गुरुवार, 27 मई 2010

पार्श्वगायकों और अभिनेताओं की भी जोडियाँ बनी इंडस्ट्री में, जो अभिनय और आवाज़ में एकरूप हो गए

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३७

मोहम्मद रफ़ी शम्मी कपूर की आवाज़ हुआ करते थे। इस जोड़ी ने ६० के दशक में फ़िल्म जगत में वो हंगामा किया कि अब वो इतिहास बन चुका है। आज पेश है रफ़ी और शम्मी साहब की जोड़ी का एक सदाबहार गीत फ़िल्म 'तीसरी मंज़िल' से। पंचम की धुन पर मजरूह साहब के बोल। लेकिन गीत सुनवाने से पहले आज शम्मी कपूर के कुछ शब्द रफ़ी साहब के बारे में। सौजन्य विविध भारती पर प्रसारित रफ़ी साहब को समर्पित 'विशेष मनचाहे गीत' कार्यक्रम जो प्रसारित हुआ था ३१ जुलाई २००५ को। शम्मी जी कहते हैं, "रफ़ी साहब का 'रेंज' बहुत बढ़िया और 'वास्ट' था। अलग अलग 'हीरोज़' के लिए अलग अलग 'स्टाइल' में गाते थे। मेरे लिए भी एक अलग 'स्टाइल' था। मेरी उनसे पहली मुलाक़ात हुई 'तुमसा नहीं देखा' के एक गाने की 'रिकार्डिंग्' पर। वो मेरा इंतज़ार कर रहे थे। मैं पहुँचा तो मुझसे पूछने लगे कि गाने में कैसी हरकत करनी है?' मैं उनसे कहता था कि 'यहाँ पे मैं ऐसा हरकत करूँगा, अगर आप इस जगह ऐसा गायेंगे तो अच्छा रहेगा', और वो वैसा ही कर देते। एक गाना था फ़िल्म 'कश्मीर की कली' में "तारीफ़ करूँ क्या उसकी जिसने तुम्हे बनाया", मैं चाहता था कि इस गाने के एंड में लाइन रिपीट होती रहे, और मैं गाते गाते अंत में पानी में गिर पड़ूँ। जब मैने यह बात बतायी तो रफ़ी साहब को तो पसंद आयी पर नय्यर साहब ने इंकार कर दिया यह कहकर कि गाना ख़ामख़ा लम्बा हो जायेगा। अंत में रफ़ी साहब ने कहा कि 'गाना मैं गाऊंगा, आप लोगों को तक़लीफ़ क्यों हो रही है?' और इस तरह से रफ़ी साहब की वजह से मेरी वो ख़्वाहिश पूरी हुई थी। हम लोग कभी कभी रात को एक साथ बैठकर गाना गाते। शंकर, जयकिशन, रोशन, रफ़ी साहब, और मैं, रात ११/१२ बजे बैठ जाते और हम सब क्लासिकल म्युज़िक गाते, मैं भी गाता, बहुत ही हसीन घड़ियाँ थे वो सब!"

ओल्ड इस गोल्ड एक ऐसी शृंखला जिसने अंतरजाल पर ४०० शानदार एपिसोड पूरे कर एक नया रिकॉर्ड बनाया. हिंदी फिल्मों के ये सदाबहार ओल्ड गोल्ड नगमें जब भी रेडियो/ टेलीविज़न या फिर ओल्ड इस गोल्ड जैसे मंचों से आपके कानों तक पहुँचते हैं तो इनका जादू आपके दिलो जेहन पर चढ कर बोलने लगता है. आपका भी मन कर उठता है न कुछ गुनगुनाने को ?, कुछ लोग बाथरूम तक सीमित रह जाते हैं तो कुछ माईक उठा कर गाने की हिम्मत जुटा लेते हैं, गुजरे दिनों के उन महान फनकारों की कलात्मक ऊर्जा को स्वरांजली दे रहे हैं, आज के युग के कुछ अमेच्युर तो कुछ सधे हुए कलाकार. तो सुनिए आज का कवर संस्करण

गीत -तुमने मुझे देखा...
कवर गायन -रफीक शेख




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रफीक शेख
रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया। रफ़ीक ने पिछले वर्ष अहमद फ़राज़ के मृत्यु के बाद श्रद्धाँजलि स्वरूप उनकी दो ग़ज़लें (तेरी बातें, ज़िदंगी से यही गिला है मुझे) को संगीतबद्ध किया था। बम्पर हिट एल्बम 'काव्यनाद' में इनके 2 कम्पोजिशन संकलित हैं।


विशेष सूचना -'ओल्ड इज़ गोल्ड' शृंखला के बारे में आप अपने विचार, अपने सुझाव, अपनी फ़रमाइशें, अपनी शिकायतें, टिप्पणी के अलावा 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के नए ई-मेल पते oig@hindyugm.com पर ज़रूर लिख भेजें।

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड के ४०० शानदार एपिसोड आप सब के सहयोग और निरंतर मिलती प्रेरणा से संभव हुए. इस लंबे सफर में कुछ साथी व्यस्तता के चलते कभी साथ नहीं चल पाए तो कुछ हमसे जुड़े बहुत आगे चलकर. इन दिनों हम इन्हीं बीते ४०० एपिसोडों के कुछ चर्चित अंश आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं इस रीवायिवल सीरीस में, ताकि आप सब जो किन्हीं कारणों वश इस आयोजन के कुछ अंश मिस कर गए वो इस मिनी केप्सूल में उनका आनंद उठा सकें. नयी कड़ियों के साथ हम जल्द ही वापस लौटेंगें

1 टिप्पणी:

tonyrome ने कहा…

wow! beautiful rendition of rafi saheb's one of the difficult songs. congratulations!! never heard anyone sing so good.

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