शनिवार, 22 नवंबर 2008

सुनो कहानी: प्रेमचंद की 'बंद दरवाजा'

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की लघु कहानी 'बंद दरवाजा'

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में प्रेमचंद की रचना 'देवी' का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं बाल-मनोविज्ञान का सुंदर चित्रण करती प्रेमचंद की एक छोटी कहानी "बंद दरवाजा", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। कहानी का कुल प्रसारण समय है: 2 मिनट और 59 सेकंड।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।


मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए प्रेमचंद की एक नयी कहानी

उसकी शरारतें शुरू हो गईं। कभी कलम पर हाथ बढ़ाया, कभी कागज पर। मैंने गोद से उतार दिया। वह मेज का पाया पकड़े खड़ा रहा। घर में न गया। दरवाजा खुला हुआ था। (प्रेमचंद की "बंद दरवाजा" से)

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#Fourteenth Story, Band Darwaza: Munsi Premchand/Hindi Audio Book/2008/13. Voice: Anuraag Sharma

1 टिप्पणी:

सजीव सारथी ने कहा…

wow another short and crispy story...badhai anuraag ji

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