Wednesday, September 18, 2013

कब तक न हँसेगी गुडिया...

रूठ जाए कभी जो नन्हीं गुडिया तो उसे मनाने से बड़ा कोई काम नहीं. वो हंसी जो नित होंठो पर खिली मिलती है कुछ पल को कभी पलकों के तले तो कभी आँखों के किनारे छुप सी जाती है, पर यकीन मानिये वो लौट भी आती है झट से अगर उसे इस तरह बुलाओगे तो....सुनिए लता के स्वरों में एल पी का रचा, मजरूह का लिखा ये नटखट सा गीत, प्रस्तुतकर्ता हैं अर्शिना सिंह
  

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