सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

इन्टरनेट पर बना पहला इंडो रशियन मैत्री गीत - द्रुज़्बा

"सर पे लाल टोपी रूसी, फ़िर भी दिल है हिन्दुस्तानी...." जब राज कपूर ने चैपलिन अंदाज़ में इस गीत पर कदम थिरकाए, तब वो रूस में इतने लोकप्रिय साबित हुए कि वो और उनकी पूरी टीम रूस में हिन्दुस्तानी भाषा, कला और संस्क्रति की पहचान ही बन गए. १९५० में राजनितिक आवश्यकताओं और व्यापार उद्देश्यों के चलते दोनों देशों के बीच जिस रिश्ते की बुनियाद पड़ी थी कालांतर में संगीत और कला के आदान प्रदान ने उसे एक आत्मीय दोस्ती में तब्दील कर दिया. रूस की झलक फिल्मों में भी खूब रही, राज कपूर की ही "मेरा नाम जोकर" और अभी हालिया प्रर्दशित "दसविदानिया" में भी रुसी कनक्शन देखने को मिला है.


एक ऐसा ही मौका हिंद युग्म को भी मिला, जब दिल्ली स्थित रशियन कल्चरल सेंटर ने हिंद युग्म के गीत संगीत प्रभाग से भारत रूस दोस्ती पर एक गीत बनाने का आग्रह किया. हर बार की तरह युग्म की टीम एक बार फ़िर उम्मीदों पर खरी उतरी, और फरवरी के पहले सप्ताह में जो गीत हमने सेंटर को भेजा समीक्षा के लिए, उसे १९ तारिख को होने वाले एक भव्य समारोह के लिए चुन लिया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि इस गीत की सी डी को उसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा विमोचित किया जाएगा, और मोस्को में होने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय समारोह के लिए भेजा भी जाएगा.

हिंद युग्म के लिए ये बेहद हर्ष की बात है कि ये गीत इतने बड़े आयोजन के लिए चुना गया है. आखिर कला को सार्थक उद्देश्य देना ही तो हमारा लक्ष्य है. तो दोस्तों, आज हम सगर्व इसी इंडो रशियन गीत का इन्टरनेट पर विश्वव्यापी विमोचन कर रहे हैं, गीत के बोल लिखे हैं सजीव सारथी ने, संगीतबद्ध किया है ऋषि एस ने और आवाजें हैं, बिस्वजीत नंदा और मिथिला कानुगो की. सुनिए -



और अब देखिये उस कार्यक्रम की एक झलक, जो संपन्न हुआ रशियन सेंटर फॉर साइंस एंड कल्चर २४ फिरोजशाह रोड, नई दिल्ली में १९-०२-२००९ को. कार्यक्रम में बहुत से भारतीय कलाकारों ने रशियन नृत्य परफोर्म किए तो रशियन कलाकारों ने भारतीय रंग में ढल कर ख़ुद को पेश किया. पूरा कार्यक्रम एक शानदार अनुभव रहा जहाँ मुख्य अतिथि थे डाक्टर शकील अहमद खान (डैरक्टर जनरल, नेहरू युवा केन्द्र संगठन). और भी बहुत से पार्टी सांसद और जाने माने अथितियों के बीच हिंद युग्म का प्रतिनिधित्व कर रहे थे - तपन शर्मा, नीलम मिश्रा, सजीव सारथी,जॉय कुमार और नसीम. कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ आप यहाँ देखें. कार्यक्रम का संचालन कर रही पूर्णिमा आनंद ने सी डी के विमोचन को कार्यक्रम का सबसे शानदार आकर्षण बताया. देखिये किस तरह विमोचित सिंगल ट्रैक - द्रुज्बा.



गीत के बोल -

जब हम कहे नमस्ते,
तब तुम कहना मिलाया मोया, ( my sweet )
न तुम कहो कभी अलविदा,
न हम कहें दसविदानिया, ( good bye )
तुम जानते हो मुझको,
या तेब्या पानीमायु, (and i understand u)
ये दोस्ती ये रिश्ता,
कायम रहे ये ज़ज्बा,
इंडो रशियन द्रुज्बा...( indo russian friendship )

दूरियां मिट गई, सरहदें गुम हो गयी,
दिल मिले दोस्ती गहरी और हो गयी,
बरसों पुराना है अपना याराना...
मोस्को से नई दिल्ली का
गठ बंधन है ये पक्का,
ये दोस्ती ये रिश्ता,
कायम रहे ये ज़ज्बा,
इंडो रशियन द्रुज्बा...

शान्ति हो विश्व में, जंग न हो अब कहीं,
ख्वाब है मेरा ये तेरा भी सपना यही,
मिल के सुनना है सब को बताना...
रूबल बड़ा न रूपया,
उंचा है प्यार का रुत्बा,
ये दोस्ती ये रिश्ता,
कायम रहे ये ज़ज्बा,
इंडो रशियन द्रुज्बा...

ग्राफिक सहयोग - प्रशेन और उनकी टीम
छायाचित्र और विडियो प्रस्तुत किया हिंद युग्म के जॉय कुमार ने

14 टिप्‍पणियां:

manu ने कहा…

मुझे वहाँ पर गैरहाजिर रहने का अफ़सोस है ,,,
पर मस्त गीत सुन कर मजा आ गया,,,,युग्म को इस कामयाबी के लिए बहुत बहुत बधाई,,,,
गीत की पूरी टीम को मुबारक बाद ,,,मन खुश हो गया,,,आवाज से ,,गीत के बोलों से ,,,धुन से और ,,,,,प्यार की भावना लिए प्यारे से गीत की कामयाबी से,,,,

शोभा ने कहा…

गीत बहुत ही सुन्दर लिखा है। सजीव जी के शब्द और ऋषि जी का संगीत अद्भुत संयोग बन गया। युग्म को इस सफलता के लिए बधाई।

neelam ने कहा…

sajeev ji ,
nice surprize for everyone ,once again heartiest congrates to u and yours'complete
team ,bus aise hi aage badhte rahiye hum sab aapke saath hain .

जय हिंद ,जय हिन्दयुग्म ,जय सजीव जी

विश्व दीपक ने कहा…

सजीव जी और ऋषि जी ने बहुत हीं उम्दा गाना तैयार किया है। रसियन शब्द सोने पर सुहागा की तरह काम कर रहे हैं। बिस्वजीत भाई और मिथिला जी ने अच्छी गलाकारी दिखाई है।

पूरी टीम को बधाई।

-विश्व दीपक

shivani ने कहा…

इंडो रशियन गीत के विमोचन के सुअवसर पर मैं सजीवजी उनकी टीम और हिंद युग्म को बहुत बहुत शुभकामनायें देना चाहती हूँ !घर में विवाह समारोह के कारण में इस समारोह में उपस्थित नहीं सकी इस बात का मुझको बहुत दुःख है !ये समारोह मेरे लिए आस्कर समारोह जैसा ही गौरव प्रदान करने वाला लगता है !यदि सजीव जी का साथ इसी तरह बना रहा तो हिंदी की पहचान जल्द ही विश्वपटल पर नज़र आएगी !गीत ,संगीत और गायन सभी कुछ बहुत सुन्दर है !मेरी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं !धन्यवाद !

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुंदर गीत लगा आप सब की मेहनत रंग लायी
पूरी टीम को बधाई।यूँ ही आगे बढ़ते रहे ..इसको सुनवाने का शुक्रिया

Divya Prakash ने कहा…

पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई ... सजीव जी you are always source of inspiration for me ...Hat's off

सादर
दिव्य प्रकाश

pooja ने कहा…

सजीव सारथी और उनकी पूरी टीम को दोस्ती का ज़ज्बा प्रदर्शित करते इस प्यारे से गीत के लिए बहुत बहुत बधाई.

पूजा अनिल

shanno ने कहा…

सजीव जी,
रूस और भारत की मैत्री को उजागर करने वाले इस गाने के बोल व धुन दोनों ही बहुत अच्छे हैं. आपको व आपकी पूरी टीम को बधाई. जरा सा वीडियो भी देखने को मिला, धन्यबाद. वहां पर पहुँचने वाले सभी लोगों ने पूरे कार्यक्रम का खूब आनंद भी उठाया होगा. ढेरों शुभकामनाएं.

तपन शर्मा ने कहा…

एक सेकंड के लिये वहाँ रौंगटे खड़े हो गये थे मेरे.. जैसे ही हिन्दयुग्म का गीत वहाँ बज उठा... कुछ सम्झ नहीं आ रहा था.. बस वहाँ कोने पर खड़ा स्टेज की ओर देखे जा रहा था.. समय का अभाव न होता तो वो गीत पूरा बजाया जाता..

२ घंटे तक इंतजार किया उस पल का... हम लोगों का गला सूखा हुआ था.. प्यास के मारे बुरा हाल था (सजीव जी को याद होगा.. :-) )
पर वो इंतज़ार भी क्या खूब था..

सजीव जी वो वाली फोटॊ कहाँ है को आपने डॉ.चिरकर (पता नहीं नाम सही कह रहा हूँ या नहीं..) के साथ खिंचवाई थी?

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

यह पोस्ट देखकर बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ. सजीव जी और समस्त हिंद-युग्म टीम को बहुत बधाई!

शैलेश भारतवासी ने कहा…

पिछले १४ दिनों से ब्लॉगर मिलन, ब्लॉगिंग कक्षाएँ आदि के कारण शहर से बाहर हूँ और नेट से लगभग दूर भी। सजीव और तपन ने फोन पर जब बताया कि हमारा यह गीत पूर्णिमा को पसंद आया है, तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।

बिस्वजीत निश्चित तौर पर हिन्द-युग्म के सबसे प्रखर गायक हैं। युग्म पर आये इनके सभी गीतों में इनकी आवाज़ के अलग-अलग शेड दिखते हैं। इस प्रोजेक्ट को भी इन्होंने जिस तरह से अंजाम दिया, उसके लिए बहुत-बहुत बधाइयाँ।

वर्ष २००८-०९ सत्र के पहले ही गीत से मिथिलेश की एंट्री हिन्द-युग्म पर हुई थी। उस गीत में और इस गीत की आवाज़ में भारी अंतर है। बहुत ही अच्छा लगा सुनकर।

मेरा ऐसा मानना है कि ऋषि एस॰ हिन्द-युग्म के बेहतरीन संगीतकार है। हिन्द-युग्म के इस मंच के सृजन के मुख्य स्रोत वे ही रहे हैं। हर समय संगीत रचने के लिए तैयार। आपको सलाम।

सजीव ने हमेशा ही अच्छा लिखा है। मतलब जबकि हमारी बेहतरीन जोड़ी ने गीत रचा तो इतिहास बनना ही था। अब तो मास्को फेस्टीवल का इंतज़ार है।

Biswajeet ने कहा…

Ye hum sab ke liye garv ki baat hai...Mujhe khushi hai es project ka main ek hisa ban saka :). Rishiji,shaileshji,sajeevji ko bahut bahut dhanyavaad. Aur aap sabhi ke liye bahut bahut wishes.

Biswajit

निखिल आनन्द गिरि ने कहा…

poori team ko meri bhi badhai

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