शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

संगीत में उफान और शब्दों में कुछ उबलते सवाल

ताज़ा सुर ताल -2014 - 13

दोस्तों देश भर में चुनावी माहौल गरम है. हर नेता अपने लोकलुभावन नारों से मतदाताओं के दिल जीतने की जुगत में लगा है. गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, मुद्दे सभी वही पुराने हैं, बहुत कुछ बदला पर सोचो तो कुछ भी नहीं बदला, इतने विशाल और समृद्ध देश की संपत्ति पर आज भी बस चंद पूंजीपति फन जमाये बैठे हैं. समाज आज भी भेद भाव, छूत छात जैसी बीमारियों में कैद है. बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ है तो न्याय और सच्चाई की आवाज़ भी कहीं राख तले दबी सुनाई देती है. कितने गर्व से हम गाते आये हैं सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा... मगर वो सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान आज है कहाँ ? यही वो खौलता सा सवाल है जो गीतकार इरशद कामिल ने फिल्म कांची  के गीत में उठाया है. आज ताज़ा सुर ताल में है इसी गीत की बारी. एकदम नए कलाकारों को लेकर आये हैं दिग्गज निर्माता निर्देशक सुभाष घई. घई साहब अपनी फिल्मों में संगीत पक्ष पर ख़ास पकड़ रखते हैं, लम्बे समय तक उनके चेहेते रहे लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आनंद बक्शी. बख्शी साहब के साथ तो उनका काफी लम्बा साथ रहा, और उन्होंने रहमान से भी उनके लिखे गीतों को स्वरबद्ध करवाया. कांची  में उन्होंने लम्बे समय से नदारद इस्माईल दरबार को मौका दिया है. साथ ही चार गीत सलीम सुलेमान ने भी दिए हैं और सबसे दिलचस्प बात तो ये है की एक गीत खुद घई साहब ने भी स्वरबद्ध किया है एल्बम के लिए. प्रस्तुत गीत को सलीम सुलेमान ने रचा है और आवाजें हैं सुखविंदर, मोहित चौहान और राज पंडित की. तो चलिए मिलकर ढूंढते हैं अपने 'सारे जहाँ से अच्छे' हिंदुस्तान को. 


बात देश की समस्याओं पर हो रही है तो जिक्र आता है एक ऐसी समस्या का जो केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर के देशों के लिए चिंता का कारण है. पानी यानी जल के भरपूर स्रोत्र हमें कुदरत ने दिए हैं, पर इंसानों ने इन सोत्रों का जरुरत से अधिक दोहन कर इन अनमोल खजानों की थाली में छेद कर दिया है. अब समय चेतने का है. पानी के गहराते संकट की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए फिल्मकार भी अपने अपने तरीकों से जुड़े हुए हैं. कुछ समय पहले आई जलपरी  आपने अवश्य देखी होगी. इसी कड़ी में जल्दी ही आपके सामने होगी गिरीश मलिक की फिल्म जल. फिल्म का संगीत रचा है सोनू निगम ने, सोनू ने बतौर संगीतकार अभी कुछ दिनों पहले ही सिंह साहब दा ग्रेट  से अपने सफ़र की शुरुआत की थी, पर जल  के लिए उन्होंने साथ थामा है मशहूर तबला वादक बिक्रम घोष का. फिल्म की एल्बम में अधिकतर वाध्य रचनाएं हैं जो बेहद अनूठी है. पर आज हम आपके लिए लाये हैं शुभा मुदगल का गाया शीर्षक गीत, जिसे लिखा भी है सोनू निगम ने संजीव तिवारी के साथ मिलकर. शास्त्रीय सरंचना में बुने ऐसे गीत इन दिनों फिल्मों में बेहद कम ही सुनने को मिलते हैं. पर जाहिर है रेडियो प्लेबैक पर आप ऐसे अनमोल नगीनों को अवश्य ही सुन पायेगें. लीजिये सुनिए ये सुन्दर सुरीला नगमा.. 
     

1 टिप्पणी:

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

शुभा मुद्गल के गाए इस गीत को सुनना बहुत आनंद मय अनुभव है .आभार आपका .

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