Saturday, November 15, 2008

सुनो कहानी: प्रेमचंद की 'देवी'

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की लघु कहानी 'देवी'

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में प्रेमचंद की रचना 'वरदान' का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रेमचंद की एक छोटी किंतु प्रेरणादायी कहानी "देवी", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। कहानी का कुल प्रसारण समय है: 2 मिनट और 35 सेकंड।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।




मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए प्रेमचंद की एक नयी कहानी

देवी ने बात काटते हुए कहा, "अजी वह क्या बात थी, मुझे वह नोट पड़ा मिल गया था, मेरे किस काम का था।" (प्रेमचंद की "देवी" से एक अंश)


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#Thirteenth Story, Devi: Munsi Premchand/Hindi Audio Book/2008/12. Voice: Anuraag Sharma

4 comments:

सजीव सारथी said...

वाह अनुराग जी छोटी सी कहानी क्या खूब अंदाज़ में बयां किया है आपने मज़ा आ गया .... great work again

डॉ .अनुराग said...

शुक्रिया यहाँ सुनवाने के लिए

शोभा said...

बहुत अच्छी कहानी है। सुनकर आनन्द आया ।

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर, बहुत मजा आया.
धन्यवाद

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