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गीत अतीत 13 || हर गीत की एक कहानी होती है || दम दम || फिल्लौरी || शाश्वत सचदेव ||

Geet Ateet 13

Har Geet Kii Ek Kahaani Hoti Hai...
Dum Dum
Phillauri
(Romy, Vivek Hariharan, Anvita Dutt)
Shashwat Sachdev- Composer

आज जिस गीत की कहानी लेकर हम उपस्तिथ हैं उसमें महक है पंजाब के मिटटी की...फिल्म "फिल्लौरी" के इस मधुर और सुरीले गीत को आवाज़ दी है रोमी और विवेक हरिहरन ने, अन्वित्ता दत्त ने इसे कलमबद्ध किया है सुरों से सजाया है हमारे आज के मेहमान संगीतकार शाश्वत सचदेव ने. बहुत ही युवा कलाकार है शाश्वत, और अपनी पहली ही फिल्म में इन्होने अपने काम उम्मीदें जगाई है....मिलिए शाश्वात से और सुनिए "दम दम" गीत के बनने की कहानी, प्ले पर क्लिक करें और आनंद लें  




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महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

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