Friday, October 10, 2008

सीहोर, अमेरिका और इंटरनेट तीन स्थानों पर होगा शिवना की नई पुस्तक वाशिंगटन के कवि श्री राकेश खण्डेलवाल के काव्य संग्रह का विमोचन

Andheri-Raat-Ka-Suraj11 वाशिंगटन के भारतीय मूल के कवि श्री राकेश खण्डेलवाल के काव्य संग्रह अंधेरी रात का सूरज का प्रकाशन शिवना द्वारा किया गया है तथा 11 अक्टूबर को उसका एक साथ तीन स्थानों पर विमोचन होने जा रहा है । मुख्य समारोह जहां अमेरिका के वर्जीनिया के राजधानी मंदिर आडिटोरियम में वाशिंगटन हिंदी समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा है । वहीं सीहोर में प्रतीक रूप में शिवना प्रकाशन द्वारा भी विमोचन का कार्यक्रम रखा गया है । उसीके साथ ही इंटरनेट पर भारत के सबसे बड़े हिंदी जाल समूह हिंद युग्म द्वारा अंधेरी रात का विमोचन किया जा रहा है ।
शिवना प्रकाशन के पंकज सुबीर ने जानकारी देते हुए बताया कि गीतकार नीरज और बालकवि बैरागी की परम्परा के कवि श्री राकेश खण्डेलवाल इस समय हिंदी के मूर्ध्दन्य गीतकारों में हैं । भारतीय मूल के श्री खण्डेलवाल पिछले कई वर्षों से वाशिंगटन में निवास कर रहे हैं । शिवना द्वारा श्री खण्डेलवाल के गीतों का संग्रह अंधेरी रात का सूरज के नाम से प्रकाशित किया गया है । ये संग्रह श्री खण्डेलवाल के गीतों और मुक्तकों का संग्रह है इस संग्रह की समीक्षा हिंदी तथा उर्दू के विद्वान लेखक श्री कुंवर बेचैन द्वारा लिखी गई है । इसी संग्रह के विमोचन का मुख्य आयोजन अमेरिका के वर्जीनिया के राजधानी मंदिर आडिटोरियम में वाशिंगटन हिंदी सेवा समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा है । 11 अक्टूबर को सांय साढ़े छ: बजे आयोजित कार्यक्रम में उर्दू हिंदी और पंजाबी के विश्व प्रसिध्द लेखक डॉ. सत्यपाल आनंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे । इसके अलावा इस विमोचन को इंटरनेट पर हिंदी के प्रमुख जाल समूहों में से एक हिंद युग्म पर भी आयोजित किया जा रहा है । ये आयोजन भी 11 अक्टूबर को ही आयोजित किया जा रहा है । 11 अक्टूबर को हिंद युग्म द्वारा ये आयोजन http://podcast.hindyugm.com पर आयोजित किया जा रहा है जहां पर हिंदी के मूर्ध्दन्य विद्वान तथा उद्धोषक श्री संजय पटेल इस कार्यक्रम को संचालित करेंगें । श्री पटेल एक जाने माने उद्धोषक हैं साथ ही वे कविता संगीत आदि से भी जुड़े हुए हैं । श्री संजय पटेल नईदुनिया इंदौर से सांस्कृतिक समीक्षक के रूप में जुड़े हुए हैं । इंटरनेट पर होने वाले अपने तरह के इस अनूठे आयोजन में  श्री राकेश खण्डेलवाल की कविताओं का पाठ कच्‍छ भुज गुजरात की अखिल भारतीय कवियित्री मोनिका हठीला द्वारा किया जायेगा तथा उनकी कविताओं के बारे में जानकारी दी जायेगी।

monika hathila

ये आयोजन हिंद युग्म पर सजीव सारथी के निर्देशन में किया जा रहा है । उल्लेखनीय है कि अंधेरी रात का सूरज पहली पुस्तक है जिसका इंटरनेट पर तथा समारोह में एक साथ विमोचन किया जा रहा है । तीसरा आयोजन प्रतीक रूप में सीहोर में किया जा रहा है जो कि शिवना प्रकाशन द्वारा किया जा रहा है । ये आयोजन शिवना प्रकाशन के सम्राट काम्प्लैक्स स्थित कार्यालय पर आयोजित किया जायेगा जहां पर स्थानीय कवियों तथा साहित्यकारों के मध्य अंधेरी रात का सूरज का विमोचन किया जायेगा । शिवना प्रकाशन का आयोजन 11 अक्टूबर को सांय साढ़े छ: बजे ही आयोजित किया जायेगा । आयोजन में अखिल भारतीय कवियित्री मोनिका हठीला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगीं । तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय कालेज में हिंदी की विद्वान प्राध्यापक डॉ. श्रीमती पुष्पा दुबे करेंगीं । इनके अलाव स्थानीय साहित्यकार और कवि भी उपस्थित रहेंगें । कार्यक्रम में मोनिका हठीला द्वारा श्री खण्डेलवाल के गीतों का सस्वर पाठ भी किया जायेगा ।

4 comments:

seema gupta said...

' great pleasure to know about this ocassion organised on 11th oct'08. my heariest wishes and congratulations to Rakesh jee for publication of his book, appreciation to Pankaj jee for his efforts in this regard' wish you all good luck.

regards

दिलीप कवठेकर said...

काव्य संग्रह अँधेरी रात का सूरज के प्रकाशन का समय और सीमाओं से निकलकर एक साथ तीन जगह पर कराने का आपका यह नायाब प्रयोग सराहनीय है, स्तुत्य है, इस मानस से कि, इसकी सफलता से हिन्दी साहित्य के विमोचन के क्षेत्र में यह घटना मील का पत्थर साबित होगी.

राकेश खंडेलवाल भी बधाई के पात्र है, और आप भी , क्योंकि इस जाल समूह की बदौलत आज एक अच्छे कवि को हम सुन पा रहे है. पहले जो पढ़ने का माध्यम उपलब्ध था उसमें जो स्थान की सीमा या लिमिटेशन आ जाती थी, वह दूरियां अब मिट जायेंगी.

महाजाल पर हो रहे विमोचन समारोह में श्री संजय पटेल के संचालन से इस प्रयो में और नाविन्य एवं वज़न आ जायेगा, ये अनुभव से कह रहा हूँ.

महाभारत के युग में संजय नें अपने दिव्य चक्षु से हमें युद्ध का आँखों देखा हाल सुनाया था. वे शायद जगत के पहले उद्घोषक थे.आज के इस उन्नत संचार युग में आपने फ़िर उनसे सेवायें ली है, मगर युद्ध नही , अमन के लिए, साहित्य की सेवा के लिए. बधाई!!

अजित वडनेरकर said...

राकेशजी, पंकज जी और समस्त हिन्द युग्म परिवार को मेरी बधाइयां....
जल्दी ही पुस्तक से कुछ चुनींदा गीत भी पढ़वाइयेगा....

संगीता पुरी said...

सारे कार्यक्रमों के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद ... सबों को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

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