Tuesday, May 22, 2012

"ब्लोग्गर्स चोईस" के पहले सत्र का समापन मेरी पसंद के गीतों के साथ -रश्मि प्रभा

गीतों से शुरू होता है जीवन - कभी माँ की लोरी से, कभी गुड़िया की कहानी से. एड़ी उचकाकर जब मैं खुद गाती थी तो सारी दुनिया अपनी लगती थी ... उसी एड़ी की मासूमियत से शुरू करती हूँ अपनी पसंद - नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए ..
.


मैं बहुत डरती थी, डरती भी हूँ (किसी को बताइयेगा मत, भूत सुन लेगा - हाहाहा ) . जब अपने पापा के स्कूल के एक गेट से दूसरे गेट तक अकेली पड़ जाती थी तो भूत को भ्रमित करने के लिए और खुद को हिम्मत देने के लिए गाती थी - मैं हूँ भारत की नार लड़ने मरने को तैयार ...


एक ख़ास उम्र और वैसे ख्वाब .... गीत तो कई थे , पर यह गीत एक समर्पित सा एहसास देता है ....


बच्चों के बीच मेरे पैरों में एक अदभुत शक्ति आ जाती, और मैं कहानियों की पिटारी बन जाती .... अपना वह पिटारा आज भी मेरी पसंद में है, जिसे अब मैं अपने सूद को दूंगी यानि ग्रैंड चिल्ड्रेन को ....


मेरे बच्चे मेरी ज़िन्दगी और मैं उनकी वह दोस्त माँ , जो उनके चेहरे से मुश्किलों की झलकियाँ मिटा दे ..... यह गीत हमारी पसंद,



दोस्तों रेडियो प्लेबैक इंडिया के इस साप्ताहिक कार्यक्रम "ब्लोग्गेर्स चोयिस" हमने बहुत से साथी ब्लोग्गरों की पसंद के गीत सुने, आज अपनी खुद की पसंद के गीतों के इस सत्र के लिए इस स्तंभ का समापन कर रही हूँ. जाहिर है अभी बहुत बहुत ब्लोग्गर्स बचे जिनकी पसंद हमने नहीं जानी है, नहीं सुनी है...लेकिन फ़िक्र न करें, बस अगले सत्र का इन्तेज़ार करें. अगले सप्ताह से लाऊँगीं एक नया खेल, नए अंदाज़ में, तैयार रहिएगा 

8 comments:

सदा said...

आपके लेखन की तरह ही आपके गीतों की पसंद भी बहुत अच्‍छी है ... आभार सहित अनंत शुभकामनाएं

vandan gupta said...

आप हमेशा नया करती रहती हैं जो सराहनीय है अब अगले पडाव का इंतज़ार रहेगा।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

लेखन के साथ साथ बेहतरीन गीत

सदा said...

कल 23/05/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


... तू हो गई है कितनी पराई ...

Maheshwari kaneri said...

खुबसूरत अभिव्यक्ति के साथ-साथ लाजवाब गीत भी...क्या बात है....

विभा रानी श्रीवास्तव 'दंतमुक्ता' said...

धीरे-धीरे आपको जानने लगी हूँ .... आपके पसंद के गाने सुन अपने विश्वास पर विश्वास भी होने लगा .... शिशु जैसा मन निश्छल-निष्कपट ..... उम्दा पसंद .....

Sadhana Vaid said...

लाजवाब पसंद और बेहतरीन गीत रश्मिप्रभा जी ! मज़ा आ गया !

Devi Nangrani said...

Sunder abhivyakti saaz aur awaaz ka adbhut sangam! Rashim ji aapki rachnatamak evam sangeet ke samgam ko mera salaam
Tum titlee bakar apne paron ko phailati hui oonchaaiyon ko chuo
shubhkamnayein
Devi nangrani

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