मंगलवार, 6 अगस्त 2013

बोलती कहानियाँ: मुंशी प्रेमचन्द कृत बालक

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने हिन्दी और मराठी की एक सफल वॉइस ओवर आर्टिस्ट माधवी चारुदत्ता के स्वर में मुंशी प्रेमचन्द की मार्मिक कहानी "अग्निसमाधि" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचन्द की ही एक भावमय कथा बालक जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

प्रस्तुत कथा का गद्य "भारत कोश" पर उपलब्ध है। "बालक" का कुल प्रसारण समय 19 मिनट 17 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं।
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"पुरखों की पैदा की हुई सम्पत्ति पर आज भी लोग उसी शान से अधिकार जमाये हुए हैं, मानो खुद पैदा किये हों, तो वह क्यों उस प्रतिष्ठा और सम्मान को त्याग दे, जो उसके पुरखों ने संचय किया था।”
 (मुंशी प्रेमचन्द कृत "बालक" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.


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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
बालक MP3

#26th Story, Balak: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2013/26. Voice: Anurag Sharma

9 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन 'बंगाल के निर्माता' - सुरेन्द्रनाथ बनर्जी - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Smart Indian ने कहा…

जी धन्यवाद!

Dr. Krishna N. Sharma ने कहा…

Bahut hi accha prayatn hai. Dil khush ho gaya. Maine is story ka anand maine walk karte hue sunkar liya. Plz aisi aur bhi kahanoyan post karein. Dhanyawad. Aabhar.

Smart Indian ने कहा…

डॉ शर्मा, आपकी सराहना के लिए आभार। हम लोग अब तक 200 से अधिक नई-पुरानी हिन्दी कहानियों को स्वर दे चुके हैं। मुंशी प्रेमचंद की कुछ कहानियाँ निम्न लिंक पर उपलब्ध हैं:
मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ

Suman ने कहा…

अनुराग जी,
क्या कहूँ जैसे ही कहानी शुरू हुई बस आँखे मूंदे सुनती गई अंत में सच में मेरी आँखे भी सजल हुई, गंगू का निष्कपट प्रेम देखकर !
कहानी को आपकी आवाज ने और भी सुन्दर बना दिया है !बहुत बहुत आभार इतनी सुन्दर कहानी सुनाने के लिए … क्या मेरी भी एक कहानी को आपकी आवाज दे सकेंगे :) ?

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत प्रभावी प्रस्तुति...

Smart Indian ने कहा…

सुमन जी, अवश्य, हमें तो अच्छी कहानियों की तलाश रहती है।

Smart Indian ने कहा…

धन्यवाद कैलाश जी।

Unknown ने कहा…

Good effort

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