Skip to main content

नाचने के लिए तैयार रहें यमला पगला दीवाना के संग




ताज़ा सुर ताल - यमला पगला दीवाना 02

यमला पगला दीवाना यानी ही मैन धर्मेन्द्र और उनके दो होनहार बेटों सन्नी और बोबी की शानदार तिकड़ी, जो अपने पहले संस्करण की आपार सफलता के बाद अब एक ब्रेंड के रूप में स्थापित हो चुके हैं, लौट रहे हैं दूसरे संस्करण में नए धमाल और मस्ती के साथ. जाहिर है फिल्म में पंजाबी फ्लेवर की अधिकता होगी, ऐसे में सभी गीत भी इसी कलेवर के होंगें ये तो तय है, आईये एक नज़र दौडाएं यमला पगला दीवाना २ के संगीत एल्बम में संकलित गीतों पर. फिल्म में संगीत का पक्ष संभाला है संगीतकार जोड़ी है शरीब तोशी ने.

सुखविंदर सिंह, शंकर महादेवन, और संचित्रा भट्टाचार्य की आवाजों में है पहला गीत जो कि शीर्षक गीत भी है. संगीतकार की तारीफ कि उन्होंने इस बार एल पी के रचे पारंपरिक मैं जट यमला पगला दीवाना की धुन का सहारा नहीं लिया वरन एक नयी धुन के साथ इस तिकड़ी को संगीतमयी सलामी दी. रिदम में विविधता भी है और शब्द भी सटीक हैं.

अगला गीत है चांगली है चांगली है, जिसे आवाज़ का पावर बैक अप दिया है ऊर्जा से भरे मिका सिंह ने. सड़क छाप मस्ती भरे गीतों की लंबी फेहरिस्त में एक नया जुड़ाव है ये गीत. तेज बीट्स और ऊर्जा से भरे इस गीत के अंत में ढोल और सीटियों से गजब का माहौल रचा गया है.

पहले दो गीतों से कुछ अलग है अगला गीत जिसमें लोक अंदाज़ की झलक जचती है. सूट तेरा लाल रंग द को सोनू निगम ने अपने निराले अंदाज़ में गाया है, सुनिधि की आवाज़ सोनू की आवाज़ को बढ़िया कोंट्रास्ट देती है. रिदम का उतार चढ़ाव बहुत ही बढ़िया है. धुन भी बेहद मधुर है. सुरीला गीत.

नए गायक दलजीत दोसंझ की आवाज़ में मैं एन्दा ही नाचना में देओल परिवार स्वीकार करता है कि उनकी नाचने की अदा सिने जगत के अन्य अभिनेताओं जैसी बेशक नहीं है पर जैसे भी हैं उनका मुक्तलिफ़ अंदाज़ सालों से दर्शकों को भाता आया है और भाता रहेगा. गीत की सरलता और मासूमियत ही गीत की जान है. आप ऐसे ही नाचिये धर्म जी....हम तो देखेंगें...

जट यमला पागल हो गया गीत एक और पार्टी गीत है, मिका की आवाज़ में. गीत सुनने से अधिक देखने में अच्छा लग सकता है. गीत के दो संस्करण है, शरीब साबरी का गाया संस्करण कुछ लो टोन में है. सुजेलो की आवाज़ दोनों संस्करण में अपेक्षा अनुरूप ही है.

साड्डी दारु द पानी भी दरअसल एक और संस्करण ही है शीर्षक गीत का, इसके आलावा सभी गीतों का मिला जुला एक मेष अप भी है. पंजाबी रिदम हमेशा ही आपको नयी ताजगी से भरने में कामियाब रहे हैं. मूड फ्रेश करने के लिए इन गीतों को सुनना एक अच्छी सलाह है.

एल्बम के बेहतरीन गीत
यमला पगला दीवाना, सूट तेरा लाल रंग द, मैं तो एन्दा ही नाचना
हमारी रेटिंग ३.१  

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी

आवाज़ - अमित तिवारी
  



यदि आप इस समीक्षा को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:

Comments

समीक्षा तो अच्छी की है. सुनते हैं इस फिल्म के संगीत को.

Popular posts from this blog

भला हुआ मेरी मटकी फूटी.. ज़िन्दगी से छूटने की ख़ुशी मना रहे हैं कबीर... साथ हैं गुलज़ार और आबिदा

महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

"जाने कहाँ गए वो दिन...", कौन कौन से थे इस गीत के वो तीन अन्तरे जो जारी नहीं हुए?

एक गीत सौ कहानियाँ - 95 'जाने कहाँ गए वो दिन ...'   रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना  रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'।  इसकी 95-वीं कड़ी में आज जानिए 1970 की फ़िल्म ’मेरा नाम जोकर’ के मशहूर गीत "जाने कहाँ गए वो दिन..." के बारे में जिसे मुके...

छम छम नाचत आई बहार....एक ऐसा मधुर गीत जिसे सुनकर कोई भी झूम उठे

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 366/2010/66 "ए क बार फिर बसंत जवान हो गया, जग सारा वृंदावन धाम हो गया, आम बौराई रहा, सरसों भी फूल रहा, खेत खलिहान शृंगार हो गया, पिया के हाथ दुल्हन शृंगार कर रही, आज धूप धरती से प्यार कर रही, बल, सुंदरता के आगे बेकार हो गया, सृष्टि पे यौवन का वार हो गया, रात भी बसंती, प्रभात भी बसंती, बसंती पिया का दीदार हो गया, सोचा था फिर कभी प्यार ना करूँगा, पर 'अंजाना' बसंत पे निसार हो गया, एक बार फिर बसंत जवान हो गया।" अंजाना प्रेम ने अपनी इस कविता में बसंत की सुंदरता को शृंगार रस के साथ मिलाकर का बड़ा ही ख़ूबसूरत नज़ारा प्रस्तुत किया है। दोस्तों, इन दिनों आप 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर सुन रहे हैं इस रंगीले मौसम को और भी ज़्यादा रंगीन बनानेवाले कुछ रंगीले गीत इस 'गीत रंगीले' शृंखला के अंतर्गत। आज प्रस्तुत है राग बहार पर आधारित लता मंगेशकर की आवाज़ में फ़िल्म 'छाया' का गीत "छम छम नाचत आई बहार"। राजेन्द्र कृष्ण के लिखे इस गीत की तर्ज़ बनाई है सलिल चौधरी ने। १९६१ की यह फ़िल्म ऋषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म थी जिसमें मुख्य कलाकार थे सुनिल...