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"दिल से अपने ख्वाब को सच करने का प्रयास करते रहो, कमियाबी ज़रूरी मिलेगी" - अरविन्द तिवारी : एक मुलाकात ज़रूरी है

एक मुलाकात ज़रूरी है (28)

Arvind Tiwari 
देश से दूर बचपन बीता, मगर एक चीज़ जिसने हमेशा दिल को अपने वतन से बाँध के रखा वो था संगीत, अपने इसी संगीत में कुछ नया करने की चाह ले आई हमारे आज के फनकार, अरविन्द तिवारी को अपने स्वदेश, एक बिजनेस केन्द्रित, बैंकोक स्तिथ परिवार से हैं अरविन्द, जिनकी जड़ें जुडी हैं बनारस के घाटों से. अरविन्द की पहली संगीत एल्बम "रंग तेरा" आज सभी संगीत प्लेत्फोर्म्स पर उपलब्ध है. आईये मिलें इसी उभरते हुए गायक अरविन्द तिवारी से आज 'एक मुलाकात ज़रूरी है' के इस ताज़ा एपिसोड में....



एक मुलाकात ज़रूरी है इस एपिसोड को आप यहाँ से डाउनलोड करके भी सुन सकते हैं, लिंक पर राईट क्लीक करें और सेव एस का विकल्प चुनें 

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महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

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