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"हैंगोवर तेरी यादों का..." - क्यों सोनू निगम नहीं गा सके इस गीत को?


एक गीत सौ कहानियाँ - 54
 

हैंगओवर  तेरी यादों का...




'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारी ज़िन्दगियों से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तंभ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 54 वीं कड़ी में आज जानिये फ़िल्म 'किक' के मशहूर गीत "हैंगओवर तेरी यादों का" से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें। 



"चांदी की डाल पर सोने का मोर..."
किसी फ़िल्मी गीत की सफलता में केवल गायक, गीतकार और संगीतकार की सफलता ही छुपी नहीं होती, बल्कि उस अभिनेता की सफलता भी छुपी होती है जिन पर वह गीत फ़िल्माया गया होता है। और यही कारण है कि कई अभिनेता अपने उपर फ़िल्माये जाने वाले गीतों को लेकर बहुत सचेतन होते हैं। गुज़रे ज़माने के नायकों में दो नाम हैं शम्मी कपूर और राजेश खन्ना, जो अपने फ़िल्मों के गीतों को लेकर बहुत सीरियस हुआ करते थे। सुनने में आता है कि ये दोनों अभिनेता गीतों के सिटिंग्पर पहुँच जाया करते थे और गीत की रचना प्रक्रिया में पूर्ण रूप से भाग भी लेते थे, अपने सुझाव देते थे। और यही वजह है कि शम्मी कपूर और राजेश खन्ना की फ़िल्मों के गाने सदा हिट हो जाया करते। फ़िल्म भले चले न चले, गानें ज़रूर चल पड़ते थे। नए ज़माने में एक नाम है सलमान ख़ान का जो अपनी फ़िल्मों के गीत-संगीत में गहन रुचि रखते हैं। 1990 और 2000 के दशकों में उनकी फ़िल्मों के गानें अपनी मेलडी के लिए लोगों में बेहद पॉपुलर हुआ करते थे, पर इस नए दशक में उनकी जितनी फ़िल्में आईं, उनके गीतों में मेलडी से ज़्यादा मसाला पाया जाने लगा है। इससे यह अहसास होता है कि अब सलमान ख़ान चाहते हैं कि ये गानें पब्लिक और यंग्जेनरेशन की ज़ुबाँ पर तुरन्त चढ़ जाये और डान्स पार्टियों की शान बनें। इस होड़ में मेलडी को शायद कम महत्व दिया जाने लगा है उनकी फ़िल्मों के गीतों में आजकल। ख़ैर, हाल में उनकी फ़िल्म आई 'किक' जिसके गाने इन दिनों धूम मचा रहे हैं उनकी पिछली फ़िल्मों ही की तरह। मिका सिंह का गाया "जुम्मे की रात है" नंबर वन पर है तो सलमान ख़ान का गाया "हैंगोवर तेरी यादों का" भी अपना जादू चला रहा है। यह सलमान ख़ान का गाया पहला गाना नहीं है। उन्होंने इससे पहले साल 1999 में फ़िल्म 'हेलो ब्रदर' में "चांदी की डाल पर सोने का मोर" गाया था। उस बार भले उनका उस गीत को गाना पूर्वनिर्धारित था, पर 'किक' का यह गीत उनकी झोली में अचानक ही आ गया।

बात कुछ इस तरह की थी कि "हैंगोवर" गीत के लिए सबसे पहले सोनू निगम को मौका दिया गया था। संगीतकार मीत ब्रदर्स अनजान और गीतकार कुमार ने निर्माता निर्देशक साजिद नडियाडवाला को सोनू निगम और श्रेया घोषाल का नाम सुझाया। साजिद ने हामी भी भर दी। गाना रिहर्स होकर सोनू की आवाज़ में रेकॉर्ड भी हो गया। पर होनी को कुछ और ही मंज़ूर था। साजिद ने किस वजह से सोनू के गाये गीत को रद्द करने का फ़ैसला लिया यह स्पष्ट होता है सोनू निगम के Times of India' दिए हुए एक साक्षात्कार में। सोनू कहते हैं, "amendment के महीनों बीत जाने के बाद भी लोग अब तक यह नहीं समझ पाए हैं कि Copyright Act में हम किस चीज़ के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। सब मुझसे पूछते हैं, "तो आप म्युज़िक डिरेक्टर्स से रॉयल्टी ले रहे हैं?" जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था। कोई भी गायक किसी प्रोड्युसर या कम्पोज़र से रॉयल्टी नहीं ले सकता। 2012 में जो नया अमेन्डमेन्ट आया उसके अनुसार अगर किसी गायक का गाया गीत किसी सार्वजनिक स्थान पर बजाया जाता है जैसे कि रेस्तोराँ, लिफ़्ट, प्लेन आदि, तो उस गायक को 'पर्फ़ॉर्मैन्स रॉयल्टी' मिलनी चाहिए। यह रॉयल्टी गायक को सीधे नहीं बल्कि India Singers Rights Association (ISRA) को दी जायेगी, जो गायक तक पहुँचायेगी। अगर म्युज़िक कम्पोज़र का पैसा है, उसे रखो तुम अपने पास। मैं किसी और से ले रहा हूँ और कम्पोज़र को उससे भी प्रॉबलेम है। अब यह मेरी समझ नहीं आती। यह बस एक ईगो इश्यु बन गया है। हर कोई कॉनट्रैक्ट के नियमों और कानूनी मसलों से डरते हैं। कोई न कोई क्लॉज़ डाल देंगे जिसकी वजह से हम सिंगर्स, कम्पोज़र्स और लिरिसिस्ट्स जाल में फँस जाते हैं। इस बात पर बहस हर किसी ने किया पर मैं टारगेट बना क्योंकि मैं चुप नहीं रहा। और इस वजह से मेरे गाने डब होने शुरु हो गए। मेरे गाये हुए गाने दूसरे गायकों से दोबारा डब करवाये जाने लगे। ये "हैंगोवर" जो सलमान ने गाया है, वह पहले मैंने गाया था। मुझे इससे कोई प्रॉब्लेम नहीं, पर मैं ऐसा कोई कॉनट्रैक्ट साइन नहीं करना चाहता जो ग़ैर-कानूनी हो और जिसका कोई मतलब न बनता हो। पर एक कॉनट्रैक्ट्स बदल रहे हैं, और हाल में मैंने दो गीत गाये हैं।" इस तरह से सोनू का गाया "हैंगोवर" दोबारा सलमान की आवाज़ में रेकॉर्ड हुआ, और इसी तरह से फ़िल्म 'मैं तेरा हीरो' में भी सोनू का गाया "ग़लत बात है" री-डब किया गया जावेद अली की आवाज़ में।

मीत ब्रदर्स अनजान
अब सवाल यह उठता है कि "हैंगोवर" के लिए अगर सोनू नहीं तो फिर सलमान ही क्यों? क्यों नहीं किसी और प्रतिष्ठित गायक से गवाया गया यह गीत? बात दरसल ऐसी हुई कि सोनू के गाये गीत को शामिल ना किए जाने के बाद नए गायक की तलाश शुरू हुई, ऐसे में एक दिन सलमान ख़ान युंही इस गीत को गा रहे थे। उन्हें यह गीत गाता देख साजिद नडियाडवाला के मन में यह विचार आया कि क्यों न इसे सल्लु मियाँ से ही गवा लिया जाए। जैसे ही जनता को यह पता चलेगा कि सलमान ने इस गीत को गाया है, तो वह गीत तो वैसे ही हिट हो जाएगा। साजिद ने जब यह बात संगीतकार मीत ब्रदर्स अनजान को बताई तो मीत ब्रदर्स को भी सुझाव सही लगा। फिर शुरू हुआ सलमान को मनाने का काम। सलमान ने साफ़ कह दिया कि उन्हें कोई गाना-वाना नहीं आता और अगर सोनू नहीं तो किसी और गायक से इसे गवा लिया जाए। पर सब के समझाने पर और यह विश्वास दिलाने पर कि Melodyn और Antares जैसे सॉफ़्टवेर के द्वारा उनके गाए गीत को बिल्कुल सुरीला बनाया जा सकता है, सलमान मान गए। श्रेया घोषाल तो अपना हिस्सा पहले गा ही चुकी थीं, सलमान ख़ान ने भी गाया, और जब पूरा गाना बन कर मार्केट में आया तो तुरन्त हिट हो गया। Melodyn और Antares के ज़रिए अब कोई भी गाना गा सकता है। यहाँ तक कि गायक सिर्फ़ बोलों को पढ़ भी दे तो भी वो इनके ज़रिए सुरों में ढाल दिया जा सकता है। अत: अब प्रश्न यह उठता है कि क्या भविष्य में फ़िल्मी पार्श्वगायन के लिए गायकों की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी? अगर आवाज़ अच्छी है तो कोई भी पार्श्वगायक बन सकता है। पता नहीं यह अच्छा हो रहा है या ग़लत! पर सोनू निगम के साथ जो हुआ वह अच्छा नहीं था, इतना हम ज़रूर कह सकते हैं। बस इतनी सी है इस गीत के पीछे की दास्तान। लीजिए, अब आप वही गीत सुनिए।

फिल्म किक : 'हैंगओवर तेरी यादों का...' : सलमान खाँ और श्रेया घोषाल : गीतकार - कुमार 




अब आप भी 'एक गीत सौ कहानियाँ' स्तंभ के वाहक बन सकते हैं। अगर आपके पास भी किसी गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं, उनके बनने की कहानियाँ उपलब्ध हैं, तो आप हमें भेज सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि आप आलेख के रूप में ही भेजें, आप जिस रूप में चाहे उस रूप में जानकारी हम तक पहुँचा सकते हैं। हम उसे आलेख के रूप में आप ही के नाम के साथ इसी स्तम्भ में प्रकाशित करेंगे। आप हमें ईमेल भेजें cine.paheli@yahoo.com के पते पर।


खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 

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