शनिवार, 8 मई 2010

बाबू की बदली - हरिशंकर परसाई

सुनो कहानी: हरिशंकर परसाई की "बाबू की बदली"

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अर्चना चावजी की आवाज़ में हिंदी के अमर साहित्यकार पंडित सुदर्शन की कहानी "अठन्नी का चोर" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर परसाई की मार्मिक कहानी "बाबू की बदली", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी "बाबू की बदली" का कुल प्रसारण समय 15 मिनट 11 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।



मेरी जन्म-तारीख 22 अगस्त 1924 छपती है। यह भूल है। तारीख ठीक है। सन् गलत है। सही सन् 1922 है।
~ हरिशंकर परसाई (1922-1995)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी

ये टेढ़ी राह वाले दिन में तो सीधे चलते हैं परन्तु रात में चुपचाप सीधी राह पर गड्ढे खोदते हैं।
(हरिशंकर परसाई के व्यंग्य "बाबू की बदली" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें।
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)


यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3

#72th Story, Babu Ki Badli: Harishankar Parsai/Hindi Audio Book/2010/17. Voice: Anurag Sharma

8 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

आनन्द आ गया सुन कर.

RAJ SINH ने कहा…

यह कहानी पढ़ चूका हूँ ,परन्तु परसाई जी के व्यंग की धर को स्वर देकर आपने इसे नयी मार्मिकता दी है . धन्यवाद .

विजयप्रकाश ने कहा…

बहुत बढ़िया...

विश्व दीपक ने कहा…

बेहद मार्मिक कहानी।

आनंद और विषाद में बस एक क्षण का अंतर होता है, यह इस कहानी को सुनकर मालूम हो गया।

धन्यवाद,
विश्व दीपक

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

आप सभी का हार्दिक धन्यवाद!

kase kahun?by kavita verma ने कहा…

dil kanp gaya ant sunkar.... bahut marmik kahani.....

Raman ने कहा…

wah ji wah...aanad se bhav vibhor ho gya ... Main kab se talash raha tha, aur aaj mann ko shanti mili...kripya aise hi aur bhi prayas karte hai ... Jai Hind

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

आज सुना। :-(

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