Tuesday, October 13, 2009

आये तुम याद मुझे, गाने लगी हर धड़कन...जब याद आये किशोर और अशोक एक साथ तो क्यों न ऐसा हो

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 231

ज है १३ अक्तुबर का दिन। फ़िल्म जगत के लिए आज का दिन बड़ा मायने रखता है, क्योंकि आज का दिन एक नहीं बल्कि दो ऐसे कलाकारों को याद करने का दिन है जिन्होने इस फ़िल्म जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। ये दो लेजेंडरी फ़नकार अपने अपने क्षेत्र के महारथी तो थे ही, वे एक दूसरे के सगे भाई भी थे। इनमें से एक का आज जन्मदिन है और दूसरे की पुण्यतिथि। कितनी अजीब बात है कि दादामुनि अशोक कुमार का जन्मदिन और किशोर कुमार की पुण्यतिथि एक ही है, १३ अक्तुबर। १३ अक्तुबर १९११ को अशोक कुमार का जन्म हुआ था और १३ अक्तुबर १९८७ को किशोर दा हमें छोड़ गए थे हमेशा के लिए। जी हाँ, १३ अक्तुबर १९८७। अपने बड़े भाई के जन्मदिन पर अनूप कुमार के साथ मिलकर किशोर दा उन्हे एक सरप्राइज़ देना चाहते थे, जिसके लिए वे शाम को ५:३० बजे मिलने वाले थे। पर यह हो ना सका और समय ने ही सारी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। नियति अपने दस्तावेज़ पर किशोर का नाम लिख कर चला गया, और वो मदहोश करने वाली आवाज़ हमेशा के लिए ख़ामोश हो गयी, और तब से लेकर आज तक वो आवाज़ बसी हुई है हमारी यादों में, हमारे दिलों में, हमारी ज़िंदगियों में। आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में हम दादामुनि और किशोर दा को एक साथ याद कर रहे हैं एक ऐसे फ़िल्म के ज़रिए जिसमें इन दोनों ने अपने अपने क्षेत्र का लोहा मनवाया है। फ़िल्म 'मिली' का यह गीत है "आए तुम याद मुझे, गाने लगी हर धड़कन, ख़ुशबू लाई पवन, महका चंदन"। सचिन देव बर्मन का संगीत है और गीत रचना है योगेश की।

फ़िल्म 'मिली' की कहानी कुछ इस तरह की थी कि मिली (जया बच्चन) एक बहुत ही हँसमुख और ज़िंदादिल लड़की है, जो अपने पिता (अशोक कुमार) के साथ एक हाउसिंग् कॊम्प्लेक्स में रहती है। उसे उस कॊम्प्लेक्स के बच्चों से बहुत लगाव है और वो उन्ही के दल में भिड़ कर दिन भर सारी शैतानियाँ करती रहती हैं। याद है ना लता जी का गाया "मैने कहा फूलों से" गीत? तो साहब, ऐसे में उस बिल्डिंग में आ बसते हैं हमारे अमिताभ बच्चन साहब (किरदार का नाम मुझे याद नहीं), जो एक निहायती गम्भीर, बद-मिज़ाज नौजवान है जिसके चेहरे पर शायद ही कभी मुस्कुराहट आयी हो! किस तरह से मिली उसका दिल जीत लेती है, और उसके दिल पर क्या असर होता है जब उसे पता चलता है कि मिली को कैन्सर है, यही है इस फ़िल्म की कहानी। कहानी के अंत में मिली को अपने पिता के साथ चिकित्सा के लिए अमेरिका जाते हुए दिखाया जाता है, और वहीं पर फ़िल्म समाप्त हो जाती है। एक पिता को जब पता चलता है कि उसकी एकलौती बेटी को कैन्सर है, तो उन पर क्या बीतता है, दादामुनि के सशक्त अभिनय प्रतिभा ने उस किरदार में जान डाल दी है। नैचरल ऐक्टिंग् की जब बात आती है, तो दादामुनि का नाम शुरुआती नामों में ही लिया जाता है। और इस फ़िल्म में गुरुगम्भीर अमिताभ बच्चन के चरित्र के अनुसार किशोर दा ने दो गीत ऐसे गाए हैं कि बस पूछिए मत। अपने हास्य गीतों और मैनरिज़्म्स से गुदगुदानेवाले किशोर दा जब भी ऐसे संजीदे गीत गाते थे तब उनका रूप ही बिल्कुल बदल जाता था। यकीन ही नहीं होता कि ये दोनों रूप एक ही इंसान के हैं। आज के इस प्रस्तुत गीत के अलावा किशोर दा का गाया "बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी" ना केवल इस फ़िल्म के चरित्र को जीवंत करता है, बल्कि किशोर दा के निजी ज़िंदगी में भी जो सूनापन उन्होने हमेशा महसूस किया है (उनकी माँ की मृत्यु के बाद से), उसका दर्द भी उनकी आवाज़ में उभर आई है। आज १३ अक्तुबर २००९, किशोर दा के गए २२ साल हो गए हैं, लेकिन उनके गाए गानों में आज भी वही ताज़गी बरककार है, और हमेशा ही किशोर दा सदाबहार रहेंगे। दादामुनि और किशोर दा के लिए चलते चलते हम बस यही कहेंगे कि "आए तुम याद मुझे, गाने लगी हर धड़कन, ख़ुशबू लाई पवन, महका चंदन"।



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा तीसरा (पहले दो गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी और स्वप्न मंजूषा जी)"गेस्ट होस्ट". अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. खुद संगीतकार की आवाज़ है इस गीत में.
२. हालाँकि गीतकार के रूप में प्रेम धवन का नाम दर्ज है पर असल में गीत को लिखा है खुद संगीतकार ने.
३. मुखड़े में शब्द है- "खेल".

पिछली पहेली का परिणाम -

हमारी पिछली पहेली के विजेता आज के गीत का शीर्षक देख कर कुछ हैरान परेशान हो गए होंगें, दरअसल कल जिस गीत के बाबत हमने पहेली पूछी थी वो गीत हम जल्द ही आपको सुन्वायेंगें, चूँकि आज के दिन की महत्ता को ध्यान में रख कर हमें आखिर लम्हों में निर्धारित गीत को इस गीत से बदलना पड़ा, रोहित जी आप बेफिक्र रहें आपके २ अंक सुरक्षित हैं. आपका जवाब "ये दिल है मुश्किल जीना यहाँ" एकदम सही है, ये गीत २२ अक्तूबर को प्रसारित होगा, और २१ अक्तूबर की पहेली में आपके लिए कुछ विशेष होगा.

खोज और आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

5 comments:

Anonymous said...

3RD clue easy tha... kismat ke khel nirale mere bhaiya.

ROHIT RAJPUT

राज भाटिय़ा said...

वेसे तो मेरे पास सभी गीत है, लेकिन ऎसे अचानक सुन कर अच्छा लगता है, बहुत सुंदर याद गार गीत सुनाया. धन्यवाद, पहेली बुझने वाले अभी तक नही आये... ओर इस नामी भाई ने जबाब भी दे दिया.
माफ़ी चाहूंगा मेने नाम बाद मै पढा रोहित राज पुत जी ने जबाब भी दे दिया

शरद तैलंग said...

रोहित जी का जवाब सही ही है ।
गायक है संगीतकर : रवि
फ़िल्म : एक फूल दो माली

शरद तैलंग said...

किस्मत के खेल निराले मेरे भैया
किस्मत का लिखा कौन टाले मेरे भैया ।

किस्मत के हाथ में दुनिया की डोर है
किस्मत के आगे तेरा कोई न ज़ोर है
सब कुछ है उसी के हवाले मेरे भैया ।

किस्मत में लिक्खा है जो सुख का सबेरा
कब तक रहेगा ये ग़म का आंधेरा
इक दिन तो मिलेंगे उजाले मेरे भैया ।

ये सच्चा तीरथ ऊँचा हिमालय
ये मन का मन्दिर सुख का शिवालय
धूनी यहीं पे रमा ले मेरे भैया ।

दुनिया में प्राणी क्या क्या सपने सजाए
किस्मत की आँधी उन्हे पल में मिटाए
बिगड़ी को कौन संभाले मेरे भैया ।

Shamikh Faraz said...

किशोर डा की पुण्यतिथि के हिसाब से बढ़िया गाना चुना आपने.

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