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"मैंने बहुत से नए पुराने कव्वालों को सुना, इस कव्वाली को गाने से पहले..."- साकेत सिंह : एक मुलाकात ज़रूरी है

एक मुलाकात ज़रूरी है (32)

इस सप्ताह प्रदर्शित हो रही है मनोज बाजपाई, के के मेनोन, और अनुपम खेर जैसे बड़े सितारों से सजी फिल्म "सात उच्चके", जिसके हिट गीत 'हुस्न वाले फरेबी' के गायक संगीतकार साकेत सिंह है हमारे आज के मेहमान, आईये मिलें इस उभरते हुए फनकार से और जानिए उनके अब तक के संगीत सफ़र की दास्ताँ, सजीव सारथी के साथ कार्यक्रम 'एक मुलाकात ज़रूरी है' में....



एक मुलाकात ज़रूरी है इस एपिसोड को आप यहाँ से डाउनलोड करके भी सुन सकते हैं, लिंक पर राईट क्लीक करें और सेव एस का विकल्प चुनें 

Comments

Anonymous said…
Kuchh khaas nhi hr doosra aadmi free me aise hi gata hai
Smart Indian said…
धन्यवाद सजीव, बहुत सुंदर वार्ता. साकेत सिंह को शुभकामनाएं!

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महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

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