सोमवार, 7 मई 2012

सिने-पहेली # 19 (जीतिये 5000 रुपये के इनाम)


सिने-पहेली # 19 (7 मई, 2012) 



नमस्कार दोस्तों, 'सिने पहेली' की 19-वीं कड़ी में मैं, सुजॉय चटर्जी, आप सभी का फिर एक बार स्वागत करता हूँ। दोस्तों, 'सिने-पहेली' में पिछले कुछ सप्ताहों से कई नए नए प्रतियोगी जुड़े हैं और इस सप्ताह भी यह सिलसिला जारी रहा। इस सप्ताह हमारे साथ जुड़ने वाले दो नाम हैं बरेली, उत्तर प्रदेश के दयानिधि वत्स और बीकानेर, राजस्थान के गौतम केवलिया। गौतम जी ने जवाबों के साथ-साथ अपने ईमेल में यह भी लिखा है कि पेशे से वो एक दवा-प्रतिनिधि हैं और साहित्य से गहरा जुड़ाव रखने वाले परिवार से ताल्लुख़ रखते हैं। वर्ष १९८२ में, जब वो दसवीं कक्षा में पढ़ते थे, उनका एक लघु-व्यंग 'धर्मयुग' के कॉलम 'व्यंग परिहास: अपने आसपास' में प्रकाशित हुआ था। तब से वर्ष १९९२ तक देश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनके व्यअंग, कवितायें, कहानियाँ, रेखांकन, कार्टून आदि छपते रहे हैं। उस दौरान आकाशवाणी से भी नियमित जुड़ाव गौतम जी का बना रहा। १९९२ के बाद इस निरंतरता में एक ठहराव-सा आ गया। लिखना तो कमोबेश जारी रहा मगर छपना बहुत कम हो गया। पिछले कुछ अरसे से सोयी हुई लालसा फिर जागृत हुई है, और आकाशवाणी से रहा जुड़ाव उन्हें 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' की ओर खींच लाया है। गौतम जी, अब हम आपसे क्या कहें, 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' ने आपके अंदर के हुनर को फिर से ज़िंदा कर दिया है, यह हमारा सौभाग्य है। हमारी आपसे गुज़ारिश है कि आप हमारे साथ जुड़िये और अपने हास्य-व्यंग और कार्टूनों से 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' में हँसी-ख़ुशी की लहर दौड़ा दीजिए।

दोस्तों, भले ही पिछले कुछ हफ़्तों से 'सिने पहेली' में कई नए प्रतियोगी शामिल हुए हैं, पर वो सब नियमित रूप से भाग नहीं ले रहे हैं। हम आपको बता दें कि अगर आपको सेगमेण्ट विनर या महाविजेता बनना है तो यह बहुत ही ज़्यादा ज़रूरी है कि आप हर एपिसोड में हिस्सा लें। एक एपिसोड से आप खिसके कि दूसरों से पाँच अंक पीछे रह गए। अत: हम सभी प्रतियोगियों से यह दरख्वास्त करते हैं कि 'सिने पहेली' प्रतियोगिता को गम्भीरता से लें और 5000 रुपये के इनाम को अपने नाम कर लें। क्यों देना है यह पुरस्कार किसी और को जब आप में है इसे जीतने की काबलीयत? और अब सभी नए प्रतियोगियों के लिए 'सिने पहेली' महाविजेता बनने के नियम हम एक बार फिर दोहरा देते हैं। हमने इस प्रतियोगिता को दस-दस कड़ियों के सेगमेण्ट्स में विभाजित किया है (वर्तमान में दूसरा सेगमेण्ट चल रहा है जिसकी आज नौवीं कड़ी है)। इस तरह से १००-वें अंक तक १० सेगमेण्ट्स हो जाएँगे, और हर सेगमेण्ट का एक विजेता घोषित होगा (पहले सेगमेण्ट के विजेता रहे प्रकाश गोविंद)। इस तरह से १० सेगमेण्ट्स के बाद जो सर्वाधिक सेगमेण्ट विजेता होगा, वही होगा महाविजेता और उन्ही को 5000 रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया जाएगा। 

चलिए अब शुरु किया जाए आज की 'सिने पहेली - 19' के सवालों का सिलसिला...

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सवाल-1: बूझो तो जाने


इस श्रेणी में हम आपको कुछ शब्द देंगे जिनका इस्तमाल कर आपको किसी हिन्दी फ़िल्मी गीत का मुखड़ा बनाना है। यानी कि हम आपको किसी गीत के मुखड़े के कुछ महत्वपूर्ण शब्दों को आगे-पीछे करके देंगे, आपको सही मुखड़ा पहचानना है। तो ये रहे आज के गीत के कुछ शब्द; ध्यान से पढ़िए और इन शब्दों को उचित स्थानों पे बिठाकर बताइए कि यह कौन सा गीत है।

मुख, मानव, हृदय, अनमोल, घबराये, मन



सवाल-2: पहचान कौन!


आज की चित्र-पहेली में हम आपको दिखा रहे हैं किसी फ़िल्म का एक दृश्य। आपको बताना है फ़िल्म का नाम।



सवाल-3: सुनिये तो...


'सुनिये तो...' में पहले सुनिये एक फ़िल्मी गीत का शुरुआती संगीत।



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इस शुरुआती संगीत में आलाप लेतीं लता जी की आवाज़ भी आपने पहचान ली होगी। पर क्या आप गीत पहचान पाये? जी हाँ, यही है सवाल। 

सूत्र: यह एक लता-रफ़ी डुएट है और इस फ़िल्म के नायक-नायिका हैं जीतेन्द्र - हेमा मालिनी। इसी शीर्षक की एक और फ़िल्म ८० के दशक में भी बनी थी।



सवाल-4: कौन हूँ मैं?


मैं एक गीतकार हूँ। मैंने अधिकतर धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक फ़िल्मों में गीत लिखे हैं। मेरा जन्म राजस्थान में हुआ था पर मेरी पढ़ाई कलकत्ते में हुई। शुरू-शुरू में मैं एक फ़िल्म-निर्देशक बनना चाहता था, पर क़िस्मत में गीतकार बनना ही लिखा था। बतौर गीतकार मेरी पहली फ़िल्म में नूरजहाँ और शान्ता आप्टे, दोनों ने अभिनय व गायन किया था। इसी साल मेरी एक और फ़िल्म आई जिसके संगीतकार थे एस. के. पाल और मैंने फ़िल्म के सभी १२ गीत लिखे। इस फ़िल्म में मैंने शान्ता ठक्कर के साथ मिलकर एक हास्य गीत भी गाया था जो 'बॉम्बे टॉकीज़' की फ़िल्म 'झूला' के एक मशहूर गीत से बहुत मिलता-जुलता था। तो फिर बताइए कौन हूँ मैं?


सवाल-5: गीत अपना धुन पराई


और अब पाँचवा और आख़िरी सवाल। सुनिए इस विदेशी धुन को और पहचानिए वह हिन्दी फ़िल्मी गीत जो इस धुन से प्रेरित है। 







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तो दोस्तों, हमने पूछ लिए हैं आज के पाँचों सवाल, और अब ये रहे इस प्रतियोगिता में भाग लेने के कुछ आसान से नियम....

१. अगर आपको सभी पाँच सवालों के जवाब मालूम है, फिर तो बहुत अच्छी बात है, पर सभी जवाब अगर मालूम न भी हों, तो भी आप भाग ले सकते हैं, और जितने भी जवाब आप जानते हों, वो हमें लिख भेज सकते हैं।

२. जवाब भेजने के लिए आपको करना होगा एक ई-मेल cine.paheli@yahoo.com के ईमेल पते पर। 'टिप्पणी' में जवाब न कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे।

३. ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 19" अवश्य लिखें, और जवाबों के नीचे अपना नाम, स्थान और पेशा लिखें।

४. आपका ईमेल हमें शुक्रवार 11 मई तक मिल जाने चाहिए।

है न बेहद आसान! तो अब देर किस बात की, लगाइए अपने दिमाग़ पे ज़ोर और जल्द से जल्द लिख भेजिए अपने जवाब। जैसा कि हमने शुरु में ही कहा है कि हर सप्ताह हम सही जवाब भेजने वालों के नाम घोषित किया करेंगे, और पचासवे अंक के बाद "महाविजेता" का नाम घोषित किया जाएगा। 

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और अब 30 अप्रैल को पूछे गए 'सिने-पहेली # 18' के सवालों के सही जवाब---

1. पहले सवाल का गीत है फ़िल्म 'क़यामत से क़यामत तक' का "ग़ज़ब का है दिन सोचो ज़रा, ये दीवानापन देखो ज़रा, तुम हो अकेले, हम भी अकेले, मज़ा  आ रहा है, क़सम से" 

2. 'चित्र-पहेली' का सही जवाब है अभिनेता शशि कपूर।

3. इस प्रश्न का सही जवाब है लता मंगेशकर और यह उनका गाया पहला प्लेबैक्ड गीत है फ़िल्म 'आप की सेवा में' का "पा लागूँ कर जोरी, श्याम मोसे न खेलो होरी"।

4. 'कौन हूँ मैं' का सही जवाब है गायक मुकेश। दोस्तों, हमें खेद है कि इस प्रश्न में थोड़ी गड़बड़ी हुई है। मुकेश का जन्म हरियाणा में नहीं बल्कि दिल्ली में हुआ था। दरसल उनके जन्म के ६/७ महीने पहले उनका परिवार हिसार (हरियाणा) से दिल्ली स्थानांतरित हो गया था। क्योंकि सवाल में हमारी तरफ़ से गड़बड़ी हुई है, इसलिए इस सवाल को अटेम्प्ट करने वाले प्रतियोगियों को हम अंक दे रहे हैं, चाहे उनके जवाब सही हों या ग़लत। अटेम्प्ट न करने वाले प्रतियोगियों को अंक नहीं दिया जाएगा।

5. 'गीत अपना धुन पराई' में जो विदेशी गीत सुनवाया था, उससे प्रेरित हिन्दी गीत है फ़िल्म 'डिटेक्टिव' का "दो चमकती आँखों में कल ख़्वाब सुनहरा था जितना" मूल विदेशी गीत के डीटेल ये रहे: Harry Belafonte's 'Jamaica Farewell' (1956)

और अब 'सिने पहेली # 18' के विजेताओं के नाम ये रहे -----

1. पंकज मुकेश, बेंगलुरू --- 5 अंक
2. रीतेश खरे, मुंबई --- 5 अंक
3. प्रकाश गोविन्द, लखनऊ --- 5 अंक
4. सलमन ख़ान, अलीगढ़ --- 5 अंक 
5. शुभम जैन, मुंबई --- 5 अंक
6. दयानिधि वत्स, बरेली --- 4 अंक
7. शरद तैलंग, कोटा --- 4 अंक
8. अमित चावला, दिल्ली --- 3 अंक
9. निशांत अहलावत, गुड़गाँव --- 3 अंक
10. गौतम केवलिया, बीकानेर --- 3 अंक
11. इंदु पुरी गोस्वामी, चित्तौड़गढ़ --- 1 अंक


सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई। अंक सम्बंधित अगर आपको किसी तरह की कोई शिकायत हो, तो cine.paheli@yahoo.com के पते पर हमें अवश्य सूचित करें। अब जबकि 'सिने पहेली' के दूसरे सेगमेण्ट के १० में से ८ अंकों के परिणाम सामने आ गए हैं, तो क्यों न एक नज़र डाली जाए अब तक के सम्मिलित स्कोर पर। शीर्ष के पाँच प्रतियोगियों के स्कोर ये रहे...

1. प्रकाश गोविन्द, लखनऊ --- 40 अंक (100%)

2. पंकज मुकेश, बेंगलुरू --- 37 अंक (93%)

3. रीतेश खरे, मुंबई --- 35 अंक (88%)

4. अमित चावला, दिल्ली --- 31 अंक (78%)

5. क्षिति तिवारी, इंदौर --- 24 अंक (60%)


अब जबकि केवल दो और एपिसोड बचे हैं 'सिने-पहेली - सेगमेण्ट-२' के, ऐसा लगने लगा है कि प्रकाश गोविंद एक बार फिर से मैदान मार ले जायेंगे। नतीजा जो भी हो, आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी १००% सम्भावना है महाविजेता बनने की। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, और अनुमति दीजिए अपने इस ई-दोस्त सुजॉय चटर्जी को, नमस्कार!

1 टिप्पणी:

Reetesh ने कहा…

एक बात तो तय है...शेष बचे ८ सेगमेंट्स में, प्रकाश गोविन्द जी अपनी उत्तर लहरियाँ बिखेरते ही रहेंगे..वे मंजे हुए खिलाड़ी हैं इसलिए मुझे तो यही लगता है कि विजय उनके ही क़दम चूमने वाली है;) पर बेशक, खेल भावना से और अपना फ़िल्म और संगीत ज्ञान बढाने का यह बहुत ही बढ़िया तरीका है. तो बेधड़क खेलें और मज़ा लें..;)

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