Friday, June 15, 2012

कहानी पॉडकास्ट - सुशीला - हरिशंकर परसाई - अर्चना चावजी

'बोलती कहानियाँ' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में कामेश्वर की मार्मिक कथा "चप्पल" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिशंकर परसाई का व्यंग्य "सुशीला", जिसको स्वर दिया है अर्चना चावजी ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 3 मिनट 3 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

मेरी जन्म-तारीख 22 अगस्त 1924 छपती है। यह भूल है। तारीख ठीक है। सन् गलत है। सही सन् 1922 है। । ~ हरिशंकर परसाई (1922-1995)

हर शनिवार को "बोलती कहानियाँ" पर सुनें एक नयी कहानी

"आम बाज़ार भाव से तो लड़के की क़ीमत मांगते ही थे, इनके अशुद्ध होने का दण्ड पाँच छह हज़ार और मांगते थे।" (हरिशंकर परसाई की "सुशीला" से एक अंश)

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#21st Story, Susheela: Harishankar Parsai/Hindi Audio Book/2012/21. Voice: Archana Chaoji

1 comment:

Smart Indian said...

दहेज और जातिवाद की ज्वलंत समस्या का एक व्यावहारिक हल । परसाई जी की कलम से एक अच्छी कहानी और अर्चना जी का कर्णप्रिय पाठ!

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