Wednesday, March 9, 2011

हु तू तू....भई घर गृहस्थी की नोंक झोंक भी तो किसी कबड्डी के खेल से कम नहीं है न...

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 609/2010/309

मस्कार! 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की एक और कड़ी के साथ हम हाज़िर हैं। इन दिनों विश्वकप क्रिकेट के उत्साह को और भी ज़्यादा बढ़ाने के लिए हम भी खेल-कूद भरे गानें लेकर उपस्थित हो रहे हैं 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की लघु शृंखला 'खेल खेल में' के अंतर्गत। अभी परसों ही हम बातें कर रहे थे विश्वकप प्रारंभ होने से पहले के क्रिकेट के बारे में। आइए आज आपको बतायें कि एक दिवसीय मैच, यानी कि वन डे इंटरनैशनल की शुरुआत किस तरह से और कब हुई थी। १९६० के दशक के शुरुआत में ब्रिटिश काउण्टी क्रिकेट टीम्स क्रिकेट के एक छोटे स्वरूप को खेलना शुरु किया जो केवल एक ही दिन का होता था। १९६२ में चार प्रतिभागी दलों के बीच प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसका शीर्षक था 'मिडलैण्ड्स नॊक आउट कप'। उसके बाद १९६३ में 'जिलेट कप' लोकप्रिय हो जाने से एक दिवसीय क्रिकेट की तरफ़ लोगों का रुझान बढ़ने लगा। १९६९ में एक नैशनल सण्डे लीग का गठन हुआ और पहला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला गया बारिश से प्रभावित एक क्रिकेट टेस्ट मैच के पाँचवे दिन। यह मैच था इंगलैण्ड और ऒस्ट्रेलिया के बीच जो १९७१ में मेलबोर्ण में खेला गया था। यह मैच खेला गया था जनता को शांत करने के लिए जो पिछले चार दिनों से बारिश की वजह से टेस्ट मैच का आनंद नहीं उठा पा रहे थे। यह एक ४० ओवर का मैच था और प्रति ओवर ८ गेंदें फेंके गये। इंगलैण्ड के घरेलू एक दिवसीय मैचों की अपार सफलता और लोकप्रियता के मद्देनज़र यह पद्धति विश्व के दूसरे देशों ने भी आज़माना चाहा और इस तरह से इंटरनैशनल क्रिकेट काउनसिल (ICC) ने क्रिकेट विश्वकप प्रतियोगिता की योजना बना डाली। बाकी इतिहास है।

इस शृंखला में कल हमने आपको कबड्डी पर आधारित एक गीत सुनवाया था, जिसमें दो लड़कियों के दल आपस में भिड़ रहे थे। आज का गीत भी कबड्डी पर ही आधारित है लेकिन इस बार मुक़ाबला नारी और पुरुष के बीच है। लता मंगेशकर और महेन्द्र कपूर की आवाज़ में यह "हु तु तु" गीत है १९६१ की फ़िल्म 'मेमदीदी' का। शैलेन्द्र का गीत और सलिल चौधरी का संगीत। झूठ नहीं बोलूँगा, यह गीत मैंने पहले कभी नहीं सुना हुआ था। खेलों पर आधारित गीत ढूंढते हुए यह गीत अचानक मेरे हाथ लगा और आपको भी सुनवाने का मन हुआ। इसका कारण है कि यह गीत दूसरे गीतों से कई बातों में ज़रा हटके है। यह गीत पति पत्नी के बीच के छेड़-छाड़ को दर्शाता है कबड्डी के खेल के माध्यम से। दोनों ही अपने अपने लिए कहते हैं कि उन्हें मेहनत करनी पड़ती है और दूसरा मज़े ले रहा/रही है। शैलेन्द्र जी ने काफ़ी मज़ेदार बोल लिखे हैं। फ़िलर के तौर पर इस्तमाल किया गया "हु तु तु" गीत का कैच लाइन है। मेमदीदी शब्द की बात करें तो बताना चाहूँगा कि बंगाल में इस शब्द का बहुत इस्तमाल होता है जिसका अर्थ मेमसाब ही है। बंगाल में दादा और दीदी का ख़ूब इस्तमाल होता है, शायद इसी वजह से मेमदीदी का चलन है वहाँ पर। इस गीत में सलिल दा ने महेन्द्र कपूर की आवाज़ ली है और शायद यह इस तरह का एकमात्र गीत है महेन्द्र-सलिल कम्बिनेशन का। तो आइए इस दुर्लभ और कमसुने गीत का आज आनंद लें, और खेल के इन दिनों बने हुए मूड को बरक़रार रखें।



क्या आप जानते हैं...
कि सलिल चौधरी पहली बार १९४९ में एक बंगला फ़िल्म 'परिवर्तन' में संगीत देकर फ़िल्म संगीत जगत में प्रवेश किया था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 10/शृंखला 11
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - कोई नहीं.

सवाल १ - फिल्म में गीत के दो संस्करण हैं, एक आशा की आवाज़ में दूसरा बताएं - २ अंक
सवाल २ - संगीतकार जोड़ी का नाम - ३ अंक
सवाल ३ - गीतकार बताएं - २ अंक

दोस्तों वैसे तो ये इस शृंखला की आखिरी पहेली है....पर इस बार कुछ नया है....आज हम दे रहे हैं एक बोनस सवाल, जिसके अंक हैं ५....यानी इस एक सवाल के साथ किसी भी तरह का उलटफेर संभव है. तो शुभकामनाएँ सभी को, सवाल ये है -

आपने खेलों से जुड़े १० गीत सुने, मगर एक गीत जो आधारित है क्रिकेट पे और जो समर्पित है एक बड़े क्रिकेट खिलाडी के नाम (वीडियो के हिसाब से) इस शृंखला में छूट गया है, जो हम सुन्वायेंगें ओल्ड इस गोल्ड के शनिवार विशेष में, आपने पहचानना है वो गीत....जो ठीक वही गीत पहचान लेगा जो हम बजायेंगें उसी के नाम होंगें ये बोनस ५ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
अमित जी आगे हैं पर आज कुछ भी हो सकता है....तो हमें भी इंतज़ार रहेगा...शुभकामनाएँ...

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

10 comments:

vijay said...

shiv hari

Anjaana said...

Music Dr: Shiv Hari

अमित तिवारी said...

संगीतकार-शिव हरि

अमित तिवारी said...

She ne khela he se aaj cricket match

Anjaana said...

Are we talking about ?

Song-SHE ne khela HE se aaj cricket match (Love Marriage)
Singer-Rafi, Lyrics-Shailendra, MD-Shankar Jaikishan

Anjaana said...

This song is picturised on Dev Anand (looking like Don Bradman, no less, in his cricket gear)

अमित तिवारी said...

और इस क्रिकेट पर आधारित गाने की लिंक है:
http://www.youtube.com/watch?v=Hs5QdPWHOHo

माला सिन्हा कि नोंक झोंक और देवानंद की बैटिंग

हिन्दुस्तानी said...

doosree awaz : mahendra kapoor


Lagata hai ki sajeev jee ne soch liya hai ki teeno maharathiyon ko clean bold karke rahenge.Aaj teeno logon ne ek saath uttar diya hai. Bonus sawal ka uttar bhi dono logon ne ek samay par de diya.

mujhe to ye azooba lagta hai

सजीव सारथी said...

sahi kah rahe hain hindustani bhai, paheli ab mushkil karni padegi....wakai inka sangeet gyaan dekh kar hairat hoti hai

Anjaana said...

Sajeev ji aise bouncer ki umeed nahi thi aaj, par kismat achi thi ki bach gaye.. ( pata nahi achi thi ya buri, ye match to fir bhi haath se gaya ) :)

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