शनिवार, 31 अगस्त 2013

सिने पहेली – 78

सिने पहेली – 78

  
सिने पहेली के 78 वें अंक में आप सभी प्रतिभागियों का स्वागत है. 

क्या सवाल कठिन थे इस बार भी? हमने तो अपनी तरफ से हिंट दिए थे और सोचा था कि सभी लोग पूर्ण अंक प्राप्त कर पाएंगे. चलिए इस बार कोशिश करिए निशाना लगाने की.

प्रकाश जी बच गए आप इस बारअगर आपने समय रहते जवाब ठीक नहीं करा होता तो आपका एक अंक कट गया होता. 

इन्दू जी केवल उपस्थिति दर्ज करवाने से काम नहीं चलेगा. एक सवाल का उत्तर देना तो अन्याय है हमारे साथ और जावेद जी आप कहाँ चले गए इस बार?

सरताज प्रतियोगी का ख़िताब इस बार फिर से मिला है पंकज मुकेश जी  को.  बधाई आपको. पंकज मुकेश जी और प्रकाश गोविन्द जी में कांटे की टक्कर चल रही है.

नोवें सेगमेंट से (81 वीं कड़ी ) प्रतियोगिता को दिलचस्प बनाने के लिए हमने 1 अतिरिक्त अंक का प्रावधान करा है. ये 1 अतिरिक्त अंक मिलेगा सरताज प्रतियोगी को. सरताज प्रतियोगी बनने के लिए आपको सारे सवालों के सही जवाब सभी लोगों से पहले देने होंगे.

 इस बार आपसे केवल 4 सवाल पूछे जायेंगे और सवालों के अंक है पूरे 17.

आज की पहेली के लिए आप सबको शुभकामनाएँ.

इस बार के प्रतियोगियों के अंक आप सवालों के बाद देख सकते हैं.

इस अंक से प्रतियोगिता में जुड़ने वाले नये खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए हम उन्हें यह भी बताना चाहेंगे कि अभी भी कुछ देर नहीं हुई है. आज से इस प्रतियोगिता में जुड़ कर भी आप महाविजेता बन सकते हैं. यही इस प्रतियोगिता की विशेषता है. इस प्रतियोगिता के नियमों का उल्लेख नीचे किया गया है, ध्यान दीजियेगा.

तो  आइए, आरम्भ करते हैं, आज की पहेली का सिलसिला.


आज की पहेली



सवाल-1: पहचानिए तो सही  (4 अंक)
इस दृश्य को ध्यान से देखिये और इस पर आधारित सवालों के उत्तर दीजिये.
  1. आपको पहचानना है कि ये किस गाने का दृश्य है. (2 अंक) 
  2. फिल्म के निर्देशक का नाम बताइए ( 1 अंक) 
  3.  इस गाने के संगीतकार का नाम बताइए (1 अंक)



सवाल 2: गाना कौन सा? (5 अंक)
इस गाने के मुखड़े की धुन को ध्यान से सुनिए और निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिये.
  1. यह किस गाने की  धुन है (2 अंक). 
  2.  फिल्म का नाम (1 अंक) 
  3.  इस गाने का संगीत किसने दिया है. (1 अंक). 
  4.  गायक का नाम बताइए (1 अंक).

    इसके लिए कोई हिंट नहीं दिया जा रहा इस बार.


सवाल-3: मैं कौन हूँ  (4 अंक)
मैं एक मशहूर अभिनेत्री रही हूँ. मैंने अपना फ़िल्मी सफर मराठी फिल्मों से करा. मैं  फिल्म निर्माता और निर्देशिका भी रही हूँ. उन फिल्मों से मेरी बेटियों का हिन्दी फिल्म सफर प्रारम्भ हुआ और दोनों ही बहुत सफल अभिनेत्री रहीं. मेरी चार पीढियां फ़िल्मी परदे पर आ चुकी हैं. मैंने और मेरी बेटी दोनों ने इस दुनिया को कैंसर के कारण अलविदा कहा.
  1. मुझे पहचानिए (२ अंक)
  2. मेरी पहली पीढी के कलाकार का नाम बताइए (२ अंक)

सवाल-4: बूझो तो जाने (4 अंक)
हम आपको सुनवा रहे हैं एक गाने की सिर्फ एक लाइन.
  1. आपको गाने को पहचानना है (1 अंक)
  2. संगीतकार का नाम (2 अंक)
  3. फिल्म का नाम ( 1 अंक)



जवाब भेजने का तरीका


उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 78" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 5 सितम्बर, शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।


पिछली पहेली का हल
 
प्रश्न 1: बाट चलत नई चुनरी रंग डाली , आर. सुदर्शनम और धनी राम, राजिन्दर कृष्ण
प्रश्न 2: प्रेम धवन , प्राइवेट सेकेट्री ,  अशोक कुमार (गाना - जा रे बेईमान तुझे जान लिया )
प्रश्न 3: यश चोपड़ा,सुधा मल्होत्रा, एन . दत्ता (गाना - कासे कहूं मन की बात )
प्रश्न 4: लाल मोहम्मद,  स्वामी रामानंद, के.एल.सहगल  (गाना - रानी खोल दे अपने द्वार, मिलने का दिन आ गया )
प्रश्न 5: शैलेन्द्र, मुकेश, सुनील दत्त और वहीदा रहमान    (गाना - मतवाली नार ठुमक ठुमक चली जाए)

पिछली पहेली के विजेता

सिने पहेली – 77 के विजेताओं के नाम और उनके प्राप्तांक निम्नवत हैं।


1- पंकज मुकेश, बैंगलुरु – 15 अंक

2- प्रकाश गोविन्द, लखनऊ – 15 अंक

3-विजय कुमार व्यास, बीकानेर - 12 अंक

4-क्षिती तिवारी , जबलपुर - 12 अंक 

5- चन्द्रकान्त दीक्षित, लखनऊ  – 6 अंक

6 - इन्दू  पुरी, चित्तोडगढ - 3 अंक 






आठवें  सेगमेण्ट का  स्कोरकार्ड





नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम।


कैसे बना जाए ‘सिने पहेली महाविजेता'

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। सातवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...

4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम।


'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी cine.paheli@yahoo.com पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, नमस्कार।
  


प्रस्तुति : अमित तिवारी 


शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

सचिन जिगर को मिला बड़ा कैनवस शुद्ध देसी रोमांस के रूप में

रोमांस हमारी फिल्मों का एक अहम हिस्सा है. विवधता लाने के लिए इसे नए नए पहनावे दे दिए जाते हैं. इसी चिर परिचित रोमांस का नया नामकरण हुआ है शुद्ध देसी रोमांस  के रूप में. यश राज बैनर की इस ताज़ा पेशकश में संगीत है सचिन जिगर का. गो गोवा गोन  के विवादास्पद मगर हिट गीतों के बाद ये गुज्जू संगीतकार जोड़ी इन दिनों काफी अच्छे फॉर्म में है. 

साईकिल  की घंटियाँ, सीटी और होर्न जैसी ध्वनियाँ गीत पहले गीत तेरे मेरे बीच में  का मूड बनाते हैं. मोहित और सुनिधि की आवाजों में ये गीत कमाल का है. शब्दों और धुन का ऐसा मेल बहुत दिनों में सुनने को मिला है. जबरदस्त संगीत संयोजन इसे और भी लाजवाब बना देता है. जयदीप सहानी के शब्द गजब हैं. 

 जिगर और प्रिया की युगल आवाजों में गुलाबी  गीत जयपुर शहर को समर्पित है. धुन कैची है और मधुर है. और पार्श्व संगीत के रूप में प्रभावी भी. 

हवन  कुंड  के बाद दिव्या कुमार की जोशीली आवाज़ एक बार फिर रोक्किंग फॉर्म में है चंचल मन  गीत में. लोक राजस्थानी अंदाज़ को पाश्चात्य पहनावे में ढालकर बढ़िया सजाया गया है गीत को. 

एल्बम का सबसे शानदार गीत है टाईटल ट्रेक जो है बेनी दयाल और सुनिधि के स्वरों में. जितने बढ़िया शब्द हैं उतनी ही सुरीली और गुनगुनाने पर मजबूर करने वाली धुन है. एक और शानदार गीत. 

इस एल्बम में भी ढेर सारे वाध्य पीसस् हैं जिन्हें बेहद दिलचस्प नाम दिए गए हैं जैसे मुझे किस कर सकते हो, तेज वाला अट्रेक्शन, बॉय फ्रेंड बनोगे  आदि. हमारी राय में ये सचिन जिगर का सर्वश्रेष्ठ काम है. इसे सुनते हुए हमारे श्रोता एक बार फिर पहले प्रेम की फुलकारियाँ महसूस कर पायेंगें ऐसा हमें लगता है. 

एल्बम के सर्वश्रेष्ठ गीत  -   तेरे मेरे बीच में, शुद्ध देसी रोमांस 
हमारी रेटिंग - ४.३ 

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी
आवाज़ - अमित तिवारी

गुरुवार, 29 अगस्त 2013

धीरे से एक नगमा कोई सुना रहा है...

कोई ख़्वाबों पे आकर छा जाए और नींद आकर आखों के दरों से वापस मुड जाए तो याद कीजिये गीता दत्त के इस सुरीले नग्में को श्वेता पाण्डेय के साथ, कुछ ऐसे ही जज़्बात बयाँ हो रहे हैं.…

खरा सोना गीत
ऐ दि‍ल मुझे बता दे .....
फि‍ल्‍म-भाई भाई 


आलेख - सुजॉय चटर्जी
स्‍वर-श्‍वेता पाण्‍डेय
प्रस्‍तुति-संज्ञा टंडन


मंगलवार, 27 अगस्त 2013

बोलती कहानियाँ - सुमन पाटिल का व्यंग्य चमचासन

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में प्रसिद्ध फिल्म इतिहासकार, पत्रकार और लेखक शिशिर कृष्ण शर्मा द्वारा कश्मीर के मार्मिक हालात पर लिखित हृदयस्पर्शी कहानी "खत जो लिखा नहीं गया" सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं सुमन पाटिल द्वारा लिखित व्यंग्य चमचासन जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

प्रस्तुत व्यंग्य का गद्य "सुरभित सुमन" ब्लॉग पर उपलब्ध है। "चमचासन" का कुल प्रसारण समय 3 मिनट 31 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





गाओ इसलिए कि कर्म है गीत
गाओ इसलिए कि धर्म है गीत
गाओ इसलिए कि प्रेम है गीत
गाओ इसलिए कि अहोभाव है गीत
गाओ इसलिए कि जीवन है गीत
 ~ सुमन पाटिल

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"अपने किचन में घंटों खपती है भांति-भांति के स्वादिष्ट व्यंजन बनाती है ... ”
 (सुमन पाटिल कृत "चमचासन" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.


(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)
यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
चमचासन MP3

#29th Story, Chamchasan: Suman Patil Hindi Audio Book/2013/29. Voice: Anurag Sharma

रविवार, 25 अगस्त 2013

‘कान्हा रे नन्दनन्दन...’ : राग केदार में एक प्रार्थना गीत



स्वरगोष्ठी – 134 में आज

रागों में भक्तिरस – 2

‘हमको मन की शक्ति देना मन विजय करें...’ 


‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी है, भारतीय संगीत के विविध रागों में भक्तिरस की उपस्थिति विषयक लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’। इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपके लिए संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान रागों और उनमें निबद्ध रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। दरअसल भारतीय संगीत की मूल अवधारणा ही भक्तिरस पर आधारित है। वैदिक काल के उपलब्ध प्रमाणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि तत्कालीन संगीत का स्वरूप धर्म और आध्यात्म से प्रभावित था। परन्तु वेदों से पूर्व काल के भी कुछ ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनसे उक्त काल के संगीत में भी भक्ति संगीत की अवधारणा की पुष्टि होती है। ‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में हम आपसे इन तथ्यों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही आप सुप्रसिद्ध गायक उस्ताद राशिद खाँ के स्वरों में राग केदार में निबद्ध कृष्ण-वन्दना से युक्त एक खयाल और 1971 में प्रदर्शित फिल्म ‘गुड्डी’ से राग केदार पर ही आधारित एक लोकप्रिय प्रार्थना गीत भी सुनेगे।


र्ष 1922 में पंजाब के मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई में प्राप्त पुरावशेषों का अध्ययन कर वैज्ञानिकों ने इन्हें ईसा से 4500 से 5000 वर्ष पूर्व का माना है। इस खुदाई में पुरातत्त्ववेत्ता राधाकृष्ण बनर्जी, सर जॉन मार्शल, ननीगोपाल मजूमदार, रायबहादुर रामप्रकाश चन्द्रा, रायबहादुर के.एन. दीक्षित, व्हीलर आदि अनेक विद्वानों का योगदान था। इस खुदाई में ऐसी अनेक सामग्री प्राप्त हुई थी जिससे उस युग की समृद्ध संगीत और नृत्य परम्परा की पुष्टि होती है। इनमें ताण्डव नृत्यरत शिव की मूर्ति और मिट्टी की एक ऐसी मूर्ति प्राप्त हुई थी जिसके गले से लटकता ढोलक की आकृति का एक वाद्य है। ऐसा ही एक तालवाद्य भी प्राप्त हुआ जिसकी आकृति वर्तमान मृदंग जैसा है। इसी प्रकार सतलज नदी के किनारे, रोपड़ नामक स्थान पर हुई खुदाई में संगीत वाद्यों के अनेक चिह्न मिले, जिनमें एक ऐसी नारी-मूर्ति भी है, जो चार तारों की वीणा बजा रही है। यहीं पर मिले कुछ सिक्कों पर वीणा के चित्र अंकित हैं। इन अवशेषों को विशेषज्ञों ने वैदिक युग के पश्चात अर्थात ईसा से 200 से 600 वर्ष पूर्व का माना है। 


इन सभी उदाहरणों के उल्लेख का आशय यह है कि वैदिक युग से पूर्व संगीत की मौजूदगी के जो चिह्न प्राप्त हुए हैं, वैदिक युग में उसी परम्परा का विस्तार हुआ। वैदिक काल ईसा से लगभग 2000 से 1000 पूर्व का माना जाता है। इस काल में संगीत का सर्वाधिक विकास हुआ था। इस काल में प्रचलित संगीत का ज्ञान विभिन्न संहिताओं, ब्राह्मण ग्रन्थों, प्रतिसाख्यों, व्याकरण और पुराणों के द्वारा प्राप्त होता है। संगीत को शास्त्रबद्ध करने का कार्य इसी युग में हुआ। इस युग में शास्त्रगत और लोक, दोनों प्रकार का संगीत जनसामान्य में ईश्वर की उपासना के लिए प्रचलित था। इस युग में संगीत का विकास मन्दिरों में ही हुआ था। आज हम राग केदार की दो रचनाओं के माध्यम से भक्तिरस के स्वरूप की अनुभूति करेंगे। पहले आपको 1971 में प्रदर्शित फिल्म ‘गुड्डी’ में शामिल एक प्रार्थना गीत सुनवाते हैं। इस प्रार्थना गीत को संगीतकार बसन्त देसाई ने राग केदार के स्वरों में बाँधा है। फिल्म में इसे विद्यालय की प्रातःकालीन प्रार्थना के रूप में ही फिल्माया गया है। मधुर गायिका वाणी जयराम ने इस प्रार्थना को स्वर दिया है। फिल्म में उन्होने नायिका जया भादुड़ी (अब जया बच्चन) के लिए पार्श्वगायन किया है। दादरा ताल में निबद्ध या प्रार्थना गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि आज देश की तमाम शिक्षण संस्थाओं में इसे प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाता है। आप यह गीत सुनिए और राग केदार में निहित भक्तिरस का प्रत्यक्ष अनुभव कीजिए।

  
राग केदार : ‘हमको मन की शक्ति देना मन विजय करें...’ : वाणी जयराम : फिल्म ‘गुड्डी’






भक्तिरस की अभिव्यक्ति के लिए केदार भी एक समर्थ राग है। षाड़व-षाड़व जाति, अर्थात आरोह और अवरोह दोनों में छह-छह स्वरों का प्रयोग होने वाला यह राग कल्याण थाट के अन्तर्गत माना जाता है। प्राचीन ग्रन्थकार राग केदार को बिलावल थाट के अन्तर्गत मानते थे, आज अधिकतर गुणिजन इसे कल्याण थाट के अन्तर्गत मानते हैं। इस राग में दोनों मध्यम का प्रयोग होता है। शुद्ध मध्यम का प्रयोग आरोह और अवरोह दोनों में तथा तीव्र मध्यम का प्रयोग केवल आरोह में किया जाता है। आरोह में ऋषभ स्वर और अवरोह में गान्धार स्वर वर्जित होता है। राग का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। इस राग का गायन-वादन रात्रि के पहले प्रहर में किया जाता है। राग केदार में भक्तिरस के तत्त्व का अनुभव करने के लिए अब हम आपको इस राग की एक बन्दिश सुनवाते हैं। राग केदार का एक लोकप्रिय खयाल रचना प्रस्तुत कर रहे हैं, उस्ताद राशिद खाँ। द्रुत तीनताल की इस रचना के बोल हैं, ‘कान्हा रे नन्दनन्दन...’। आप राग केदार की इस भक्ति-रचना का रसास्वादन करें और मुझे इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।

  
राग केदार : ‘कान्हा रे नन्दनन्दन...’ : उस्ताद राशिद खाँ





आज की पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ के 134वें अंक की पहेली में आज हम आपको तंत्रवाद्य पर प्रस्तुत एक रचना का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। 140वें अंक की समाप्ति तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।



1 – तंत्रवाद्य पर प्रस्तुत यह रचना किस राग में निबद्ध है?

2 – संगीत की इस रचना में किस ताल का प्रयोग किया गया है?

आप अपने उत्तर केवल radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 136वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता 


‘स्वरगोष्ठी’ के 132वें अंक की पहेली में हमने आपको विदुषी परवीन सुल्ताना के स्वरों में एक सादरा का अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग भैरवी और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- ताल झपताल। एक बार फिर दोनों प्रश्नो के सही उत्तर जबलपुर से क्षिति तिवारी, लखनऊ से प्रकाश गोविन्द और जौनपुर के डॉ. पी.के. त्रिपाठी ने दिया है। तीनों प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


झरोखा अगले अंक का

  
मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ का यह दूसरा अंक था, जिसमें आपने राग केदार के भक्ति पक्ष का रसास्वादन किया। आगामी अंक में हम एक और भक्तिरस प्रधान राग में गूँथी रचनाएँ लेकर उपस्थित होंगे। अगले अंक में इस लघु श्रृंखला की तीसरी कड़ी के साथ रविवार को प्रातः 9 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर आप सभी संगीत-रसिकों की प्रतीक्षा करेंगे।



प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र

शनिवार, 24 अगस्त 2013

सिने पहेली – 77

सिने पहेली – 77

  
सिने पहेली के 77 वें अंक में आप सभी का स्वागत है.
पिछले सप्ताह की पहेली थोड़ी सी शायद कठिन हो गयी थी. हमारे केवल एक ही प्रतियोगी पूर्ण अंक प्राप्त करने में सफल रहे और जाहिर है कि सरताज विजेता का ख़िताब भी उन्होंने अपने नाम कर दिया.

सरताज प्रतियोगी का ख़िताब मिला है पंकज मुकेश जी  को. बधाई आपको. क्षिती जी आप इतना अच्छा खेल रही हैं लेकिन इस बार आपने भाग नहीं लेकर अपना स्थान गवां दिया. कृपया नियमित भाग लीजिये. अभी भी मौका है.

इस बार की पहेली में भी हम आपको कुछ गानों के शुरुआती हिस्से को सुनवाएँगे और आपको उसे सुनकर उस गाने से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने है. हाँ आप सबकी सुविधा के लिए हिंट भी दिए गए हैं. ये गाने आप सबने कई बार सुने होंगे.  इस बार के सवालों के अंक है पूरे 15.

आज की पहेली के लिए आप सबको शुभकामनाएँ.

इस बार के प्रतियोगियों के अंक आप सवालों के बाद देख सकते हैं.

इस अंक से प्रतियोगिता में जुड़ने वाले नये खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए हम उन्हें यह भी बताना चाहेंगे कि अभी भी कुछ देर नहीं हुई है. आज से इस प्रतियोगिता में जुड़ कर भी आप महाविजेता बन सकते हैं. यही इस प्रतियोगिता की विशेषता है. इस प्रतियोगिता के नियमों का उल्लेख नीचे किया गया है, ध्यान दीजियेगा.

तो  आइए, आरम्भ करते हैं, आज की पहेली का सिलसिला.


आज की पहेली

सवाल-1: 

  1. गाने का नाम बताइए (1 अंक)
  2. संगीतकार जोड़ी का नाम बताइए (1 अंक)
  3. गीतकार का नाम बताइए (1 अंक)
हिन्ट: इस गाने को एक मशहूर निर्माता, निर्देशक और अभिनेता की पत्नी ने गाया था..


 

सवाल-2: 

  1. गाने के गीतकार का नाम बताइए (1 अंक)
  2. इसकी फिल्म का नाम बताइए (1 अंक)
  3. यह गाना किस पर फिल्माया गया है (1 अंक)
हिन्ट: 1962 में बनी इस फिल्म के इस गाने को मन्ना डे ने गाया है और यह गाना राग बागेश्री पर आधारित है. 



सवाल- 3 : 

  1. गाने के निर्देशक का नाम बताइए (1 अंक)
  2. इस गाने को किसने गाया है(1 अंक)
  3. गाने के संगीतकार का नाम बताइए (1 अंक)
 हिन्ट: इस निर्देशक की यह पहली फिल्म थी.



सवाल - 4: 

  1. गाने के संगीतकार का नाम बताइए (1 अंक)
  2. इस गाने के गीतकार का नाम बताइए (1 अंक)
  3. गायक कौन हैं (1 अंक)
हिन्ट:इस गाने के गायक और गायिका दोनों ने इस फिल्म में पहली बार साथ साथ अभिनय किया था और गाया था.



सवाल - 5: 

  1. गाने के गीतकार का नाम बताइए (1 अंक)
  2. इस गाने को किसने गाया है (1 अंक)
  3. यह गाना किस पर फिल्माया गया है (1 अंक)
हिन्ट: यह गाना मारू बिहाग राग में है और संगीतकार हैं शंकर जयकिशन.



जवाब भेजने का तरीका


उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 77" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 29 अगस्त, शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।


पिछली पहेली का हल
 
प्रश्न 1: मतवाली आँखों वाले , राहुल देव बर्मन , महमूद और हेलन
प्रश्न 2: मदन मोहन, हृषिकेश मुखर्जी,  राजेश खन्ना (तुम बिन जीवन कैसा जीवन)
प्रश्न 3:शंकर-जयकिशन,  गुलज़ार, सिमी गरेवाल और कबीर बेदी   (जब भी ये दिल उदास होता है )
प्रश्न 4: रामलाल, हसरत जयपुरी , गीत गाया पत्थरों ने
प्रश्न 5: रविन्द्र जैन , यशुदास, नसीरुद्दीन शाह और रामेश्वरी

पिछली पहेली के विजेता

सिने पहेली – 76 के विजेताओं के नाम और उनके प्राप्तांक निम्नवत हैं।


1- पंकज मुकेश, बैंगलुरु – 15 अंक

2- विजय कुमार व्यास, बीकानेर - 12 अंक

3-प्रकाश गोविन्द, लखनऊ – 12 अंक 

4- चन्द्रकान्त दीक्षित, लखनऊ  – 9 अंक 

5- जावेद अहमद - 8 अंक  

6 - इन्दू  पुरी, चित्तोडगढ - 3 अंक 






आठवें  सेगमेण्ट का  स्कोरकार्ड





नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम।


कैसे बना जाए ‘सिने पहेली महाविजेता'

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। सातवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...

4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम।


'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी cine.paheli@yahoo.com पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, नमस्कार।
  


प्रस्तुति : अमित तिवारी 


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