शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

गैंगस्टरों की खूनी दुनिया में प्रीतम के संगीत का माधुर्य

कुछ गीत हमेशा ही जेहन में ताज़ा रहते हैं, प्रीतम का स्वरबद्ध पी लूँ  और तुम जो आये  गीत भी इसी श्रेणी में आते हैं. वंस अपोन अ टाइम इन मुम्बई  की सफलता में इन गीतों की कामियाबी का बहुत बड़ा हाथ रहा. मुम्बई अंडरवर्ड के काले दौर को गुजरे समय की एक दास्ताँ बता कर पेश किया गया था इस फिल्म में, अब इसके दूसरे संस्करण में इसी कहानी को आगे बढ़ाया गया है. जहाँ तक गीत संगीत की बात है यहाँ भी प्रीतम दा ही हैं अपने लाजवाब फॉर्म में और उन्हें साथ मिला है निर्देशक गीतकार रजत अरोड़ा का, रजत डर्टी पिक्चर के हिट गीत लिखकर अपनी एक खास पहचान बना चुके हैं. आईये देखें क्या इस दूसरे संस्करण का संगीत भी श्रोताओं की उम्मीद पर खरा उतर पाया है या नहीं. 

अभी हाल ही में मुर्रब्बा, रंगरेज  और मेरा यार  जैसे शानदार गीत गाकर जावेद बशीर इन दिनों छाये हुए हैं, उन्हीं की करारी आवाज़ जो तीर की तरफ सीधे दिल को भेद जाती है, में है पहला गीत ये तुने क्या किया , एक खूबसूरत कव्वाली. शुरू के शेरों से ही समां सा बांध जाता है. रजत के शब्द और प्रीतम की धुन दोनों ही उत्तम है. कोरस का इस्तेमाल भी खूब जमता है. 

अगला गीत भी एक कव्वाली ही है, पर ये ओरिजिनल नहीं है. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की हिट धुन तैयब अली  को एक बार फिर जमाया गया है एक नए सिचुएशन पर. इतने हिट गीत का ये संस्करण अपने मूल से कम से कम १० कदम पीछे होगा. रजत के शब्द यहाँ बेअसर से लगते हैं. जावेद अली की जोशीली आवाज़ को छोड़ कर गीत में कुछ भी ऐसा नहीं है जिसे ८० के दशक के उस बेहद सफल गीत के साथ जोड़ा जाए, अगर मूल गीत को ही थोडा और आकर्षक बना कर रखा जाता तो शायद बढ़िया रहता. 

एक बार फिर ८० का साउंड लौटता है सुनिधि की आवाज़ में, पहले संस्करण में पर्दा  गीत में जो जोश उनकी आवाज़ ने भरा था वही तू ही ख्वाहिश  में भी झलकता है. लंबे समय तक इस गीत का जादू बरकरार रहेगा ये तय है. शब्द सामान्य हैं पर प्रीतम ने पंचम सरीखा क्लब संगीत रचकर समां सजाया है पर गीत का असली आकर्षण तो सुनिधि क्रिस्टल क्लीयर आवाज़ ही है. पूरी उम्मीद है उन्हें इस गीत के इस साल का फिल्म फेयर नामांकन मिले. 

एल्बम का अंतिम गीत फिर एक बार सूफियाना रंग में रंगा है. गीत कहीं कहीं इश्क सूफियाना  की झलक देता है. जावेद अली की आवाज़ प्रमुख है जिसे साहिर अली के फ्लेवर्ड स्वरों का अच्छा साथ मिला है. चुगलियाँ  गीत में सबसे आकर्षक चुगलियाँ  शब्द का उच्चारण ही है. कुछ बहुत अलग न देकर भी ये रोमांटिक गीत सुरीला लगता है. 

वंस अपोन ए टाइम दुबारा  का संगीत औसत से बढ़कर है. तैयब अली  को छोड़ दिया जाए तो अन्य तीनों गीत काफी अच्छे बन पड़े हैं. हमारी टीम ने दिए हैं इस एल्बम को ३.८ की रेटिंग. आप बताएं अपनी राय....  

सबसे  बहतरीन गीत - ये तुने क्या किया , तू ही ख्वाहिश 

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी
आवाज़ - अमित तिवारी 

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