।एक सप्ताह बाद दर्शकों की माँग पर इस गाने को फिल्म में डाला गया। और लोगों की मानें तो इस गाने का पिक्चराईजेशन कमाल का है, काले लिबास में जेनेलिया को देखकर युवाओं की साँसें रूकी की रूकी रह जाती है।


३१ वीं पायदान - बहका(गज़नी)

इस गाने के साथ ए०आर०रहमान ने अलग हीं तरह का प्रयोग किया है,विशेषकर "धक-धक धड़कन" वाली पंक्ति में। चूँकि यह गाना नया है और कहा जाता है कि रहमान का संगीत शराब की तरह धीरे-धीरे चढता है,इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में यह गीत लोगों के सर चढ कर बोलेगा। प्रसून जोशी ने बेहतरीन बोल लिखे हैं। रंग दे बसंती के बाद प्रसून जोशी एवं रहमान की एक साथ यह दूसरी फिल्म है। गुलज़ार, जावेद अख्तर, महबूब जैसे दिग्गजों के साथ काम कर चुके स्वयं रहमान ने इस गाने में प्रसून की पंक्तियों एवं लेखन-कला की बड़ाई की है। इस गाने को अपनी आवाज़ से सजाया है साऊथ के सेनसेशन एवं रहमान के फेवरिट कार्तिक ने।


सभी गानों को यहाँ सुनें:


चुनिए वर्ष के सर्वश्रेष्ठ संगीतकार, आवाज़ की टीम द्वारा चुने गए इन ४ नामों में से -

ऐ आर रहमान फ़िल्म जोधा अकबर के लिए

ऐ आर रहमान फ़िल्म जाने तू या जाने न के लिए

शंकर एहसान लॉय फ़िल्म रॉक ऑन के लिए और

सलीम सुलेमान फ़िल्म रब ने बना दी जोड़ी के लिए

या कोई अन्य

आप अपनी पसंद यहाँ टिपण्णी कर दे सकते हैं या फ़िर मेल करें podcast.hindyugm@gmail.com पर

3 comments:

प्रकाश बादल said...

जानकारी के लिए शुक्रिया

प्रकाश बादल said...

This post has been removed by the author.

सजीव सारथी said...

ये दसों गीत मुझे बेहद पसंद हैं, हा रहम तो विशेष तौर पर, कितनी अच्छी बात है कि इस सूची में इतने सारे नए नाम हैं....प्रतिभाओं का भंधार है यहाँ और अब सब के लिए दरवाज़े खुल गए हैं no more monopolies...बहका के बारे में आपने सही कहा....शुरू में इतना बढ़िया नही लग रहा था....अब तो सर चढ़ कर बोल रहा है गाना....वाकई प्रून ने जबरदस्त काम किया है, कल्पना कीजिये इतनी मुश्किल धुन पर सार्थक बोल लिखना कोई आसान काम है क्या....और सबसे अच्छी बात गीत का फिल्मांकन ...कमाल का है....शायाद साल का सबसे बेहतर फिल्मांकित और कोरेओग्रफ गीत है ये

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ